Friday, May 07, 2021
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world tiger day- prime minister expressed happiness on the number of tigers growing in india

वर्ल्ड टाइगर डे पर मोदी ने कहा- सेंट पीटर्सबर्ग के लक्ष्य को चार साल पहले ही पूरा कर लिया था लेकिन..

  • Updated on 7/29/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 29 जुलाई को विश्व भर में 'अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस' (international tiger day) मनाया जाता है। विश्व में तेजी से घट रही बाघों की संख्या को लेकर जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने की शुरुआत हुई। बता दें बाघ हमारे देश का राष्ट्रीय पशु है। इससे पहले शेर को भारत का राष्ट्रीय पशु था, लेकिन 1973 में बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया। वैसे भी कहा जाता है कि बाघ के बिना स्वस्थ जंगल की कल्पना भी बेकार है। तभी तो जंगल बाघ की मौजूदगी को महसूस करना चाहता है और बाघ भी बिना जंगल के नहीं रह सकता।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी किए आंकड़े
विश्व बाघ दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 2018 में हुई बाघों की गणना के आंकड़े जारी किए। उन्होंने कहा कि बाघों के लिए भारत सबसे सुरक्षित देश है और बाघों के लिए भारत एक ऐसा देश बनकर उभरा है, जहां वह सुरक्षित हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार अभी भारत में बाघों की संख्या 2977 है। हमें इस बात पर बेहद गर्व है कि भारत में लगभग 3 हजार बाघ हैं और यह देश बाघों के लिए सबसे सुरक्षित पर्यावासों में से एक है.' उन्होंने कहा कि पर्यावरण और विकास की चर्चा पुरानी हो चुकी है।

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अब हमें सहयात्रा और सहअस्तित्व को भी स्वीकार करना होगा। क्योंकि पर्यावरण और विकास के बीच स्वस्थ संबंध होना जरूरी है। पीएम मोदी ने कहा कि जो कहानि एक था टाइगर से शुरू होकर टाइगर जिंदा है वह यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए, केवल टाइगर जिंदा है से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि जो लक्ष्य हमने सेंट पीटर्सबर्ग में निर्धारित किया था उसे हमनें चार साल पहले ही हासिल कर लिया था।

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ऐसे हुई विश्व बाघ दिवस मनाने की शुरुआत
बाघों की घटती संख्या को देखते  हुए 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा की। इस सम्मेलन में मौजूद कई देशों के प्रतिनिधियों ने 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसमें इस बात को भी निर्धारित किया गया कि सभी देशों की सरकारें ऐसे कदम उठाएं, जिससे बाघों का संरक्षण किया जा सके और लोगों में इसके प्रति जागरुकता बढ़ाई जा सके।

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बाघों की आवादी घटना का प्रमुख कारण
बढ़ती जनसंख्या और उद्योगिकीकरण के चलते बाघों की संख्या  सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इसका मुख्य कारण रहा जंगलों की कटाई और इन क्षेत्रों में उद्योंगों का लगना। इस वजह से बाघों के लिए सुरक्षित रहना मुश्किल हो गया। वहीं कई उद्योंगों में बाघों की खाल के इस्तेमाल के चलते बाघों के शिकार की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई और जंगल माफियाओं के चलते जंगलों  से लगातार बाघों की संख्या घटती चली गई। एक आंकड़े के अनुसार पिछले 10 सालों में लगभग एक हजार से ज्यादा बाघों का शिकार उनकी खाल को बेंचने के लिए किया गया है।

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जंगली बिल्लियों का हैं एक रूप
शायद यह सुनकर आपको आश्चर्य होगा कि बंगाल में पाया जाने वाला रॉयल बंगाल टाइगर दूसरी जंगली बिल्लियों से आकार में काफी बड़े होते हैं. बता दें कि इनमें मेल टाइगर्स का वजन 300 किलोग्राम से ज्यादा होता है। बाघ में इतनी ताकत होती है कि वह किसी भी व्यक्ति को आसानी से एक पंजे से ही मार सकता है। इनकी औसत आयु लगभग 20 से 25 साल होती है। अब तक सबसे पुराना टाइगर फ्लोरिडा के एक चिड़ियाघर में था, जो अब एक सर्कस में काम करता है।

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खतरा अभी कम नहीं हुआ है
यह अच्छी बात है कि पहले के मुताबिक बाघों की संख्या में कमी आई है लेकिन इन पर मंडरा रहा खतरा अभी कम नहीं हुआ है। ऐसे में बाघों को लेकर जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से 2010 में विश्व बाघ दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी, उसे हम सबको मिलकर पूरा करना होगा। हमें लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करने की कोशिश करनी होगी।
 

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