Tuesday, Jan 25, 2022
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राजमार्ग के निर्माण में दी जा सकती है 2 हजार पेडों की बलि

  • Updated on 9/26/2021

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। कंक्रीट के फैलते जाल का असर सबसे पहले पेडों पर पडता है। क्योंकि जब कंक्रीट से बने मकानों, दुकानों या मार्गों का विकास होता है तो पेडों को काटने की प्रक्रिया में भी तेजी आ जाती है। ऐसा ही कुछ दिल्ली-सहारनपुर राजमार्ग के निर्माण में होने जा रहा है, जहां करीब दो हजार पेडों की बलि दी जा सकती है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने चयनित क्षेत्र को ही वनभूमि की श्रेणी से हटाने की मांग कर डाली है। इंतजार सिर्फ वन विभाग से अनुमति प्रदान किए जाने का है।
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वन विभाग से मांगी है एनएचएआइ ने अनुमति
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एनएचएआइ ने दिल्ली-सहारनपुर राजमार्ग के छह-लेन हाइवे के 14.75 किलोमीटर का हिस्सा तैयार करने के लिए दिल्ली वन विभाग से अनुमति मांगी है। प्रस्ताव के अनुसार परियोजना उक्त वन भूमि से गुजर रही है, इसीलिए यहां का भू उपयोग बदला जाना अपरिहार्य है। अक्षरधाम एनएच-9 जंक्शन और दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच खिंचाव पर स्थित इन पेड़ों की प्रजातियों में शीशम, शहतूत, पीपल, चंपा, अशोक, सुबाबुल, नीम, नीलगिरी, कीकर, बेर, जामुन और गूलर शामिल हैं। बता दें कि पूर्वी और पूर्वोत्तर दिल्ली में 14 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र में 2,038 पेड़ हैं।
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भारतमाला परियोजना का हिस्सा है यह परियोजना
बता दें कि 1,500 करोड़ रुपए की यह परियोजना भारतमाला परियोजना के पहले चरण का हिस्सा है, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा राजमार्ग निर्माण प्रोजेक्ट है, जिसके तहत 50,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
 

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