Tuesday, Dec 07, 2021
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बाबरी विध्वंस के साथ ध्वस्त हुआ राष्ट्रपति बनने का सपना, पढ़ें पूरी खबर

  • Updated on 4/19/2017

Navodayatimes

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी एवं उमा भारती  समेत 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश के तहत सुप्रीम कोर्ट ने केस चलाने का आदेश दिया है, लेकिन अगर सबसे ज्यादा किसी की राजनीति सफर में असर देखने को मिलेगा, तो वो आडवाणी और जोशी हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ ही इस साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति पद के दावेदारी में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी शामिल नहीं हो सकेंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रपति के लिए आडवाणी और जोशी का नाम सबसे आगे चल रहा था। इतना ही नहीं इनपर संसद से इस्तीफा देने का भी दबाव बन सकता है।

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संघ की पहली पंसद जोशी

वहीं, राष्ट्रपति के लिए संघ की पहली पसंद मुरली मनोहर जोशी ही थे। संघ चहता था कि राष्ट्रपति भवन में जोशी और उपराष्ट्रपति निवास में किसी दलित को बिठाकर ब्राह्मणों और दलितों को एकजुट करके हिंदुत्व एकीकरण के एजेंडे को अगले आम चुनाव मजबूत किया जा सके।

पीेएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद ही इस पद लिए अपना अंतिम निर्णय लेंगे। 

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राम मंदिर बनाने का समय आ गया

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उमा भारती ने कहा कि कोई साजिश नहीं है जो हुआ खुल्लम-खुल्ला हुआ, उसका माहौल पहले ही बन गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि अयोध्या में हिंदुओं को भड़काया गया था। उमा भारती ने कहा कि अब वो अवसर आ गया है अयोध्या में राम मंदिर बनकर ही रहेगा और आज रात ही मैं अयोध्या जाऊंगी। इस दौरान जब उमा भारती से इस्तीफे को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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