Saturday, Nov 16, 2019
contra vision technology can free your eyes from opticals and lenses

मोटे-मोटे चश्मों और कॉन्टेक्ट लेंस की मुसीबतों से अब ये नयी तकनीक दिलाएगी छुटकारा

  • Updated on 7/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ऐसा कहा जाता है कि आंखें किसी के मन में झांकने का एक रास्ता है। लेकिन कभी-कभी आंखों पर चढ़ा हुआ मोटा चश्मा (Opticals) इस रास्ते के बीच आ जाता है। बदलती जीवनशैली (lifestyle), भागदौड़ भरी जिंदगी, बहुत ज्यादा लंबे समय तक टीवी देखना या फिर घंटों भर तक कम्प्यूटर (Computer), लैपटॉप (Laptop) और मोबाइल (Mobile) के स्क्रीन पर नजरें गढ़ा कर रखने से आंखों (Eyes) की रोशनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

और यही वजह है कि इन दिनों कमजोर आंखों वाले लोगों के चश्मों का नंबर दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहा है और इस समस्या से बचने के लिए लोग मजबूरन मोटे चश्में (Opticals) और उलझन पैदा करने वाले कॉन्टेक्ट लेंस (Contact Lens) लगाते हैं। लेकिन अब घबराने की बात नहीं है क्योंकि, दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित आई सेंटरों में लगभग सभी प्रकार के नेत्र रोगों का इलाज संभव है। 

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इस आधुनिक तकनीक से मिलेगा कमजोर आंखों को आराम

कॉन्ट्यूरा विजन (Contra Vision), एक ऐसी ही अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके जरिए लेजर विजन करेक्शन (Lazor Vision Correction) के द्वारा आंखों से नजर का चश्मा हटाया जा सकता है। यह तकनीक (Technology) इतनी एडवांस (Advance) और सुरक्षित है कि इसने लेसिक और स्माइल जैसी तकनीकों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस तकनीक (Technology) के माध्यम से न केवल देखने की क्षमता (Capicity) शत-प्रतिशत (6/6) स्वस्थ हो जाती है, बल्कि उपचार के बाद रिकवरी (Recovery) भी बहुत आसानी से हो जाती है।

आई 7, के लेजर रेफ्रैक्टिव आई सर्जन डा. राहिल चौधरी भारत के पहले ऐसे आई सर्जन हैं, जिन्होंने इस तकनीक को देश में लांच किया है। इस क्रांतिकारी तकनीक के बारे में डा. राहिल चौधरी ने बताया कि, ‘मेरा ऐसा मानना है कि कॉन्ट्यूरा विजन (Contra Vision) तकनीक स्माइल और लेसिक तकनीक से कहीं ज्यादा बेहतर और उन्नत है।

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दरअसल, स्माइल तकनीक को आये हुए 6 वर्ष हो चुके हैं और कॉन्ट्यूरा को आये अभी सिर्फ 2 वर्ष ही हुए हैं। कॉन्ट्यूरा विजन, विजुअल एक्सेस का तो सही इलाज करता ही है, साथ ही कॉर्निया (Cornea) की असामान्यताओं को दूर करते हुए बेहद स्पष्ट और शानदार ढंग से देखने की क्षमता प्रदान करता है, जो किसी भी अन्य लेजर तकनीक द्वारा संभव नहीं है।’

कॉन्ट्यूरा विजन तकनीक टोपोग्राफी के सिद्धांतों पर करती है काम

कॉन्ट्यूरा विजन तकनीक (Contra Vision Technology), टोपोग्राफी के सिद्धांत पर काम करती है, जिसमें कॉर्निया के सभी 22 हजार बिंदुओं को बारीकी से जांच करता है, जबकि लेसिक के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली वेवफ्रंट तकनीक (Wavefrench technology) पूरी आंख के सिर्फ 200 के आस-पास बिंदुओं को ही जांच पाती है। हालांकि, कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी के बिलकुल सटीक परिणाम सर्जरी के करीब 12 महीने बाद ही अच्छी तरह से सामने आते हैं। लेकिन अधिकांश मरीज सर्जरी के तुरंत बाद ही बिना किसी प्रकार के साइड इफेक्ट्स के बहुत बेहतर ढंग से देख पाने की क्षमता का अनुभव करने लगते हैं।

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पारंपरिक लेसिक सर्जरी (Traditional lasik Surgery) करवाने वाले लोग अक्सर सर्जरी के बाद प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, ढंग से न देख पाना, रात के समय पढ़ने या ड्राइव करते समय परेशानी की शिकायत करते हैं। लेकिन कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी के माध्यम से इस प्रकार की सभी शिकायतों का बहुत बेहतर ढंग से निदान किया जा सकता है। कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी के माध्यम से अपना इलाज करवाने वाले अनुराग कुमार अपना सुखद अनुभव साझा करते हुए बताते हैं- ‘मेरी आंखों की कॉन्ट्यूरा लेसिक द्वारा सर्जरी डा. राहिल चौधरी ने खुद की।

कॉन्ट्यूरा विजन तकनीक दिलाएगा मोटे चश्में से छुटकारा

हालांकि, शुरूआत में मैं इस नयी तकनीक (New Technology) को लेकर थोड़ा दुविधा में था। लेकिन अब सर्जरी के छह महीने बाद मुझे अपने फैसले पर खुशी महसूस होती है। मैं 16 वर्षों से नजर का चश्मा पहन रहा था और इस क्रांतिकारी तकनीक (Revolutionary technique) की वजह से मुझे अब चश्मे से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है और वह भी बहुत वाजिब दामों पर।’ इसमें कोई दो राय नहीं कि लेजर तकनीक द्वारा आंखों का इलाज निश्चित रूप से थोड़ा महंगा है, लेकिन जब लोगों को आंखों का सबसे बेहतरीन इलाज चाहिए होता है, तो वह केवल लेजर आई सर्जरी (Surgery) ही करवाते हैं। यही वजह है कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग आंखों की सर्जरी के लिए अन्य लेजर सर्जरियों की तुलना में कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी (Contra Vision Surgery) को प्राथमिकता देने लगे हैं।

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