फर्जी बाबाओं पर योगी सरकार सख्त, अयोध्या में साधुओं के सत्यापन की तैयारी शुरु

  • Updated on 7/11/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एक समय था जब भारत साधु संतों की प​वित्र भूमि माना जाता था, लेकिन समय के साथ संत समाज में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के आ जाने से असली संतों की पहचान करना अब बेहद मुश्किल होता जा रहा है। वहीं ऐसे समय में अयोध्या में भी राम मंदिर निर्माण की कवायद तेज होते देख भगवान राम की नगरी में सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने साधू संतों की पहचान का सत्यापन करने का निर्णय लिया है। 

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अयोध्या प्रशासन के अनुसार बाहर से आकर बसने वाले साधुओं और संतों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। साथ ही अयोध्या में रहने वाले हर संत के रिकॉर्ड प्रशासन अपने पास रखेगा।

अयोध्या में कौन नकली, कौन असली

अयोध्या राम जन्मभूमि विवादित स्थल होने की वजह से सुरक्षा के लिहाज से हमेशा संवेदनशील रहा है। राम नगरी में देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी साधूवेश धारी भगवान के दर्शन करने आते हैं और यहां के मठों मंदिरों में बस जाते हैं। जिनकी विश्वसनियता की जांच कर पाना मुश्किल था। इस चुनौती को देखते हुए प्रशासन बाहर से आकर बसने वाले इन साधुओं और संतों पर नजर बनाए रखेगा।

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अयोध्या में चला है आपसी रंजिशों का खूनी दौर

ध्यान देने वाली बात है कि अयोध्या में मंदिरों की संपत्ति पर कब्जे को लेकर खून खराबे का एक लम्बा दौर चल चुका है। अयोध्या के मंदिरों की करोड़ों की जमीन-जायदाद पर वर्चस्व हासिल करने के लिए आपसी रंजिश में कई महंतों की हत्या हो चुकी है।

बाबाओं के आ​पराधिक इतिहास

बस्ती जिले में मंदिर को लेकर ही रामजन्म भूमि के पूर्व पुजारी लाल दास की हत्या हुई थी। इतना ही नहीं बाबा रघुनाथ दास की छावनी के महंत रामप्रताप दास की हत्या भी जमीनी विवाद को लेकर हुई थी। वहीं माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ल ने महंत राम कृपाल दास को गोलियों से भून दिया था।

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इनमें रामकृपाल दास का भी आपराधिक इतिहास रहा है। इस तरह अयोध्या में यह सिलसिला कई सालों से चलता आ रहा है। ऐसे में अयोध्या प्रशासन के इस कदम से माना जा रहा है कि अब आपराधिक किस्म के संतों पर ​शिकंजा कसा जा सकेगा और अयोध्या की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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