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क्यों न पाकिस्तान को ही ‘आतंकवादी देश’ घोषित किया जाए

  • Updated on 5/7/2019

भारत को 20 से अधिक बार लहूलुहान करने वाले पाकिस्तानी आतंकी एवं जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को सुरक्षा परिषद ने आखिर वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया। इससे पहले डा. मनमोहन सिंह के समय 2009 में पहली बार भारत ने इसे आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था परन्तु हर बार पाकिस्तान का आका चीन अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करता रहा। पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार ने फिर यू.एन. में इस पर कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखा था। इस बार फ्रांस, ब्रिटेन, अमरीका और रूस ने मिलकर इसके खिलाफ प्रस्ताव रखा था, जिसे चीन ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी। हकीकत में यह भारत की कूटनीतिक जीत है तो दूसरी तरफ दूसरे देशों को भी यह श्रेय जाता है। चीन ने भी प्रतिबंध समिति के निष्पक्ष सबूतों को देखकर किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई।

मसूद अजहर ने 1994 में कश्मीर में आकर आतंकवादी संगठनों को एकत्रित करके भारत के खिलाफ लामबंद करना शुरू किया तो उसे पकड़कर जेल में बंद कर दिया गया। 1999 में भारत के विमान का जब अपहरण कर लिया गया तो यात्रियों को छोडऩे के एवज में इसे जेल से रिहा करना पड़ा और पाकिस्तान में उसने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद बनाया। अक्तूबर 2001 में कश्मीर विधानसभा और फिर भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला करवाया। पठानकोट के एयरबेस तथा 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत ने इसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विश्व संगठन पर दबाव डालना शुरू कर दिया था।

हाफिज सईद अभी भी आतंकी गतिविधियों में संलिप्त

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज सईद को भी अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित किया था परन्तु आज भी वह आतंकवादी गतिविधियों में पूरी तरह संलिप्त है। यद्यपि उस पर कुछ आॢथक प्रतिबंध लगाए गए थे लेकिन अब भी वह खुलेआम पाकिस्तान में भारत के खिलाफ रैलियां करता है, आतंकियों को प्रोत्साहित करता है परन्तु किसी भी हमले की अब जिम्मेदारी नहीं लेता। अब सवाल पैदा होता है कि पाकिस्तान सरकार यदि मसूद अजहर पर आॢथक प्रतिबंध लगा भी दे, उसकी प्रापर्टी पर कब्जा कर ले इसके बावजूद यदि वह अपने संगठन का नया नाम रखकर आतंकवादी गतिविधियां करता रहे तो फिर उस पर कौन कार्रवाई करेगा?

यह एक कड़वी सच्चाई है कि पाकिस्तान में 22 आतंकवादी संगठन मौजूद हैं और यदि 20 सालों में एक आतंकवादी संगठन पर पाबंदी लगाई जाती है तो 22 आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कितने सौ वर्ष लगेंगे? पाकिस्तान में लश्कर-ए-तोएबा का सरगना हाफिज सईद, हिजबुल मुजाहिद्दीन का सैयद सलाहुद्दीन और मुम्बई हमलों का जिम्मेदार दाऊद इब्राहिम तथा उसके साथी छोटा शकील, टाइगर मेमन और जकी-उर-रहमान लखवी जैसे बहुत सारे आतंकी मौजूद हैं। आतंकवाद पर पूरी तरह नकेल कसना अति जरूरी है। कामयाबी तभी मिल सकती है यदि पाकिस्तान को ही आतंकवादी देश घोषित कर दिया जाए और उसको तमाम तरह की आॢथक सहायता बंद कर दी जाए ताकि वह अपने देश में आतंकवाद को खत्म करने के लिए कड़े से कड़ा कदम उठाए। विश्व में 262 आतंकी और 82 आतंकी संगठन हैं जो इस समय संयुक्त राष्ट्र की आतंकी सूची में हैं, जबकि पाकिस्तान में 132 आतंकी और 22 आतंकी संगठन हैं जो विश्व संगठन की सूची में दर्ज हैं।

