Friday, Sep 30, 2022
-->

UP Election: मां का अारोप, बहुत महत्वाकांक्षी है बेटी अनुप्रिया पटेल

  • Updated on 7/4/2016
  • Author : Priyanka tiwari

Navodayatimesनई दिल्ली (टीम डिजिटल)। मोदी मंत्रीमंडल के हो रहे विस्तार के बीच अनुप्रिया पटेल अमित शाह से मिलीं। उनका मंत्री बनना लगभग तय है। अपने ही पार्टी से अलग होने के बाद अनुप्रिया के बारे में लंबे समय से यह कयास लगाया जा रहा था कि भाजपा में शामिल हो सकती हैं। 

अनुप्रिया एक तेज तर्रार और काफी महत्वकांक्षी नेता हैं। उनके भाजपा में शामिल होने से भाजपा को उत्तर प्रदेश में विस्तार होगा। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अनुप्रिया पटेल के रूप में भाजपा ने ओबीसी वोट बैंक को लेकर बड़ा दाव खेला है।  अपना दल का मिर्ज़ापुर और वाराणसी में कुर्मी वोट बैंक है जिसका लाभ 2017 में बीजेपी को मिल सकता है। 

अापको बता दें अपना दल के संस्थापक की बेटी अनुप्रिया पटेल को अपने ही पिता की पार्टी से मां ने महत्वकांक्षा के कारण पार्टी से निकाल दिया था।  

अनुप्रिया निकाली गईं पार्टी से 

उनकी मां के मुताबिक दरअसल निकाले जाने से कुछ समय पहले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक लखनऊ के दारुलशफा में होनी थी। बैठक के लिए हॉल भी बुक किया गया था, जब पार्टी के सदस्य वहां पहुंचे तो दारुलशफा के व्यवस्थाधिकारी ने हॉल देने से मना कर दिया और कहा कि सांसद अनुप्रिया पटेल का पत्र आया है कि हॉल हमारे नाम से बुक करा दिया जाए। अनुप्रिया के कारण पार्टी की मर्यादा ही नहीं पार्टी की बैठकें भी प्रभावित होने लगी थी।  अनुप्रिया के तानाशाही रवैये के कारण सर्व सम्मति से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।   

साजिश रचने का लगा अारोप  

मां कृष्णा पटेल ने लिखित बयान जारी करके अनुप्रिया पटेल पर सियासी साजिश रचने का आरोप लगाया। कृष्णा पटेल के मुताबिक 2014 में कार्यालय के कागजो में अनुप्रिया ने हेरफेर किया और सारे अधिकार ले लिया। मीडिया में यह फैलाया कि वहीं पिता के बाद पार्टी की सर्वेसर्वा हैं।  यही नहीं मां से पूछे बिना अपना दल के प्रदेश अध्यक्ष छोटेलाल मौर्य, प्रदेश संगठन प्रमुख आनन्द हीरा राम सहित कई जिले के अध्यक्षों को पार्टी से उन्होंने निकाल दिया।  

तानाशाह हैं अनुप्रिया 

तब कृष्णा पटेल ने आरोप लगाया था कि अनुप्रिया स्वभाव से तानाशाह प्रवृति की हैं। विधायक बनते ही अपना दल में तानाशाही भरा व्यवहार करने लगी थीं। राजनीति में अाने के बाद उनकी महत्वकांक्षा दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही थी। पार्टी में उनका पद राष्ट्रीय महासचिव का था लेकिन वह  प्रधान राष्ट्रीय महासचिव लिखने लगी थीं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उपेक्षित समझने लगी थी।  

मां के खिलाफ रची साजिश 

अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल ने तब कहा था कि उपचुनाव में उन्हें कमजोर करने के लिए अनुप्रिया ने बनारस के तीन वरिष्ठ और अनुभवी पदाधिकारियों को दल से निकाल दिया, जिससे कृष्णा की उम्मीदवारी कमजोर हो गई। हालांकि उस स्थिति मेंं पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने चुनाव की जिम्मेदारी संभाली ऐसे मेंं अनुप्रिया पटेल और उनके पति आशीष कुमार सिंह ने असंवैधानिक तरीके से नई राष्ट्रीय कमेटी बनाकर मां कृष्णा के खिलाफ भितरघात किया।  

बहन के राजनीति में अाने से खफा हुईं अनुप्रिया 

कृष्णा पटेल ने अपने साथ के लिए और अनुप्रिया पटेल को उनकी जगह बताने के लिए बड़ी बेटी पल्लवी पटेल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया। यह बात अनुप्रिया को हजम नही हुई।   

अपको बता दें कि अपना दल की स्थापना कुर्मी समाज के बड़े नेता सोनेलाल पटेल ने की थी, लेकिन उनकी मौत के बाद पत्नी कृष्णा पटेल और बेटी अनुप्रिया पटेल के महत्वकांक्षा कारण पार्टी दो गुटों में बंट गया। बेटी और पत्नी में वर्चश्व की लड़ाई चल रही है। अनुप्रिया सांसद होने से पहले वाराणसी की रोहनिया सीट से विधायक रह चुकी हैं।

सत्ता का सुख भोगना चाहती हैं अनुप्रिया 

कृष्णा पटेल का आरोप है कि बेटी अनुप्रिया पटेल और दामाद आशीष कुमार सिंह अति महत्वाकांक्षी हैं, जिसके कारण पार्टी और अपने पिता की विचारधारा से  किनारा कर लिया है अनुप्रिया पटेल ने। उनके अपने समाज, परिवार या पार्टी से कोई लेना देना नही है। वह बस किसी भी हाल में सत्ता का सुख भोगना चाहती हैं।    

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें…

comments

.
.
.
.
.