Thursday, Mar 21, 2019

यदि नहीं बचे महुए के पेड़ तो उससे जुड़ा जनजीवन सबकुछ प्रभावित होगा

  • Updated on 3/13/2019

नई दिल्ली/प्रणव मिश्र। महुआ का महीना आने वाला है - जब पेड़ो के नीचे रात-दिन महुआ बीनने (चुनने) वालों का मेला लगेगा। बड़े भी, बूढ़े भी, बच्चे भी, महिलायें और किशोर भी महुआ बीनने जाएंगे।

जब जंगल में चारों तरफ महुआ की महक बिखर जाएगी, तब वाह क्या खुशबू आती है। हालांकि अब महुआ कम गिरता है, क्योंकि धीरे धीरे या तो गाँव का विकास उसे काट देता है या फिर लोग खुद लड़की के नाम पर काट देते हैं, जो कुछ बचा उसे कम्पनी और सरकार काट देती है। ऐसा लगता है कि महुआ के ये पेड़ भी यह खबर सुनकर निराश हो गए हैं। आदमी और पेड़ के बीच के इस खूबसूरत संबंध को न तो विकासपुरूष समझेंगे और न ही विकास के नाम पर पेड़ माफियाओं को सौंपने वाली सरकार।

महुआ बीनते वक्त गया जाने वाला गीत और महुआ की महक मिलकर माहौल को मादक बना देती है, क्या पल। क्या खूबसूरती होती है लेख में बयां कर पाना मुश्किल है।

महुआ के पेड़ व जंगल का यह समूचा दृश्य इतना सजीव और साफ दिखता है, इतना जिन्दा, इतना संपूर्ण और शाश्वत कि एक पल को यह यकीन नहीं होता कि इन्हें काटने और नष्ट करने वाले इतने निर्दयी हो सकते हैं, यदि ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले सालों में सबकुछ मटियामेट हो जायेगा।

महुआ, कोइया(डोर), तेंदू, साल के पत्तों का हरापन, झोपड़ी, लोगों के भावुक रिश्तों को समेट गाए जाने वाले गीत- सबकुछ एक गंदी विषैली हवा से भरी धूल में दब कर रह जायेगा, और ये हंसते-गाते, महुआ बीनते लोग कहीं किसी सड़क के किनारे मजदूरी करते नजर आयेंगे।

राजधानी दिल्ली और प्रदेश के राजधानी के बंद कमरे में फैसले लेने वाली सरकार और कंपनी शायद ही इस बात को समझे कि इस विकास के शोर में सिर्फ एक मनुष्य ही नहीं विस्थापित होता बल्कि उसके साथ उसका पूरा हंसता-खेलता परिवेश, जीने का ढंग भी उजड़ने को मजबूर होता है।

महुआ में बहुत कुछ है। लता, महुआ रोटी, रसपुटक्का, महुआरस के सेवई का मिठास है। कुची के साथ आने वाली महक है, महुआ का फुल है, अषाढ़ (जूलाई)में महुआ के फल (डोरी, कोइया) से निकलने वाला तेल है।

तेल जो खाना पकाने में काम आता है, तेल जो बेहद मुलायम होता है। जब ठंड में शहरी लोग क्रीम लगाते हैं तो यह लोग डोरी का तेल। पैर फटने से लेकर चेहरे तक। महुआ सिर्फ हमारी आर्थिक जरुरत पूरी नहीं करता बल्कि हमारे शरीर का भी ख्याल रखता है”। इसीलिए हमें भी इसका ख़्याल रखना होगा।

महुआ, आम, पाकड़, बरगद, जामुन, अर्जुन, आवंला, नीम, पीपल यह सभी अपने आप में अनमोल है इन्हें जीवित रखने की भरपूर कोशिश करिये।

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