Sunday, Jun 16, 2019

'जीयो और जीवन दो' इसी मंत्र पर 53 साल से टिका है भारतीय योग संस्थान

  • Updated on 4/24/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। योग आज हमारी भागती दौड़ती जिंदगी का हिस्सा बन गया है। योग के बगैर हम अपनी जिंदगी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। बच्चे से बुढ़े, युवा वर्ग या गर्भवती महिलाएं हर कोई स्वस्थ्य रहने के लिए रोजाना एक समय पर योग (Yoga) जरूर करते हैं।  कैसी भी बीमारी हो, छोटी या बड़ी योग ने उस बीमारी को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

योग की बात करें तो सबसे पहले दिमाग में भारतीय योग संस्थान का नाम आता है।  सबसे प्राचीन योग संस्थान। इस संस्थान का 53वां स्थापना दिवस हाल ही में मनाया गया। देशभर में इस संस्थान की शाखाएं फैली हैं।  ये संस्थान देशभर में निशुल्क अपनी सेवाएं दे रहा है। जीओ और जीवन दो इसी मन्त्र पर सालों से काम कर रहा है ये संस्थान। 53 सालों से भारत के 23 प्रांत और विदेश में 3500 योग साधना केन्द्रों में हजारों किस्म की बीमारी का निवारन कर चुका है संस्थान।

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योग भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। प्राचीन काल से योगगुरु शास्त्रों में योग की बात करते आएं हैं, लेकिन जब से बीजेपी सरकार ने योग को भारत में महत्व देना शुरु किया है तब से योग घर-घर जन -जन ज्यादा प्रचलित हो गया है।

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10 अप्रैल को इस संस्थान ने अपने 53 साल पूरे किए और इस अवसर पर देश के हर शहरों में ये दिन मनाया गया। नोएडा सेक्टर 19 के सनातम धर्म मन्दिर में भी कम से कम 150 लोग योग के इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। आपको बता दें केवल एक दिन नहीं, बल्कि साल के 365 दिन योगगुरु रमाकांत नोएडा के इस मन्दिर में सुबह निशुल्क लोगों को योग सिखाते आएं हैं।

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