Wednesday, Apr 25, 2018

'अब बिना गर्भाशय के मां बनने का सपना होगा पूरा'

  • Updated on 4/3/2016

Navodayatimes

नई दिल्ली (टीम डिजिटल): बिना यूट्रस की भी मां बन सकती हैं। यूट्रस ट्रांसप्लांट करके ऐसी महिलाओं को मां बनने का सपना पूरा हो सकता है। ऐसी महिलाएं जिनके पास यूट्रस (गर्भाशय) नहीं है या किसी बीमारी की वजह से उनका यूट्रस निकाल दिया गया है, अब वो इस स्थिति में भी मां बन सकती हैं।

देश में यूट्रस ट्रांसप्लांट की तैयारी चल रही है। इसी साल अप्रैल में पहला ऑपरेशन किया जाएगा। अभी सर्जरी के लिए 24 ऐसी महिलाएं वेटिंग में हैं।   दिल्ली में 'मिलान द फर्टिलिटी सेंटर' की डायरेक्टर डॉक्टर कामिनी ए राव के अनुसार बेबी विन्सेंट पहला ऐसा बच्चा था, जिसका जन्म यूट्रस ट्रांसप्लांट के बाद हुआ था। इस ट्रासप्लांट में स्वीडिश महिला में अधिक उम्र की उसकी एक रिलेटिव से यूट्रस लेकर ट्रांसप्लांट किया गया था।

खतरनाक बीमारी से जूझ रहे बच्चे की बाईपास सर्जरी सफल रही

डॉक्टर राव ने कहा कि हरेक 4500 महिलाओं में एक महिला बिना यूट्रस के पैदा होती है, जबकि कई महिलाओं में कैंसर की वजह से यूट्रस निकालना पड़ता है। डॉक्टर राव ने कहना है कि यूट्रस ट्रांसप्लांट लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट की तरह लाइव और कैडेवर डोनशन से संभव है। अगर किसी यंग महिला जिसके पास यूट्रस नहीं है, लेकिन एग बन रहे हैं, तो ऐसी महिला का उनकी मां से यूट्रस लिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए ब्लड ग्रुप मिलना चाहिए। 

एक बार जब यूट्रस ट्रांसप्लांट हो जाता है तो यूट्रस को नई बॉडी में सेट करने में समय लगता है। बॉडी इंप्लांट किए गए यूट्रस को रिजेक्ट न कर दे, इसके लिए इम्यूनोस्प्रेशन दिया जाता है, और यह दवा हमेशा खानी होती है। ट्रांसप्लांट के एक साल तक इंतजार किया जाता है और जब पीरियड और एग पूरी तरह से बनने लगते हैं, तब महिला के एग को उनके पति के स्पर्म के साथ लैब में एंब्रियो तैयार किया जाता है और फिर एंब्रियो आईवीएफ तकनीक की मदद से यूट्रस में इंप्लांट कर दिया जाता है, जिससे महिला मां बन जाती है।

कम सोने वाले बच्चे हो सकते हैं इस बीमारी के शिकार

डॉक्टर ने कहा कि एक बच्चे के बाद भी अगर महिला दूसरा बच्चा चाहती है तो उन्हें यूट्रस रखना होगा, लेकिन साथ में इम्यूनोस्प्रेशन की दवा जरूरी है, लेकिन अगर महिला दूसरा बच्चा नहीं चाहती तो वे यूट्रस निकलवा सकती हैं, ताकि उन्हें दवा से आजादी मिल जाए। इस बारे में डॉक्टर अजय कुमार ने कहा कि बेंगलुरु सेंटर में पहला ट्रांसप्लांट किया जाएगा। 25 डॉक्टरों की टीम तैयार हो गई है, एमसीआई से परमिशन मिल गई है, अब पहले ट्रांसप्लांट से हम कुछ दिन दूर हैं।
 

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