Monday, Apr 23, 2018

बच्चों को दें तनावमुक्त माहौल, परवरिश में अपनाएं ये Tips

  • Updated on 1/10/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बच्चों के मन पर घर के परिवेश का असर सदा ही बना रहता है और उनके विचारों को प्रभावित करता है। जहां पति-पत्नी नौकरी करते हैं, वे अपने बच्चों को बहुत कम समय दे पाते हैं। थके-हारे पति-पत्नी घर लौटते हैं तो वातावरण तनाव से परिपूर्ण होता है। इसी कारण आपसी कलह- क्लेश झगड़े का रूप धारण कर लेता है जिसे बच्चे देखते हैं।

कुछ बच्चे माता-पिता की नियमित पिटाई को सहते हुए दब्बू एवं डरपोक बन जाते हैं। वे जीवन में सदा असफल होते हैं। यदि बच्चों को हर समय प्रताड़ित किया जाता है तो वे सदा के लिए हीन भावना के शिकार हो जाते हैं। रिश्तेदारों एवं मित्रों के सामने लज्जित करना बच्चों में तनाव के रोग को जन्म देता है।

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अक्सर तनावयुक्त बच्चे सहमे- सहमे से अलग ही बैठे नजर आएंगे। कुछ बच्चे डर के मारे नाखुनों को चबाना शुरू कर देते हैं। देखने में आया है कि हाफपैंट में भी बच्चे पेशाब कर देते हैं। ऐसा ही दबाव किशोरावस्था में बना रहता है। 

बच्चों के मन में दूसरों की तारीफ सुन कर चिढ़ होती है। उनके आत्मसम्मान को ठेस लगती है। यदि उन्हें कोई प्रोत्साहित न करे तो वे सदा-सदा के लिए कुंठित भावना के शिकार हो जाते हैं। प्यार और दुलार के परिवेश से बच्चों को तनावमुक्त रखा जा सकता है। बच्चों को प्रोत्साहित करते रहें। उनकी योग्यता को बढ़ाने के लिए उनके काम की प्रशंसा करें। 

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बच्चों को दें ऐसा परिवेश

  • पति-पत्नी के झगड़ों से बच्चों को सदा दूर रखें। बच्चों में एक पक्ष की तरफदारी से तनाव बढ़ता है।
  • नशीले पदार्थों का सेवन करने की आदत को घर के परिवेश से दूर रखें। मारपीट की बुरी आदतों को त्याग कर अच्छे माता-पिता का दायित्व निभाएं।
  • घर में पढ़ाई-लिखाई का  माहौल बनाएं।
  • माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी चिल्लाने की आदत छोड़ दें। इससे बच्चों में डिप्रैशन एवं तनाव नहीं बढ़ेगा।
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