घुरचुम महावारी केंद्र का महिला विकास एवं बाल कल्याण मंत्री ने डीएम के साथ किया दौरा

  • Updated on 1/17/2019

देहरादून/ ब्यूरो। देश में एक ओर पैडमैन जैसी फिल्म महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़े संकोच और कुरीतियों को दूर करने का संदेश दे रही हैं, वहीं उत्तराखंड में चम्पावत जिले के दुर्गम इलाके में बसा ‘घुरचुम’ एक ऐसा गांव है जहां माहवारी के दौरान महिलाओं को घर में रहने की इजाजत नहीं है।

उस दौरान महिलाओं को घर-परिवार से दूर गांव में बने महावारी (रजस्वला) केन्द्र में रखा जाता है। मामला संज्ञान में आने पर डीएम रणवीर सिंह चौहान ने इस प्रथा पर तत्काल रोक लगाई है। वहीं राज्य की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्य ने मामले की गहन जांच के आदेश डीएम को दिए हैं। डीएम ने पुराने रीति रिवाज के नाम महिलाओं से खिलवाड़ करने पर गांववालों को फटकार लगाई।    

 मामला बुधवार को उस वक्त सामने आया जब घुरचुम गांव के कुछ लोग जिलाधिकारी के पास इस माहवारी केंद्र की मरम्मत के लिए प्रस्ताव लेकर पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना था कि उनके गांव में स्थित माहवारी केन्द्र की हालत जर्जर है। केन्द्र की मरम्मत के साथ ही उसके निर्माण की भी जांच करनी चाहिए। इस प्रस्ताव ने जिलाधिकारी को भी हैरान कर दिया।

केन्द्र किसी योजना के तहत बना

देहरादून। ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को घर से बाहर रखने की परम्परा नेपाल में मौजूद है। हाल ही में नेपाल के एक गांव के मासिक केन्द्र में आग के धुएं से दम घुटने से मौत हो गई थी। घुरचुम गांव में भी इसी तर्ज पर माहवारी केन्द्र बनाया गया है जहां महिलाओं को रहने पर मजबूर किया जाता है। ये भवन कब और किस योजना के तहत बनाया गया यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

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‘मुझे घुरचुम गांव में महिलाओं के साथ मासिक धर्म के दौरान हो रहे अत्याचार की जानकारी मिली है। यह गंभीर प्रकरण है। डीएम को जांच के आदेश दिए गए हैं। इस मामले में ग्रामीणों को जागरूक भी किया जाएगा’।

- रेखा आर्य, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री।

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