Friday, May 07, 2021
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सहारनपुर हिंसा मामले में पुलिस सख्त, गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट

  • Updated on 5/24/2017

Navodayatimes

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीमो मायावती के दौरे के बाद सहारनपुर में फिर हिंसा भड़क गई थी। बीएसपी सुप्रीमो मायावती के दौरे के बाद शब्बीरपुर से लौट रहे बीएसपी कार्यकर्ताओं की गाड़ी पर एक खास जाति के लोगों ने हमला कर दिया था। हमले में 6 लोग घायल हुए। एक अलग घटना में माया के कार्यक्रम से लौट रहे एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

आलाधिकारियों ने संभाला मोर्चा

सहारनपुर में जातीय हिंसा के बाद पुलिस और प्रशासन गंभीर दिखाई दे रहा है। सीएम के निर्देश के बाद गृह सचिव मणिप्रसाद मिश्रा, एडीजी (कानून-व्यवस्था) आदित्य मिश्रा, आईजी (एसटीएफ) अमिताभ यश, डीआईजी विजय भूषण सहित आलाधिकारी सहारनपुर में डेरा जमाए हुए हैं।

गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट

यूपी पुलिस ने सहारनपुर हिंसा की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी है।

एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि इस मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। करीब 10 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एक शख्स की मौत के संबंध में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस वारदात में 10 से 12 लोग घायल हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती के दौरे के बाद हिंसा भड़क गई।

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंसा पर दुख जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। जिसके चलते उन्होंने  ने राज्य के कई आला अफसरों को इस मामले में मौके पर जाने के आदेश दिए थे। इसके बाद गृह सचिव मणिप्रसाद मिश्रा, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) आदित्य मिश्रा, आईजी (एसटीएफ) अमिताभ यश, डीआईजी विजय भूषण विमान के जरिए सहारनपुर भेजे गए है। यह तक की गाजियाबाद, मेरठ, अलीगढ़, आगरा से पीएमी के 5 कमांडेंट्स को भी शहर भेजा गया है। वहीं इस हिंसा को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने हिंसा पर दुख जताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। जिसके चलते उन्होंने हिंसा की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी है।

सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने हिंसा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। उन्होंने लोगों से संयम बनाए रखने के लिए कहा गया और विपक्षी दलों से शांति बहाली में सहयोग की अपील की है। वह योगी सरकार के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने ट्विटर पर ताजा हिंसा  के लिए मायावती के दौर को जिम्मेदार ठहराया है। 

शब्बीरपुर गांव के ठाकुरों ने दलितों को एक मंदिर परिसर के अंदर बी आर अंबेडकर की प्रतिमा लगाने से रोका था। बाद में दलितों के एक समूह ने पांच मई को ठाकुरों द्वारा निकाली जा रही राजपूत राजा महाराणा प्रताप की जयंती के जुलूस को रोका जिससे हिंसा हुई जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 15 से ज्यादा जख्मी हो गए।

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मायावती ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘सहारनपुर जिला प्रशासन ने अंबेडकर की आवक्ष प्रतिमा नहीं लगाने दी जबकि महाराणा प्रताप की जयंती पर बिना अनुमति के जुलूस निकाला गया।’ उन्होंने कहा, ‘दलितों ने इस भेदभाव पर अपनी प्रतिक्रिया जताई।’

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केशव प्रसाद मौर्य पहले मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे थे लेकिन उनकी जाति को देखते हुए उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। मायावती ने कहा कि भाजपा बीआर अंबेडकर का जिक्र केवल वोट के लिए करती है और वह न तो दलित महापुरुष न ही उनके अनुयायियों की वास्तव में चिंता करती है।

उन्होंने कहा, ‘भाजपा नेता अकसर बीआर अंबेडकर का जिक्र करते हैं लेकिन अंबेडकर के अनुयायियों को अन्याय का सामना करना पड़ता है। वे अंबेडकर की चर्चा केवल वोट के लिए करते हैं। लोग इस तरह की दलित विरोधी पार्टी को स्वीकार नहीं करेंगे।

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बसपा प्रमुख ने राज्य में कानून-व्यवस्था की ‘खराब’ होती स्थिति पर कहा कि राज्य सरकार लोगों को शांति और सुरक्षा देने के अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करने में विफल रही है।

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