Monday, Apr 23, 2018

इन Tips को अपना कर पकड़ सकते हैं किसी का झूठ, जानें

  • Updated on 1/12/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पुलिस और तमाम सुरक्षा एजैंसियां सतर्कतापूर्वक आते-जाते चेहरों को देखती हैं। उनकी देहभाषा से अंदाजा लगाती हैं कि कौन संदिग्ध व्यक्ति हो सकता है। यदि वे किसी आरोपी को अपने घेरे में लेकर पूछताछ करती हैं तब भी उसके चेहरे पर आने-जाने वाले भाव उसके वक्तव्यों का आकलन करने में काम आते हैं।

मालिक-नौकर से लेकर पति-पत्नी और दोस्त तक पारम्परिक तर्क-वितर्कों या मतभेदों में झूठ पकड़ने की स्वाभाविक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करते हैं।

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किसी का झूठ पकड़ लेना, खुद का विश्वास टूट जाने का दुख भी देता है इसलिए कई बार हम जानकर भी झूठ को चलने देते हैं। यह छोटे-छोटे मासूम झूठ हो सकते हैं लेकिन जब आप कोई बड़ी बात में लगे हों, अपने तर्क रखे जा रहे हों तब सामने वाले की बॉडी लैंग्वेज पर पकड़ महत्वपूर्ण हो जाती है।

झूठ, छल, प्रपंच तथा धोखे-मुस्कान से शुरू तथा नुक्सान से अंत को प्राप्त हो सकते हैं। आपको झूठों के प्रति सतर्क बनाने के लिए बॉडी लैंग्वेज विशेषज्ञ इन चीजों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं:

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  • झूठ के दौरान शारीरिक हावभाव नियंत्रित तथा सख्त होते हैं। हाथों तथा बांहों की क्रियाशीलता मर्यादित हो जाती है। झूठ बोलने वाला ज्यादा हाथ-पैर चलाने की बजाय अपने आपको संयमित दिखाई देने का प्रयास करता है।
  • झूठ बोलने वाला आंखों से आंखें नहीं मिलाता।
  • अपने हाथों को चेहरे, गले, मुंह आदि पर घुमाता है। कभी नाक, कान आदि खुजाता है परन्तु कभी भी खुले हाथों अपने सीने पर हाथ रखता नहीं दिखेगा।
  • झूठा एक दबावभरी नर्म मुस्कान लाने की कोशिश करेगा। सिर्फ मुंह के आसपास की पेशियां ऊपर जाती दिखेंगी। होंठ घूमेंगे किंतु स्वाभाविक मुस्कान में पेशियों के संयुक्त समूह, माथे, भौहें, गाल, आंखों का निचला हिस्सा, नाक सभी में हरकत होती है। उन पर सलवटें पड़ती हैं। आंखों में चमक और गड्ढे की छवि उभरती है। शायद कोई माहिर झूठा व्यक्ति ही इन सबको एक साथ साध पाता है।
  • उसकी हर भाव मुद्रा अचानक प्रकट हो, नियंत्रित समय के लिए दिखे और फिर नई मुद्रा प्रकट हो जाए तो समझिए गड़बड़ है। वह भावों के प्रति स्थायी नहीं रह सकता। झूठ बोल रहा व्यक्ति ‘अपने सच’ की रक्षा करने के लिए बार-बार रणनीति बदलने की कोशिश करता है इसलिए भावों में स्थायित्व नहीं होता।
  • माना आपने किसी को उपहार दिया। उसने पहले लिया, फिर वह बोला, धन्यवाद, सुंदर है और उसके बाद हल्की-सी मुस्कान दी। मतलब वह औपचारिकता है। प्रसन्नता तो हाथ में आते ही झलकती है। मुद्रा तथा वक्तव्य के बीच का अंतराल झूठ-सच को प्रतिबिंबित करता है।

