Wednesday, Apr 25, 2018

वायु प्रदूषण: हर 23 सेकंड में एक मौत, स्थिति होगी और विकराल

  • Updated on 9/19/2016

Navodayatimesनई दिल्ली (प्रियंका तिवारी)।आज तकनीकी रूप से हम काफी विकास कर चुके हैं और लगातार कर रहे रहे हैं, लेकिन अभी भी हम ऐसा कोई तकनीक इजाद नहीं कर पाए हैं, जिससे हमें शुद्ध ऑक्सीजन मिल पाए। यह प्रकृति प्रदत्त  है और मात्र वातावरण को शुद्ध रख कर ही हम शुद्ध ऑक्सीजन प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान स्थिति बेहद भयावह और चिंताजनक है, भारत में वायु प्रदूषण के कारण हर 23 सेकंड में एक जान जा रही है। 

इस दिशा में जागरूकता लाने का काम किया है गेल (इंडिया) और गुड़गांव के स्टार्टअप सोशल क्लाउड वेंचर्स ने। उन्होंने 'टाइम बॉम्ब' नाम से वीडियो लांच किया है, जिसमें 2030 का नजारा दिखाया गया है कि यदि हमने अब भी स्वच्छ ईंधन का प्रयोग करना नहीं शुरू किया तो आने वाले समय में दुनिया के लिए वायु प्रदूषण एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।  

भविष्य में आक्सीजन किट के बिना जीवन होगा मुश्किल 

'टाइम बॉम्ब' नाम का यह वीडियो वायु प्रदूषण से होने वाले आपदा को बताता है। इसमें दिखाया गया है कि निकट भविष्य में किस तरह लोग जीवन की बुनियादी जरूरत ऑक्सीजन के लिए आक्सीजन किट का सहारा लेने के लिए मजबूर हैं। शुद्ध ऑक्सीजन के अभाव में लोग अपनी उम्र से कई साल ज्यादा दिखने लगेंगे। 

एक टीनेज लड़की इस वीडियो में कहती है कि ‘यह मेरी लाइफ है, और आप की होने वाली’। ऐसा ही रहा तो इंसान जल्द ही विलुप्तप्रायः प्रजातियों में शामिल हो जाएगा।Navodayatimesहर 23 सेकंड में एक व्यक्ति मरता है प्रदूषण से 

दरअसल हम जिस हवा में सांस ले रहे हैं और हमने अभी भी नहीं चेता तो हमारा उसका भविष्य भयावह होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी किये गए आकड़ों के मुताबिक प्रदूषण के कारण भारत में 1.4 मिलियन लोगों की असामयिक मृत्यु हो रही है। यानी हर 23 सेकंड में वायु प्रदूषण के कारण एक जान चली जाती है।

काफी हद तक जिस ईंधन का प्रयोग आज हम करते हैं, वह भी वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। 2030 आने तक प्रदूषकों से हवा इतनी जहरीली हो जाएगी कि ऑक्सीजन किट के बिना जीवन मुश्किल होगा। फ़िलहाल प्राकृतिक गैस जैसे स्वच्छ ईंधन प्रदूषण कम करने का एकमात्र विकल्प है।

वातावरण को जहरीला बना रहे हैं ईंधन 

दरअसल जिन ईंधनों का प्रयोग आज हम करते हैं वे वातावरण में भारी मात्रा में कार्बन डाइआॅक्साइड, सल्फर डाइआॅक्साइड, नाइट्रोजन आॅक्साइड और पर्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन करते हैं जो हवा को बुरी तरह से प्रदूषित करते हैं। हम ईंधनों के प्रयोग को बंद नहीं कर सकते, क्योंकि उद्योगों का एक बड़ा हिस्सा इन पर ही चल रहा है, लेकिन हम निश्चित तौर पर उनके प्रयोग को बदलकर ज्यादा स्वच्छ विकल्पों को चुन सकते हैं।

