Friday, Nov 16, 2018

खतरनाक हो सकती है पैर दर्द की अनदेखी, जानें डॉक्टर का कहना

  • Updated on 6/12/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कई बार काम करते समय पैर में दर्द होने लगता है और वह सुन्न-सा हो जाता है। अगर इस तरह कुछ होता है, तो इसका मतलब है कि पैर की कोई रक्त वाहिनी काम नहीं कर रही है और इस कारण दिमाग तक सही संदेश नहीं पहुंच पा रहा है। अगर बंद रक्तवाहिनी का सही इलाज नहीं किया जाए, तो समस्या बढ़ सकती है।

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नई दिल्ली वंसत कुंज स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के इंटरवेशनल रेडियोलॉजिस्ट के हेड डॉ. प्रदीप मुले का कहना है कि जिस तरह हार्ट अटैक की पुष्टि एंजियोग्राफी से होती है, ठीक उसी तरह लैग अटैक का पता भी एंजियोंग्राफी से लगाया जा सकता है। फिर जरूरत के हिसाब से एंजियोप्लास्टी या फिर बाईपास सर्जरी की जाती है। कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान या मोटापे की वजह से लोगों में, विशेषकर महिलाओं के पैरों की रक्त धमनियां मोटी हो जाती हैं और उनमें सूजन भी आ जाती है, इस समस्या को वेरीकोज वेन के नाम से जाना जाता है।

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इसी कारण पीड़ितों का चलना-फिरना और खड़ा होना दूभर हो जाता है।  कई बार इन धमनियों में खुजली होने लगती है और अधिक खुजला देने के कारण वहां घाव या अल्सर बन जाता है। वेरीकोज वेन वे रक्तवाहिनी होती हैं जो कि मोटी होकर फैल जाती हैं। यह अधिकतर पैर के पिछले हिस्से में दिखाई देता है। डॉ. प्रदीप मुले का कहना है कि यह इसलिए होता है क्योंकि हमारी रक्तधमनियों में वाल्व मौजूद होते हैं, जो कि रक्त को विपरीत दिशा में प्रवाहित होने से रोकते हैं। पैरों की मांसपेशियां गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को कम करने के लिए धमनियों को पम्प करते हैं ताकि पैरों से रक्त हृदय तक पहुंचता रहे और विपरीत दिशा में न प्रवाहित हो, लेकिन जब ये धमनियां वेरीकोज हो जाती हैं तो वाल्व सही ढंग से कार्य नहीं कर पाते और रक्त का प्रवाह विपरीत दिशा में अधिक होने लगता है।

ये है उपचार

जुराबें पहनना : इस समस्या का निदान करने के लिए विशिष्ट रूप से कुछ  जुराबें तैयार की जाती हैं जो कि सूजन को कम करने में मदद करती हैं। पैरों में पुष्टिकरों की मात्रा बढ़ाती हैं और रक्तप्रवाह के क्रम को सही करती हैं।

दवाइयां : दर्द से छुटकारा पाने के लिए दवाइयां लेने की भी सलाह दी जाती है लेकिन इनसे दुष्प्रभाव भी अधिक होते हैं।  

व्यायाम : व्यायाम करने से भी कुछ हद तक आराम पाया जा सकता है। सलाह दी जाती है कि पीड़ित बैठते समय पैरों को सीधा खींचे और व्यायाम करे।

सर्जरी : सर्जरी के दौरान धमनियों के अतिरिक्त फैलाव को काटकर हटाया जाता है लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं जैसे-घाव का बनना, निशान पडऩा, रक्तस्राव होना, संक्रमण आदि। दोबारा उत्पन्न होने के भी आसार होते हैं। 

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन :  रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन की मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यह शल्यरहित प्रक्रिया होती है जो कि लेजर या रेडियोफ्रीक्वेंसी की मदद से प्रभावित धमनियों तक किरणें डाली जाती हैं, जिससे सही दिशा में रक्त प्रवाहित करने लगती हैं। इसमें सूक्ष्म छिद्र द्वारा नसों में पतली नली डालकर इलाज किया जाता है।

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