Monday, Mar 01, 2021
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why the world is expecting india from the corona vaccine report prsgnt

कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत से क्यों उम्मीद लगाए बैठी है दुनिया, पढ़ें रिपोर्ट

  • Updated on 4/27/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दुनिया में कोरोना वायरस की दवा को बनाने के लिए अब तक हजारों की तादात में प्रयोग हो चुकें होंगे! लेकिन अभी तक सिर्फ प्रयोग ही चल रहे हैं। कोई भी देश अभी तक कोरोना की दवा बना पाने का दावा नहीं कर पाया है। लेकिन इस बीच पूरी दुनिया भारत से उम्मीद लगाए बैठी है, आखिर इसका कारण क्या है?

क्या इसका कारण वो दवाएं हैं जो भारत बना कर निर्यात करती है या फिर भारत का आयुर्वेद इसकी वजह है, जिसे दुनियाभर में अपनाया जाता है। आईये जानने की कोशिश करते हैं।

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भारत और अमेरिका एक साथ
कभी अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा था कि भारत और अमरीका मिलकर कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन विकसित कर रहे हैं। इसका सबूत यह है कि पिछले तीन दशक से भारत और अमेरिका एक संयुक्त वैक्सीन डिवेलपमेंट प्रोग्राम में साथ काम कर रहे हैं। इस प्रोग्राम के बारे में पूरी दुनिया भी जानती है क्योंकि इसे इंटरनेशनल मान्यता मिली हुई है।

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वैक्सीन हब भारत
यहां आपको ये बताना जरूरी है कि दुनिया में भारत को वैक्सीन हब भी कहते हैं। इसका कारण यह है कि भारत जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन बनाने के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरर्स में से एक है। भारत में कई वैक्सीन बनाने वाली बड़ी कंपनियां मौजूद हैं।

इनमें कुछ छोटी कंपनियां भी वैक्सीन बनाने का काम करती हैं। इन कंपनियों में पोलियो, निमोनिया, रोटावायरस, बीसीजी, मीजल्स, मंप्स, मैनिनजाइटिस और रूबेला समेत दूसरी कई बीमारियों के लिए वैक्सीन बनाई जाती है।

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भारत की ये कंपनियां बना रही वैक्सीन
इस मुश्किल समय में भारत की आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियां वैक्सीन बनाने में लगी हैं इनमें सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया शामिल हैं, ये उत्पादन और दवाएं बेचने के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन कंपनी मानी जाती है। यह कंपनी हर साल 1।5 अरब डोज बनाती है।

पुणे में इस कंपनी के दो बड़े प्लांट हैं। इसमें करीब 7,000 लोग काम करते हैं। बता दें कि नीदरलैंड्स और चेक रिपब्लिक में भी इसके छोटे प्लांट्स हैं। यह कंपनी लगभग 20 तरह की वैक्सीन 165 देशों को सप्लाई करती है।

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भारतीय कंपनियां सबसे आगे
वहीँ, प्रोडक्शन के हिसाब से देखें तो भारत की वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां दुनियाभर में सबसे ज्यादा डोज बनाती हैं। कुछ कंपनियां अकेले ही 40 से 50 करोड़ डोज बना सकती है।

बीबीसी में छपी एक खबर के अनुसार, हैदराबाद की भारत बायोटेक ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ विसकोंसिन मेडिसन और अमरीकी फर्म फ़्लूजेन के साथ आने का ऐलान किया है। इसके बाद ये दोनों कंपनियां मिलकर दुनिया भर में निर्यात करने के लिए 30 करोड़ डोज बनाएंगी। इसके इतर कुछ चार-पांच और घरेलू कंपनियां वैक्सीन विकसित करने के शुरुआती चरण में हैं।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें

 

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