जैसे कि प्राकृतिक गैस जो वातावरण में हानिकारक पर्टिकुलेट मैटर का बेहद कम उत्सर्जन करती हैं। यह निश्चित तौर पर सबसे स्वच्छ ज्वलनशील जीवाश्म ईंधन है। सीएनजी, पीएनजी जैसे ईंधन सस्ते हैं और फेफड़ों के लिए भी नुकसानदेह नहीं हैं। Navodayatimesगेल (इंडिया) की प्रवक्ता वंदना चनाना के मुताबिक, टाइम बाॅम्ब वीडियो भारत के निकट भविष्य की कल्पना है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले कुछ सालों में प्रदूषण के कारण मृत्युदर बढ़ेगा। प्राकृतिक गैस आसानी से उपलब्ध हैं और हवा में यह कम हानिकारक आॅक्साइड उत्सर्जित करती है वायु प्रदूषण के स्तर को कम रखती हैं। ख़ास बात यह है कि यह सेहत को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती। फोर्टिस लंग सेन्टर के डाॅ. विवेक नांगिया कहते हैं, प्रदूषण के कारण कई श्वसन संबंधी समस्याएं होती हैं जैसे कि अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, लंग कैंसर और कार्डियोवैस्कुलर वगैरह। प्रदुषण फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिसके कारण पूरा श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। प्रदूषण के छोटे कणों और राख के कारण त्वचा संबंधी बीमारियां होती हैं। 

'हवा बदलो' के संस्थापक निपुण अरोड़ा के मुताबिक ‘टाइम बाॅम्ब' हमें यह चेतावनी दे रहा है कि यदि प्रदूषण को यहीं पर नहीं रोका गया तो 2030 का भारत बेहद भयावह होगा। हम बेहद स्वार्थी हो गए हैं। हम आरामदायक जिंदगी जीना चाहते हैं। बड़ी कारें, बड़ा घर और सबकुछ बड़ा चाहते हैं। एक बड़ी कार खरीदना ठीक है, लेकिन अपनी कार को एक स्वच्छ विकल्प के मुताबिक ना चलाना बड़ी गलती है। हम निर्णय लेने की क्षमता खोते जा रहे हैं, हम जिस चीज को अभी अपनी सहूलियत समझ रहे हैं, वह जल्द ही निकट भविष्य में एक सामूहिक पछतावा बन जाएगा। इस वीडियो से हम यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अपने इन स्वार्थपूर्ण निर्णयों से हम असल में एक टाइम बम बना रहे हैं जो कि तब फटेगा जब अन्य नुकसानदायक पर्टिकुलेट मैटर्स का स्तर आॅक्सीजन के स्तर से बहुत आगे चला जाएगा और सांस लेने के लिये भी हवा नहीं बचेगी। Navodayatimes

'हवा बदलो' गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रवक्ता इंद्रनील दास कहते हैं, जरा सोचिये यदि हमें आॅक्सीजन किट खरीदना पड़े और उसे दिन रात लगाना पड़े तो क्या होगा? क्या होगा यदि हमें अपनी हर सांस को लेकर सतर्क रहना पड़ेगा। हमारी जिंदगी कुछ किलोग्राम आॅक्सीजन तक सीमित रह जाएगा?  प्राकृतिक गैस का प्रयोग करना आरंभ कीजिये और आने वाली पीढ़ी को एक ज्यादा स्वच्छ, हरा भरा और खुशहाल भारत सौंपिये। भारत को प्रदूषण से बचाने का एक कारगर तरीका प्राकृतिक गैस अपनाना है. प्रदूषण को जड़ से उखाड़ने की प्रतिज्ञा लें और भारत को प्रदूषण मुक्त बनाएं।

क्या है हवा बदलो अभियान

हवा बदलो गुड़गांव के स्टार्टअप सोशल क्लाउड वेंचर्स के नेतृत्व वाला एक स्वतंत्र लोगों का आंदोलन है, जिनका उदेश्य वायु के प्रदुषण स्तर को कम करना है। यह अभियान भारत की प्रमुख प्राकृतिक गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा ज्वाइंट वेंचर में चलाया जा रहा है. इस अभियान को व्यापक तौर पर चलाने की है।


इस आंदोलन का लक्ष्य लोगों को वायु-अनुकूल आदतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है जैसे कि पर्यावरण के अनुकूल ईंधन जैसे कि प्राकृतिक गैस, सीएनजी/इलेक्ट्रिक वाहनों में स्विच करना, कारपूलिंग करना और सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करना। शुरुआत में यह अभियान दिल्ली एनसीआर में चलाया जा रहा है लेकिन जल्द ही यह अभियान पूरे भारत में चलाया जायेगा। 

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