Wednesday, Dec 01, 2021
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कोरोना वैक्सीन बुजुर्गों से पहले युवाओं को मिले, वो देश का भविष्य- दिल्ली हाईकोर्ट

  • Updated on 6/2/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना महामारी के बीच दिल्ली में ब्लैक फंगस के मामले और दवा वितरण से लेकर वैक्सीनेशन तक के मामलों पर हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हो रही है। 18 से 44 वर्ष की आयु के युवाओं के वैक्सीनेशन मामले पर हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई। साथ ही कहा कि 80 वर्ष के बुजुर्गों के बजाय हमें युवाओं को बचाना होगा ।उनके ऊपर इस देश का भविष्य है।

कोर्ट ने मंगलवार को कोरोना वायरस के खिलाफ केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संतोषजनक प्रणाली नहीं है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि युवाओं को बचाया जाना चाहिए, क्योंकि वह देश का भविष्य हैं। कोर्ट ने कहा कि शुरुआत में 45 से 60 वर्ष का टीकाकरण शुरू किया गया था और अभी से 18 से 44 साल के युवाओं के लिए शुरू किया है, लेकिन देखा जा रहा है कि उनका टीकाकरण नहीं कर रहे हैं।

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युवाओं के लिए वैक्सीन नहीं
कोर्ट ने कहा कि युवाओं के लिए वैक्सीन नहीं मिल रही है। न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायाधीश जसमीत सिंह की बेंच ने कहा कि यह सरकार का कर्तव्य है कि वह आगे का रास्ता तय करें। कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यहां कोई वैक्सीन नहीं है ऐसे में इतनी गलत घोषणा कर दी गई।

हमें भविष्य में निवेश करना
कोर्ट ने कहा कि हमें भविष्य में निवेश करना है। भविष्य में आराम नहीं करना है। हम अपने देश के युवाओं को दरकिनार कर रहे हैं और वृद्धों को तरजीह दे रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इतनी अधिक संख्या में युवा अपनी जान गवा चुके हैं, जबकि यही युवा वर्ग है जो देश का भविष्य है। कोर्ट ने कहा कि हम उम्र के आखिरी पड़ाव पर हैं हमें अपने भविष्य की रक्षा की जरूरत नहीं है। हमें अपने युवाओं को बचाने की जरूरत है।

केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अमित महाजन ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमने सभी बिंदुओं पर चर्चा की है। जब अस्पतालों के पास दवाई नहीं होती तो डॉक्टर मरीजों को कैसे दे रहे हैं? उनके पास वैकल्पिक दवा है। 

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ब्लैक फंगस की दवा की कमी पर ये बोला हाईकोर्ट 
सुनवाई के दौरान ब्लैक फंगस के इलाज में कारगर दवाई की भारी किल्लत का मामले पर कोर्ट ने कहा कि यह तय कर पाना बेहद मुश्किल है कि दवाई के संकट के बीच किसको बचाया जाए और किसको मरने के लिए छोड़ दिया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर एक ही परिवार के 2 लोग बीमार हैं एक 80 साल का है और दूसरा 35 साल का तो हम किसको बचाने की कोशिश करेंगे?

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