Wednesday, Jun 19, 2019

इस तरह समझें डिप्रेशन को, पढ़ें इससे बाहर निकलने के तरीके

  • Updated on 4/10/2019

नई दिल्ली/सोनााली सिन्हा। आजकल की भाग दौड़ वाली लाइफ में खुद का ख्याल रखना मुश्किल हो जाता है। शारीरिक स्वास्थ्य (physical fitness) के साथ-साथ इन दिनों कई लोग डिप्रेशन (depression) के शिकार भी हो रहे हैं। ऐसे में अगर आपका पार्टनर (partner) इस बीमारी का शिकार है और आप उनको समझ नहीं पा रहे हैं तो नीचे पढ़ें कि उनके साथ किस करह से पेश आना चाहिए। शायद आपके लिए कुछ मददगार साबित हो सकें। क्योंकि मनोवैज्ञानिक बीमारियां (mental illness) जड़ से कभी नहीं खत्म होती। 

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1) उसे अहसास दिलाएं कि वो खास हैं
जो लोग इस बीमारी का शिकार हैं उन्हें पता होता है कि इस अंधेरी सुरंग से गुजरते हुए कैसा महसूस होता है। वो अंदर ही अंदर बहुत कुछ झेल रहे होते हैं जोकि वो किसी से शेयर भी नहीं कर पातें। ऐसे में जब वो अंदर से भर जाते हैं तो वह बेवजह रोने लगते हैं, किसी भी बात पर उनका मूड ऑफ हो जाता है और फिर वो अकेले रहना पसंद करने लगते हैं। 

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उन्हें ऐसा लगने लगता है कि लोग उन्हें समझ नहीं पाएंगे जिस वजह से वो खुद को दूसरों पर बोझ समझने लगते हैं। इस वक्त उन्हें सबसे ज्यादा प्यार की जरूरत होती है। ऐसे में आप अपने पार्टनर को कभी अकेला ना फील करवाएं। उनकी कामयाबियों के लिए उनकी तारीफ करें। उन्हें ये जताते रहें कि कोई है जो इस दुनिया में उनसे बेइंतहा प्यार करता है। 

2) मस्ती करें
सबसे जरूरी बात जो आपको समझनी होगी कि एक डिप्रेस्ड शख्स ( depressed person) के लिए आपके मुताबिक चल पाना मुश्किल होगा। अगर आप अपने पार्टनर के साथ कहीं डिनर पर जाने का सोच रहे हों और अचानक उसने आपका ये प्लान कैंसिल कर दिया, तो ऐसे में आपको खुद पर संयम रखना होगा और उनपर गुस्सा नहीं होना पड़ेगा। उनको समझने की कोशिश कीजिए कि वो उस वक्त क्या चाहते हैं। 

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वहीं जब वो बेवक्त आपको कहीं जाने के लिए कहें तो बिना बहस किए उनकी बात मान लिया कीजिए। क्योंकि वो काफी इंट्रोवर्ट (introvert) होते हैं। वह जल्दी कहीं घूमना पसंद नहीं करते। तो ये मौका है जब आप उनके साथ घूम सकते हैं, एंजॉय कर सकते हैं, उन्हें स्पेशल फील करवा सकते हैं। साथ ही उनके साथ बाते शेयर किया कीजिए, ताकि उन्हें लगे कि वह इस दुनिया में बेकार नहीं हैं। 

3) गलती से भी ना कहें कि 'तुम्हें ये करना चाहिए'
किसी भी डिप्रेस्ड शख्स को खुद पता होता है कि उनका व्यवहार धोड़ा अटपटा है। ऐसे में उन्हें बार-बार बोल कर परेशान ना करें कि तुम ये करो, तुम वो करो। जैसे कि 'तुम्हें ज्यादा बाहर निकलना चाहिए', 'तुम्हें रोना बंद करना चाहिए'... 

ऐसे में वो और भी चिड़चिड़ा जाते हैं और अंदर ही अंदर इस बीमारी को बढ़ावा भी मिल जाता है। 

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