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मिरेकल फाउंडेशन इंडिया ने की अपने चिल्ड्रंस यूथ एम्बेसडर प्रोग्राम 2019 की घोषणा

  • Updated on 7/31/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अनाथ और जोखिम का सामना कर रहे बच्चों को सशक्त बनाने और उन्हें अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचाने के अपने उद्देश्य को रेखांकित करते हुए पूरी तरह से लाइसेंस प्राप्त धारा 25 के तहत रजिस्टर्ड गैर-लाभकारी संगठन मिरेकल फाउंडेशन इंडिया (Miracle Foundation) अपनी पहली यूथ एंबेसडर (Youth Ambassador Program 2019) वर्कशॉप ‘मीटिंग ऑफ द चैम्पियंस’ का आयोजन किया। यह पहल मुंबई के रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी केंद्र में 27 से 29 जुलाई, 2019 तक की गई।

मिरेकल फाउंडेशन इंडिया को 17 बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों से कुल 78 आवेदन मिले थे, जिनमें से बारह का चयन कार्यशाला में किया गया। ये यूथ एंबेसेडर 13 से 21 वर्ष की आयु के बीच के हैं और यह विभिन्न क्षेत्रीय विविधताओं से ताल्लुक रखते हैं। यह बच्चे अपने जैसे लाखों बच्चों की आवाज़ बनेंगे। मिरेकल यूथ एंबेसेडर्स का मूल्यांकन लिखित और वीडियो आवेदनों के आधार पर उनके पैशन, कम्युनिकेशन, प्रस्तुति, एंगेजमेंट जैसे मापदंडों पर किया गया था।

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चयन पैनल में मिरेकल फाउंडेशन इंडिया के प्रतिनिधि और संबद्ध बाल कल्याण गृहों के बच्चे शामिल थे, जिन्हें मीडिया से बातचीत, लीडरशिप और/या पब्लिक स्पीकिंग का पूर्व अनुभव था।

सलोनी (यूथ एंबेसेडर्स में से एक) ने अपना उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “एक यूथ एंबेसेडर के रूप में मैं अपनी ताकत और क्षमताओं को विकसित करनी चाहती हूं। मैं कम्युनिकेशंस, लीडरशिप और समझ के हिसाब बाल अधिकारों और कौशल पर अपनी जानकारी में सुधार करना चाहती हूं।”

Navodayatimesतीन दिवसीय कार्यशाला का मुख्य फोकस इन उभरते हुए लीडर्स को कहानी सुनाने, मीडिया प्रशिक्षण और कम्युनिकेशन स्किल्स के विभिन्न स्किल-बिल्डिंग सेशंस के माध्यम से बाल अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यशाला में मिरेकल यूथ एंबेसेडर्स को स्किल्स और आत्मविश्वास में सुधार करने में मदद मिली है। इससे वे विभिन्न मीडिया और एडवोकेसी चैनलों के माध्यम से बच्चों की देखभाल प्रणाली में परिवर्तन को प्रभावित करने के लिए व्यक्तिगत अनुभवों और विचारों को साझा करने में सक्षम हुए। इन यूथ एंबेसेडर्स को विभिन्न प्रकार के मीडिया - प्रिंट से ऑनलाइन, साक्षात्कार से लेकर ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया तक - को सीखने, बनाने और उसमें भाग लेने का अवसर मिला, ताकि वे अपने दुनियाभर के लाखों अनाथ बच्चों के विचारों का प्रतिनिधित्व कर सके और उसे दुनिया के सामने रख सके। 

मिरेकल फाउंडेशन इंडिया की इंडिया कंट्री हेड निवेदिता दासगुप्ता ने कार्यक्रम पर अपनी टिप्पणी में कहा, “मिरेकल फाउंडेशन इंडिया में हम वह सब करने में विश्वास करते हैं जो अनाथ और कमजोर बच्चों को सशक्त बनाने और उनकी वास्तविक क्षमता का एहसास करने की सुविधा प्रदान कर सकने के लिए आवश्यक है। इन वर्षों में हम भारत में सीसीआई (चाइल्डकेयर संस्थानों) की देखभाल के मानकों में सुधार की दिशा में काम कर रहे हैं और इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है कि हम इस बदलाव का नेतृत्व इन बच्चों को दें? इसे ध्यान में रखते हुए हमने देश में चाइल्डकेयर सिस्टम में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान देने के साथ ही चिल्ड्रन्स यूथ एम्बेसडर प्रोग्राम बनाया है। इसके माध्यम से हम अपने यूथ एंबेसेडर्स के साथ इस आंदोलन को उद्देश्य तक पहुंचाने के लिए सभी हितधारकों और चेंज-मेकर्स तक पहुँच सकते हैं और लाखों अन्य बच्चों की आवाज़ बन सकते हैं जिनका अनुभव एक-सा है।"

Navodayatimesयूथ एंबेसेडर्स के तौर पर, बच्चों ने बाल देखभाल प्रणाली में सुधार के लिए सोशल व सामान्य मीडिया में सक्रिय रूप से भाग लिया और जानकारी हासिल की। यह कार्यक्रम बच्चों को देश में बाल देखभाल प्रणाली के सुधार में योगदान देने के लिए उनके अनुभवों और रचनात्मकता का उपयोग करते हुए प्रभावी कार्रवाई में मदद करेगा। मिरेकल फाउंडेशन इंडिया में बच्चों की व्यापक भागीदारी और यूथ एडवोकेसी की पहल के एक हिस्से के रूप में यूथ एंबेसेडर कार्यक्रम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों की आवाज को सुना जाए और उन्हें चाइल्डकेयर सिस्टम और परिवार-आधारित देखभाल केंद्रों में उन्हें सक्रिय रखा जाए।

क्या है मिरेकल फाउंडेशन इंडिया

मिरेकल फाउंडेशन इंडिया एक गैर-लाभकारी संगठन है और यह मिरेकल फाउंडेशन की एक पूरी तरह से लाइसेंस प्राप्त धारा-25 सहायक कंपनी है, जो अनाथ और कमजोर बच्चों के जीवन बदलने की देखभाल प्रदान करती है। उसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में हर बच्चे को सुरक्षित और प्यार करने वाले परिवार में बड़े होने का मौका मिले। फाउंडेशन द्वारा अब तक प्राप्त किए गए मजबूत परिणामों में सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि 13,000 से अधिक अनाथ बच्चों को सशक्त बनाया है, उनमें से 100% बच्चों का स्कूलों में दाखिला लिया है और 39% बच्चों को उनके परिवारों और रिश्तेदारों से जोड़ा है।

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