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  • अक्सर भाव सिर्फ मुंह की सक्रियता तक सीमित रहते हैं। झूठी खुशी, आश्चर्र्य, उदासी अलग दिखाई देती है और मुंह कुछ अलग बोलता है। ‘बॉडी लैंग्वेज’ की दृष्टि से यह साज और आवाज का बेमेल प्रदर्शन होता है जो बेसुरेपन से पकड़ में आ जाता है। सिर्फ गाल, जबड़े, माथे या पलकें ऊपर-नीचे करके आप भावाभिव्यक्ति की सम्पूर्णता नहीं दे सकते।
  • दोषी व्यक्ति हमेशा रक्षात्मक रुख अपनाता है, निर्दोष अपनी बात के लिए आक्रामक होगा।
  • झूठा व्यक्ति आंखें चुराने की कोशिश करेगा या चेहरे को एक तरफ रखेगा।
  • झूठे आदमी को अपनी आस-पास की चीजें बातचीत के दौरान बीच में रखने की आदत होगी। कुछ नहीं तो वह मेज पर बीच में किताब ही उठा लेगा।
  • झूठा व्यक्ति वही शब्द जवाब में उपयोग करता है जो आप सवालों में करते हैं। यहां तक कि मना करने वाले शब्दों पर कई बार उसका आपसे भी ज्यादा तीखा जोर रहता है। वह अनावश्यक रूप से आपको समझाने की कोशिश ज्यादा कर सकता है।
  • पूछताछ के दौरान खामोशी और अंतराल पर अंतराल कम पसंद होंगे। वह नाटक करेगा और अपनी परिस्थितियों को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश करेगा।
  • व्याकरण शास्त्री झूठ बोलने वालों में उलट-पलट वाक्य रचना पकड़  सकते हैं, जबकि सच्चा आदमी जब झूठ के खिलाफ बोलता है तो व्याकरण संबंधी त्रुटियां गौण हो जाती हैं और वह अंतत: प्रभावी वक्तव्य देने में सफल होता है।

हमेशा अपने आप को जवां रखने के लिए करें चेहरे की कसरत

  • यदि आपको विश्वास हो गया है कि सामने वाला झूठ बोल रहा है तो बातचीत का विषय तत्काल बदल दीजिए। वह व्यक्ति तत्काल आराम की स्थिति में आ जाएगा और आपकी बात पर चल पड़ेगा। अपराधी विषय बदलना चाहता है, निर्दोष व्यक्ति विषय बदलने पर भ्रम में पड़ जाता है और उस विषय पर दोबारा आकर बात साफ कर लेना चाहता है।
  • इतना स्पष्ट है कि एक-दो लक्षणों को पकड़ कर आप किसी व्यक्ति को झूठा समझने की गलती न कर लें। पूरी बॉडी लैंग्वेज का समग्र विश्लेषण करने के बाद जो संकेत मिलें, उनका निष्कर्ष निकालें तथा सत्य-असत्य का फैसला बेहद सटीक तर्कों को मिलाकर ही करें। वर्ना आपकी विशेषज्ञता असफल हो जाएगी।
  • कई बार रिश्तों को बचाने के लिए व्यक्ति इतना भयभीत हो जाता है कि अज्ञात गलती को भी अपनी गलती मानकर रिश्ता बचाने के लिए अजीबो-गरीब घबराहट भरी देहभाषा व्यक्त करने लगता है। यह आपकी विशेषज्ञता का परिणाम नहीं, उस पर पड़े भावनात्मक दबाव का परिणाम है।
  • जो इरादतन झूठे या अपराधी होते हैं वे सुविधापूर्वक आराम से झूठ बोलते हैं और तर्कों को बेशर्मी से उपयोग में लाते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति के व्यक्तित्व, लक्ष्य तथा अतीत का सम्पूर्ण विश्लेषण करने का मार्ग ही सर्वोत्तम मार्ग है।
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