Monday, May 16, 2022
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zika virus is a problem caused by climate change

जलवायु परिवर्तन से उपजी समस्या है जीका वायरस

  • Updated on 12/13/2021

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। राजधानी दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में साल 2021 का पहला जीका वायरस केस मिला है। लेकिन इस केस के मिलने के बाद पर्यावरणविद् इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़ कर देख रहे हैं। भारत में इस वर्ष उत्तर प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली से अब तक कुल 237 जीका मामले सामने आए हैं।

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भारत में इस वर्ष सामने आ चुके हैं जीका के 237 मामले
सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट में जीका पर काम कर रहीं विभा वाष्र्णेय का कहना है कि जीका वायरस को एडीज मच्छर एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ले जाता है और जब मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है तो ये प्रसार भी बढ़ जाता है। एडीज म'छर को अपने अंडे देने के लिए पानी के छोटे-छोटे पूल्स (जैसे खाली पड़े डिब्बे, टायर, नारियल के छिलके) आदि की जरूरत होती है। जो मानसून के समय उन्हें आसानी से मिल जाते हैं।

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मानसूनी बारिश का जलवायु परिवर्तन के कारण बदला है पैटर्न 
मानसून की बारिश जलवायु परिवर्तन के कारण अपना पैटर्न बदल रही है। थोड़ी बारिश होती है और फिर गर्मी हो जाती है। इस तरह का मौसम परिवर्तन मच्छरों की आबादी बढ़ा रहा है इससे उनसे फैलने वाली बीमारियां डेंगू और जीका में भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस वायरस का मानसून से सीधा संबंध है 2015 से लेकर 2021 तक जब-जब मानसून की अवधि लंबी हुई है तब तब मच्छर जनित रोगों का प्रकोप बढ़ा है।

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ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रुका तो 2050 तक 49 फीसद आबादी तक पहुंचेगा एडीज इजिप्टी
एडीज इजिप्टी को लेकर 1 मई 2020 में नेचर पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 1950 से लेकर सन 2000 तक दुनिया में इजिप्टी के विकास की परिस्थितियां प्रति दशक 1.5 फीसद अनुकूल हुई हैं। 2050 तक अगर ग्रीन हाउस गैसों(सीओ2, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड आदि) का उत्सर्जन आज की दर से होता रहा तो एडीज इजिप्टी और एडीज अल्बोपिक्टस की प्रजाति दुनिया की 49 फीसद आबादी तक पहुंच जाएगी।

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जीका की उत्पत्ति और भारत में प्रसार
जीका वायरस सबसे पहले 1947 में युगांडा के जीका जंगल में रीसस बंदर से मिला था। 1952 में इसने इंसानों को भी संक्रमित किया। लेकिन 5 दशकों में अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया से केवल 15 मामले सामने आए। 2007 में इस जूनोटिक रोग का व्यापक प्रसार हुआ है। ये पश्चिमी प्रशांत द्वीपों से होता हुआ ब्राजील तक पहुंच गया। 2007 में ही डब्ल्यूएचओ ने इसे वैश्विक स्तर पर मानवों के लिए चिंता घोषित किया। लेकिन जब मामले कम हुए तो सबका ध्यान इस ओर से हट गया। भारत में साल 2017 में जीका वायरस के केवल 3 मामले सामने आए थे। लेकिन इसके अगले वर्ष यानि 2018 में मामलों की संख्या बढक़र 290 हो गई और 2021 में अब तक 237 मामले सामने आ चुके हैं। जीका अब तक दुनिया के 86 देशों में दस्तक दे चुका है।

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जीका वायरस के लक्षण
इससे संक्रमित व्यक्ति को बुखार, चकत्ते, सिर दर्द, जोड़ों में दर्द, लाल आंखें या मसल्स में दर्द की समस्या होती है। यह गर्भवती महिलाओं में उनके भ्रूण तक पहुंचने में भी सक्षम है। गर्भवती महिलाओं द्वारा जन्मे बच्चे में गंभीर न्यूरो बीमारियां हो सकती हैं। इससे महिलाओं का गर्भपात और जन्म के साथ बच्चे में दोष आदि की घटनाओं को देख गया है।

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