चीन पर असर

यह एक कड़वी सच्चाई है कि यदि पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित किया जाता है तो सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ता है क्योंकि चीन पाकिस्तान में 7 लाख करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है। चीन द्वारा निर्मित सीपैक पाकिस्तान के पख्तूनख्वा प्रदेश और ब्लोचिस्तान से होकर गुजरता है। यहां के लोगों में काफी निराशा है और कई बार चीन के नागरिकों पर वहां के लोगों ने हमले भी किए हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान के आतंकवादी ईरान में भी हमले कर रहे हैं और दोनों देशों के संबंध बहुत ज्यादा बिगड़े हुए हैं। पाकिस्तान उसके साथ अपने संबंध सुधारना चाहता है। श्रीलंका में पिछले कुछ दिनों में हुए हमलों के तार भी पाकिस्तान के आतंकवादियों से जुड़े हुए मिले हैं। इसलिए चीन ने अपने हितों को देखते हुए मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने में ही अपना भला समझा। इससे पहले चार बार मसूद के खिलाफ प्रस्ताव लाए गए थे जिनमें 2009, 2016, 2017 और मार्च 2019 में रखे गए प्रस्ताव को चीन वीटो करता आया है। भारत हमेशा अपने पड़ोसी देशों से मधुर संबंध चाहता आया है परन्तु चीन की विकासवादी नीति एक बहुत बड़ा खतरा है।

ब्रिटिश सरकार की साजिश

पाकिस्तान 1947 से पहले भारत का ही एक अंग था और इसी धरती पर सबसे पहले भारतीय संस्कृति प्रफुल्लित हुई थी। इसी धरती पर तक्षशिला यूनिवॢसटी थी जहां चंद्रगुप्त मौर्य पढ़ते थे और चाणक्य वहां प्राध्यापक थे। विश्व प्रसिद्ध ऋषि चरक भी यहीं पढ़ाया करते थे। उस समय के भारतीय नेता ब्रिटिश सरकार की घिनौनी साजिश के चंगुल में फंस कर भारत के बंटवारे का फैसला कर बैठे जिसका परिणाम अब तक भारत भुगत रहा है। हकीकत में पाकिस्तान का जन्म साम्प्रदायिक संकीर्णता और घोर नफरत के कारण हुआ, जो आज तक निरंतर चल रहा है। पाकिस्तान चार बार भारत पर आक्रमण कर चुका है और हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी है। परन्तु इतना कुछ होने के बावजूद वह अपनी इन हरकतों से बाज नहीं आ रहा। इतिहास में एक ऐसा समय भी आया था जब 1971 में पाकिस्तान के साथ सारे मसले हल किए जा सकते थे, परन्तु हमारे नेताओं की दरियादिली के कारण वे अभी तक लटकते चले आ रहे हैं।

हकीकत में पाकिस्तान में जब से आतंकवाद शुरू हुआ है उसकी आॢथक हालत दिन-ब-दिन पतली होती जा रही है, अगर विश्व बैंक या अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष या कोई अन्य बड़ा देश उसकी आॢथक सहायता नहीं करता तो उसका दिवाला निकल सकता है। बेहतर यही है कि पाकिस्तान पूरी तरह अपनी धरती से आतंकवाद को खत्म करे, भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए। दोनों देशों का व्यापार बढ़े और पाकिस्तान में महंगाई को लगाम लगाई जा सके। आखिर दोनों देशों की समस्याएं भी एक जैसी हैं जैसे गरीबी, बेरोजगारी, पीने का पानी और अच्छी सेहत सेवाएं इत्यादि। दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के देश में जाने की इजाजत मिले जैसे कि कनाडा और अमरीका तथा यूरोप के बहुत सारे देशों में है ताकि भारत और पाकिस्तान आपस में अच्छे दोस्त बनें जिससे कि पुरानी कड़वाहट को समाप्त किया जा सके। आखिर लड़ाई की भी कोई सीमा होती है। 72 वर्षों में भारत-पाक के दुश्मनों को तो फायदा हो सकता है, पर इन दोनों देशों के नागरिकों को सिवाय लड़ाई के क्या मिला? पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि वह भारत की प्राचीन धरती का ही टुकड़ा है और 1947 से पहले वह भारतीय ही तो थे। - प्रो दरबारी लाल

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