Thursday, Mar 21, 2019

दशकों से सक्रिय दिग्गज नेता नहीं लड़ेंगे चुनाव! जानिए वजह

  • Updated on 3/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लोकसभा चुनाव का मौसम आ गया है, चुनावी सरगर्मियां बढ़ गई है। लोकसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए है।  हर पार्टी अपने लिए बेहतर प्रत्याशी की तलाश में जुटी है। साथ ही चुनाव को लेकर उठापटक चालू हो गई है। अब ऐसे में सवाल टिकट देने का है किसे दें और किसे नहीं। खैर इन सब के बावजूद लोकसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवार तय करने में जुट गए हैं। लेकिन कई पार्टियों के लिए बुरी खबर है कि कई वर्तमान सांसद इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे।

जी हां, इस बार लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीति के कुछ बड़े चेहरे नजर नहीं आएंगे। वर्तमान केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, रामविलास पासवान, उमा भारती जैसे नेता चुनाव नहीं लड़ेंगे। वहीं राकांपा प्रमुख शरद पवार को लेकर चुनाव लड़ने की अटकलें तेज थीं, लेकिन उन्होंने इसे सिरे खारिज कर दिया। वहीं, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के चुनाव लड़ने पर अभी भी सस्पेंस है।

तो चलिए जानते है कि वो कौन बड़े नेता है जो इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे

सुषमा स्वराज- 25 साल की उम्र में मंत्री बनीं

राजनीतिक सफर: सुषमा हरियाणा सरकार में 25 साल की उम्र में मंत्री बनीं। किसी भी राज्य में सबसे युवा मंत्री बनने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। पहली बार हरियाणा विधानसभा से सुषमा स्वराज 1977 में विधायक चुनीं गई। हरियाणा विधानसभा में तीन बार विधायक रहीं। साथ ही चार बार लोकसभा सदस्य बनीं और तीन बार राज्यसभा सदस्य रहीं। गौरतलब है कि राज्य और केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहीं साथ ही दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं। सुषमा स्वराज हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड और मध्यप्रदेश जैसे 6 राज्यों की चुनावी राजनीति में सक्रिय रही हैं।

सुषमा स्वराज की दलीलें: सुषमा ने स्पष्ट किया था कि डॉक्टरों ने उन्हें इन्फेक्शन के चलते धूल से दूर रहने की हिदायत दी है। इसलिए वह आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी, लेकिन वह राजनीति में बनी रहेंगी।

उमा भारती- राम जन्मभूमि आंदोलन की प्रमुख नेता रहीं

राजनीतिक सफर: उमा भारती राम जन्मभूमि आंदोलन की प्रमुख नेता रहीं है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान अयोध्या में मौजूद थीं। वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं। उमा भारती 1989 में पहली बार खजुराहो सीट से लोकसभा सदस्य चुनी गई साथ ही अटल और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं है। मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री भी रहीं, वहीं मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रहने के दौरान एक मामले में गिरफ्तारी वॉरंट निकलने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।  2014 में झांसी से लोकसभा सदस्य बनीं।

उमा भारती की दलीलें: उमा भारती का कहना है कि  'राम' और 'गंगा' के लिए उन्होंने चुनावी मैदान छोड़ा है। वह अब सिर्फ भगवान राम और गंगा के लिए काम करेंगी और पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करती रहेंगी। उनका चुनाव लड़ने का बिल्कुल मन नहीं है।

शरद पवार- 14 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं

राजनीतिक सफर: शरद पवार 14 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वह पहली बार 1967 में महाराष्ट्र विधानसभा में चुनकर आए थे, साथ ही तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी बने। उन्होंने केन्द्र सरकार में रक्षा और कृषि विभाग जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली। 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बेटी सुप्रिया सुले के लिए छोड़ी थी। पवार अभी राज्यसभा सदस्य हैं।

शरद पवार की दलीलें: शरद पवार का कहना है कि परिवार के दो सदस्य यानी सुप्रिया सुले और अजीत पवार के बेटे पार्थ इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। यही कारण है कि वे इस बार चुनाव मैदान में नहीं होंगे। उन्होंने कहा था कि परिवार और पार्टी के सदस्य चाहते हैं कि पार्थ (पोता) चुनाव लड़े। मैं भी चाहता हूं कि नई पीढ़ी को राजनीति में आना चाहिए। इस बार उनके माढा से चुनाव लड़ने की अटकलें थीं।

रामविलास पासवान- 50 सालों से केंद्र की राजनीति में सक्रिय

राजनीतिक सफर: रामविलास पासवान पिछले 50 सालों से केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक हैं। पहली बार 1969 में विधायक बने। इसके बाद 1977 में वे पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। आठ बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद चुने गए। इन दौरान वे कभी यूपीए तो कभी एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। वह गुजराल, देवेगौड़ा, वाजपेयी, मनमोहन सहित मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्री बने।

रामविलास पासवान की दलीलें: पासवान ने इसी साल जनवरी में ऐलान कर दिया था कि वह आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने अभी तक इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया है।

लालू यादव- चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता कैदी हैं

राजनीतिक सफर: इमरजेंसी के दौर के बाद से बिहार में हुए हर चुनाव में लालू सक्रिय रहे, फिलहाल चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता कैदी हैं। लालू प्रसाद अपने मजाकिया भाषणों के लिए जाने जाते हैं। इस बार वह चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। फिलहाल रांची रिम्स में उनका इलाज चल रहा है। लालू यादव 1977 में छपरा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। यूपीए सरकार (2004-09) में रेल मंत्री रहे।

केसी वेणुगोपाल- एयर इंडिया में टिकट स्कैम का पता लगाया था

राजनीतिक सफर: केसी वेणुगोपाल सिविल एविएशन में राज्य मंत्री रहने के दौरान 2013 में वेणुगोपाल ने एयर इंडिया में टिकट स्कैम का पता लगाया था। उन्होंने फ्लाइट में अपनी यात्रा के दौरान इस स्कैम को पकड़ा था। 1996 में केरल की अलप्पुजा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। साथ ही ओमान चांडी सरकार में मंत्री और यूपीए-2 (2009-14) में राज्य मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल अभी उनके पास कांग्रेस में संगठन महासचिव का महत्वपूर्ण पद है।

केसी वेणुगोपाल की दलीलें: उनका कहना है कि वह कर्नाटक के प्रभारी हैं। उन पर पार्टी संगठन दी गई जिम्मेदारी है, इसी के चलते वह चुनाव न लड़ते हुए अपनी पार्टी के लिए काम करेंगे।

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