Monday, May 23, 2022
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will mulayam''''s daughter-in-law aparna yadav be the young yadav face in bjp!

क्या मुलायम की बहू अपर्णा यादव होगी BJP में युवा यादव चेहरा!

  • Updated on 1/20/2022

नई दिल्ली/ रतन मणि लाल। उत्तर प्रदेश में 2017 के विधान सभा चुनाव की तरह ही, इस बार भी चुनाव के ठीक पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया के परिवार में अंतरविरोध और विचारधाराओं का टकराव सामने आ  गया है। अंतर सिर्फ इतना है कि जहां 2017 में अखिलेश यादव ने खुले तौर पर बगावत करते हुए अपने चाचा शिवपाल यादव समेत कई पार्टी नेताओं को पार्टी के बाहर का रास्ता पकडऩे पर मजबूर कर दिया था, वहीं इस बार यादव परिवार की छोटू बहू अपर्णा यादव ने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।

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एक और अंतर यह भी है कि 2017 में अखिलेश ने पूरे प्रकरण में जिस तरह का व्यवहार किया था उसकी उम्मीद कई लोगों को नहीं थी, वहीं इस बार, अपर्णा इससे पहले कई बार भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ कर चुकी हैं। यह भी लगता है कि अखिलेश को शायद इस दल-बदल की उम्मीद रही होगी, क्योंकि लखनऊ में पिछले कई दिनों से इस आशय की खबरें हवा में तैर रही थीं। उनकी प्रतिक्रिया भी कुछ ऐसा ही दर्शाती है। 

अखिलेश ने इस विषय पर सवाल किये जाने पर बड़े संयत तरीके से अपर्णा को ‘बधाई और शुभकामना’ देते हुए कहा कि वे खुश हैं कि ‘सपा विचारधारा का विस्तार हो रहा है, मुझे उम्मीद है वहां भी हमारी विचारधारा होगी।’ हालांकि अखिलेश ने यह भी कहा कि मुलायम ने अपर्णा को बहुत समझाने की कोशिश की।

अपर्णा गढ़वाल के राजपूत परिवार से आती हैं और उनके परिवार का योगी आदित्यनाथ से करीबी संबंध है। अपर्णा स्वयं योगी आदित्यंनाथ को अपना बड़ा भाई मानती हैं। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में दर्शन के लिए कुछ साल पहले जाने पर उन्होंने योगी आदित्यननाथ से मुलाकात की थी, योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अपर्णा और उनके पति ने योगी से मिलकर बधाई दी थी। 

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कुछ समय बाद अपर्णा व योगी लखनऊ स्थित कान्हान उपवन गए थे जहां दोनों के बीच गो-सेवा पर बातचीत हुई थी। अपर्णा की छवि भले ही एकराजनेता की न रही हो लेकिन वर्ष 2017 के चुनाव में उन्हें युवाओं और महिलाओं का काफी समर्थन मिला था। इस बार अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे चुनाव लड़ेंगी या नहीं, हालांकि ऐसी चर्चा है कि लखनऊ कैंटोनमेंट की विधान सभा सीट से उन्हे भाजपा प्रत्याशी बनाया जा सकता है। 

किसको फायदा, किसे हुआ नुकसान 

अपर्णा के दल बदल से सपा व अखिलेश की छवि पर कुछ असर हो सकता है लेकिन सीधे इसका कोई राजनैतिक नुकसान होने की उम्मीद नहीं लगती क्योंकि 2017 चुनाव हारने के बाद से अपर्णा सपा के किसी राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रहीं, जबकि अखिलेश की पत्नी डिम्पल लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होती रही हैं।

अपर्णा और उनके पति राजनीतिक गतिविधियों से बचते रहे हैं, वे दूसरे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में ही सीमित रहे। जहां तक भाजपा का सवाल है, तो पार्टी को एक लाभ तो यही है कि सपा प्रमुख के परिवार के एक सदस्य का सपा-विरोधी पार्टी में शामिल होना अखिलेश का अपने परिवार को एकजुट न रख पाने का संकेत जाएगा। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहाकि, ‘जो व्यक्ति अपने परिवार को नेतृत्व नहीं दे सकता वो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य का का नेतृत्व कर पाएगा।’

मौर्य ने यह भी कहा कि ‘अखिलेश यादव परिवार को संभालने में असफल रहे हैं। जो परिवार के सदस्यों का सम्मान नहीं कर सकता, परिवार की महिलाओं को सम्मान नहीं दे सकता, वो यूपी की 24 करोड़ जनता का सम्मान और नेतृत्व कभी नहीं कर सकता है।’

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