Friday, Jan 21, 2022
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23 states reduced VAT on petrol and diesel, big relief, maximum reduction in Ladakh

पेट्रोल-डीजल पर 23 राज्यों ने वैट घटा कर दी बड़ी राहत, सबसे ज्यादा लद्दाख में हुई कटौती

  • Updated on 11/5/2021

नई दिल्ली/नेशनल ब्यूरो। केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला केंद्रीय उत्पाद शुल्क कम करने के बाद भाजपा शासित राज्यों में वैट में भी बड़ी कटौती की गई है। अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने यहां वैट घटाया है। इनमें 22 भाजपा शासित और एक अकेला ओड़िशा गैर भाजपा शासित राज्य है, जिसने वैट में कमी की है। अब इन राज्यों में पेट्रोल 8.7 रुपये और डीजल में 9.52 रुपये प्रति लीटर तक अतिरिक्त सस्ता हो गया है।
 

शुल्क कटौती का दिखने लगा असर, मिली राहत

केंद्रीय उत्पाद शुल्क के बाद वैट में भी की गई कटौती का उन राज्यों में सबसे ज्यादा असर दिख रहा है, जहां वैट ज्यादा वसूल किया जा रहा है। बता दें कि वैट शुल्क न सिर्फ पेट्रोल-डीजल की आधार कीमतों बल्कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क पर भी निर्भर करता है। इस वजह से पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करने के फैसले का विभिन्न राज्यों में प्रभावी असर अलग-अलग रहा। लेकिन महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों ने स्थानीय शुल्क (वैट) में अभी कटौती नहीं की है। हालांकि केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटाए जाने के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 6.07 रुपये और डीजल पर 11.75 रुपये प्रति लीटर कम हो गया है। 

उत्पाद शुल्क में अब तक सबसे बड़ी कटौती

राज्यों में वैट शुल्क की अलग-अलग दरें होने से पेट्रोल-डीजल के दामों में यह अंतर देखा जा रहा है। उत्पाद शुल्क में बुधवार को की गई कटौती अब तक की सबसे बड़ी कटौती है। इसके साथ ही मार्च 2020 एवं मई 2020 के बीच पेट्रोल एवं डीजल पर प्रति लीटर बढ़ाए गए क्रमश: 13 रुपये एवं 16 रुपये कर की एक तरह से वापसी हो गई है। शुल्क कटौती से पहले पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया था और डीजल ने भी कई राज्यों में यह आंकड़ा छू लिया था।

उत्तराखंड ने सबसे कम और लद्दाख ने सबसे ज्यादा घटाया वैट
उत्तराखंड में राज्य सरकार के स्तर पर की गई शुल्क कटौती सबसे कम है जबकि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में यह अधिकतम है। पेट्रोल पर उत्तराखंड ने वैट में प्रति लीटर 1.97 रुपये की कटौती की है जबकि लद्दाख में 8.97 रुपये की कटौती हुई है। डीजल के मामले में उत्तराखंड ने वैट में 17.5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है जबकि लद्दाख में यह 9.52 रुपये प्रति लीटर है। जबकि लद्दाख में पेट्रोल पर 13.43 रुपये प्रति लीटर और डीजल 19.61 रुपये प्रति लीटर की कमी हुई है। इसके बाद कर्नाटक है, जिसने पेट्रोल पर 13.35 रुपये और डीजल पर 19.61 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में पेट्रोल पर 12.85 रुपये और डीजल पर 19.61 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटने और अब वैट कटौती के बाद कर्नाटक में पेट्रोल पर 8.62 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 9.40 रुपये प्रति लीटर और सस्ता हो गया। वहीं मध्य प्रदेश ने पेट्रोल पर 6.89 रुपये और डीजल पर 6.96 रुपये प्रति लीटर की राहत दी है। उत्तर प्रदेश ने पेट्रोल पर वैट शुल्क में 6.96 और डीजल पर शुल्क में 2.04 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। गैर भाजपा सरकारों में ओड़िशा की नवीन पटनायक सरकार ने भी पेट्रोल-डीजल पर तीन रुपये प्रति लीटर वैट घटाया है।

राजस्थान में अभी भी सबसे महंगा बिक रहा पेट्रोल
शुल्कों में कटौती के बाद अब सबसे महंगा पेट्रोल राजस्थान के जयपुर में 111.10 रुपये प्रति लीटर के भाव पर है जिसके बाद मुंबई (109.98) और आंध्र प्रदेश (109.05) का स्थान है। दूसरी तरफ अधिकांश भाजपा-शासित राज्यों में पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर से नीचे आ गए हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में यह 107.23 रुपये और बिहार में 105.90 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है। इसी तरह सबसे महंगा डीजल भी राजस्थान के जयपुर में 95.71 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। आंध्र प्रदेश में डीजल का दाम 95.18 रुपये और मुंबई में 94.14 रुपये प्रति लीटर है। वहीं मिजोरम में 79.55 रुपये प्रति लीटर के भाव के साथ सबसे सस्ता डीजल मिल रहा है। दिल्ली में पेट्रोल का भाव 103.97 रुपये और डीजल का भाव 86.67 रुपये प्रति लीटर है। 

गैरभाजपा सरकारों पर भाजपा का निशाना
वैट कटौती को लेकर सियासत भी गरमा गई है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि भाजपा शासित राज्यों ने केंद्र द्वारा आम आदमी को दी गई राहत को और अधिक बढ़ाने के लिए ईंधन पर वैट घटा दिया, लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे विपक्षी दल शासित राज्यों ने ऐसा नहीं किया। भाटिया ने सवाल किया कि कांग्रेस शासित राज्य आम जनता को क्यों राहत नहीं दे सकते? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्य ‘निर्मम और अक्षम’ हैं। विपक्ष की आलोचना के बावजूद केरल सरकार के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि पिछले छह वर्षों से पेट्रोल और डीजल पर राज्य कर में वृद्धि नहीं की गई है बल्कि एक बार कमी ही की गई थी। इसलिए, राज्य को फिर से कर कम करने की आवश्यकता नहीं है...जब केंद्र डीजल और पेट्रोल के लिए अपने कर में क्रमश: 10 रुपये और पांच रुपये की कमी करता है तो केरल में यह वास्तव में 12.30 रुपये और 6.56 रुपये कम हो गया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कहा कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटाए जाने के बाद वैट दर स्वत: ही कम हो जाता है। केंद्र ने पेट्रोल पर पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल पर दस रुपये प्रति लीटर की कटौती की तो राजस्थान में पेट्रोल पर 1.6 और डीजल पर 2.6 प्रति लीटर स्वत: ही कम हो गया।


इन राज्यों ने घटाई वैट              इन राज्यों ने नहीं घटाया वैट        
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