Tuesday, Oct 04, 2022
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नाइट शिफ्ट में काम करना महिलाओं के लिए जानलेवा, पढ़ें

  • Updated on 4/27/2016

Navodayatimes

नई दिल्ली (टीम डिजिटल)। एक शोध से के मुताबिक जो महिलाएं 10 से ज्यादा सालों से  नाइट शिफ्ट में काम करती हैं, उनमें 15 से 18 प्रतिशत अधिक कोरोनरी हार्ट डिसीस (सीएचडी) का जोखिम होता है। हालांकि, सीएचडी की कई वजह होती हैं जैसे धूम्रपान, असंतुलित आहार, शारीरिक श्रम की कमी और उच्च बॉडी मास इंडेक्स। इसमें शोध में दिनचर्या से पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट  रूप से देखा गया है।   

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रात्रि में काम करने वाले  लोग अक्सर नशे का सेवन भी करते हैं। दिल्ली साइकियाट्रिक सेंटर की डॉक्टर शोभना मित्तल कहती हैं कि प्राकृतिक व्यवस्था के खिलाफ शारीरिक गतिविधि और दिनचर्या शरीर के लिए नुकसानदेह है।  इस से कई तरह की स्वास्थ समस्याएं पैदा होती हैं। इससे ह्रदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। 

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अमेरिका के ब्रिंघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल के शोधार्थियों ने नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के सीएचडी के संबंधों को जानने के लिए नर्सेस हेल्थ-वन और नर्सेस हेल्थ-टू के आंकड़ों का अध्ययन किया था, जिसमें 24 साल की अवधि में 2,40,000 महिला नर्सो का अध्ययन किया गया था। अध्ययनकर्ता लेखिका सेलीन वेटर ने एक बयान में कहा, शोध के दौरान हमने देखा कि इन जोखिम कारकों पर नियंत्रण के बावजूद भी नाइट शिफ्ट में बदलाव से महिलाओं में सीएचडी का जोखिम रहता है। 

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