Thursday, Jan 27, 2022
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मोदी सरकार ने चुनावों के मद्देनजर कृषि कानून को वापस लेने का किया फैसला  : पवार 

  • Updated on 11/19/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश और पंजाब में आगामी चुनावों में प्रतिकूल प्रतिक्रिया मिलने के डर से तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। पवार ने प्रदर्शनरत किसानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि कानूनों के खिलाफ साल भर से चल रहे उनके संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने तीन कृषि विधेयकों को पेश करने और उन्हें बिना किसी चर्चा के और राज्य सरकारों को विश्वास में लिए बिना 'जल्दबाजी में' पारित करने के लिए केंद्र की आलोचना की।    

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  महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में संवाददाताओं से बातचीत में पवार ने कहा, च्च्मैं जब 10 वर्षों तक कृषि मंत्री रहा, भाजपा ने संसद में कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया था जो उस वक्त विपक्ष में थी। मैंने एक वचन दिया था कि खेती राज्य का विषय है और इसलिए हम राज्यों को विश्वास में लिए बिना या बिना चर्चा के कोई फैसला नहीं करेंगे।’’ उन्होंने कहा, च्च्मैंने व्यक्तिगत रूप से सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ-साथ मुख्यमंत्रियों के साथ दो दिवसीय बैठक की, उनके साथ विस्तृत चर्चा की और उनके द्वारा दिए गए सुझावों पर गौर किया। इसी तरह देश के कृषि विश्वविद्यालयों के साथ-साथ कुछ किसान संगठनों से भी राय मांगी गई। हम कृषि कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करने वाले थे, लेकिन हमारी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया और नई सरकार सत्ता में आ गई।’’    

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  पवार ने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने बिना चर्चा और राज्य सरकारों को विश्वास में लिए बिना तीन कृषि विधेयक पेश किए। उन्होंने कहा, 'इन विधेयकों का संसद में सभी विपक्षी दलों ने विरोध किया था और उसकी कार्यवाही रोकी गई और मुद्दे पर बहिर्गमन हुए। हालांकि, सत्ता में बैठे लोगों ने जोर दिया कि वे विधेयकों पर आगे बढ़ेंगे और उन्हें जल्दबाजी में पारित किया गया।’’  राकांपा प्रमुख ने कहा कि नतीजन इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए। किसान मौसमी परिस्थितियों की परवाह किए बिना सड़क पर बैठे रहे और संघर्ष करते रहे।  

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    उन्होंने कहा, 'अंतत: जैसे ही उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनाव नजदीक आए और खासकर जब भाजपा के लोगों ने हरियाणा और पंजाब और कुछ अन्य राज्यों के गांवों में किसानों की प्रतिक्रिया देखी। वे इस पहलू की अनदेखी नहीं कर सके और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया।’’  पवार ने कहा कि हालांकि जो हुआ वह अच्छा है लेकिन हम यह नहीं भूल सकते कि इस सरकार ने एक ऐसी स्थिति बना दी जिसमें किसानों को एक साल तक संघर्ष करना पड़ा। 

अन्य दलों को विश्वास में लेना चाहिए :उद्धव ठाकरे 
विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की केंद्र की घोषणा के कुछ घंटों बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को भविष्य में इस तरह की ‘र्शिमंदगी’ से बचने के लिए अब से अन्य दलों को विश्वास में लेने की सलाह दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह घोषणा की कि तीन कृषि कानूनों को संसद के आगामी सत्र में निरस्त कर दिया जाएगा। ठाकरे ने केंद्र के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा देश में आम आदमी की ताकत को रेखांकित करता है। केंद्र सरकार को आज जैसी र्शिमंदगी से बचने के लिए बातचीत करनी चाहिए और अन्य दलों को विश्वास में लेना चाहिए। ’’ 

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उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की वास्तविक प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ इन कानूनों के खिलाफ पूरे देश में नाराजगी है। आंदोलन हो रहा और वे (प्रदर्शनकारी किसान) अब भी वहां (दिल्ली की सीमाओं पर) हैं। कई किसानों, जो अन्नदाता हैं, ने जान गंवा दी। यहां तक राज्य की महाविकास आघाडी सरकार ने कृषि कानूनों पर आपत्ति जताई। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन कानूनों, उनके प्रावधानों और संभावित समस्याओं पर महाराष्ट्र विधानसभा के सत्रों के दौरान विस्तार से चर्चा हुई। मैं आने वाले समय में इन कानूनों को वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करता हूं। ’’ 

 

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