Friday, Sep 30, 2022
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बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के चलते करीबन डेढ़ लाख छोटी मोबाइल की दुकानें हुई बंद 

  • Updated on 8/19/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। छोटे खुदरा, कॉर्पोरेट खुदरा, ई-कॉमर्स और डायरेक्ट सेलिंग सहित चार प्रमुख वर्टिकल वाले भारत के खुदरा व्यापार का तेजी से विस्तार हो रहा है।  व्यापारियों की माने तो सीधे बिक्री को छोड़कर, इस सेक्टर के लिए किसी भी नीति या दिशानिर्देशों के अभाव में, भारतीय रिटेल क्षेत्र वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बड़ी कंपनियों के लिए एक खेल का मैदान बन गया है। ये कंपनियां अपनी कुरीतियों, ज्यादा छूट के सहारे एकाधिकार जमाने में कामयाब हो रही हैं लेकिन छोटे व्यापारी प्रभावित हो रहे हैं। 
     व्यापारियों के संगठन कैट ने कहा है कि इन कंपनियों के अनियंत्रित व्यावसायिक व्यवहार के कारण अब तक एक लाख से अधिक दुकानें, जिनमें से प्रमुख रूप से मोबाइल व्यापार है, बंद हो गई हैं और दुख की बात है कि उनके व्यावसायिक आचरण को रोकने के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है। देश में कानून की प्रक्रिया इतनी धीमी है जो स्वदेशी रिटेल व्यापार के साथ न्याय करने में विफल है। अगर हमें छोटे व्यापारियों और खुदरा व्यापार को लोकतांत्रिक तरीके से काम करना है, तो सभी कार्यक्षेत्रों के लिए एक व्यापक नीति, सभी चार कार्यक्षेत्रों पर व्यापार गतिविधियों की निगरानी के लिए एक नियामक प्राधिकरण बनाया जाना चाहिए। 
     कैट ने इस बाबत आज केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से विदेशी निवेश वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़ी कंपनियों के छोटे व्यापारियों के कारोबार को और अधिक नुकसान पहुंचाने से पहले तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है। बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण प्रमुख रूप से मोबाइल व्यवसाय की एक-डेढ़ लाख से अधिक छोटी दुकानें बंद हो गई हैं जो कि चिंता का विषय है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया, राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि पिछले दस वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत से भारी धन अर्जित किया है, उसका एक बड़ा हिस्सा रॉयल्टी के रूप में अपने मूल देशों में स्थानांतरित भी कर दिया है। 
 

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