Monday, Dec 06, 2021
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will not allow repetition of painful history of partition- mohan bhagwat

विभाजन खत्म करके ही खत्म होगा बंटवारे का दर्दनाकः मोहन भागवत

  • Updated on 11/26/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश का विभाजन ना मिटने वाली वेदना, यह तभी मिटेगी जब विभाजन निरस्त होगा। मेरा जन्म विभाजन के बाद हुआ, इस बात को समझने में बचपन के कुछ साल और लगे। मैंने काफी अध्ययन के बाद जिस मातृभूमि की स्वतन्त्रता के लिए कई बलिदान हुए उसका विभाजन हुआ। भारत एक जमीन का टुकड़ा नहीं हमारी मातृभूमि है।

संपूर्ण दुनिया को कुछ देने लायक हम तब होंगे जब विभाजन हटेगा। यह राजनीति नहीं हमारे अस्तित्व का विषय है। यह बात वीरवार को दिल्ली से सटे नोएडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक मोहन भागवत ने सेक्टर 12 स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने यहां लेखक कृष्णानन्द सागर द्बारा लिखित एवं जागृति प्रकाशन द्बारा प्रकाशित पुस्तक विभाजनकालीन भारत के साक्षी का लोकार्पण किया।

मोहन भागवत ने कहा कि विभाजन इस्लामिक आक्रमण, अंग्रेजों के आक्रमण का नतीजा है। इसकी पृष्ठभूमि इन आक्रमणों से जुड़ी है। आक्रमणकारियों की मनोवृत्ति अलगाव एवं स्वयं को बेहतर साबित करने की रही। अंग्रेजो ने समझा कि बिना लोगों में अलगाव किए यहां राज नहीं कर सकते।

भारत के उत्थान में धर्म का हमेशा स्थान रहा है। 1947 की खंडित स्वतन्त्रता के बाद भी अलगाव की मानसिकता से टकराव जारी है। कैसे देश टूटा उस इतिहास को पढ़ाना होगा। अप्रिय हो लेकिन जो सत्य हो वही इतिहास पढना जरूरी है।

इतिहास को समझकर सीखकर आगे बढऩा होगा। लेकिन जब एक बार अलगाव हो गया तो अब दंगें क्यों होते हैं।  भारत विभाजन को भूलेगा नहीं, अब विभाजन का प्रयास करने वालों का नुकसान है यह मेरा आत्मविश्वास है। 

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