Tuesday, Jul 05, 2022
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कांग्रेस के सामने ‘नव संकल्प’ के क्रियान्वयन की चुनौती

  • Updated on 5/17/2022

(उदयपुर से लौट कर शेषमणि शुक्ल)। तीन दिन के उदयपुर चिंतन शिविर में पारित ‘नव संकल्प’ को लागू करना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती दिख रही है। मंगलवार को पार्टी महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों की बैठक में फैसलों के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। सबसे ज्यादा टेड़ी खीर संगठन में 50 फीसद पद और चुनावों के टिकट 50 साल से कम आयु के युवा नेताओं और इसमें भी एससी-एसटी-ओबीसी, महिला आरक्षण लागू करना है। इस मुद्दे पर बुधवार को फिर से बैठक होगी।

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पार्टी महासचिव अजय माकन के मुताबिक ‘उदयपुर ऐलान’ कांग्रेस का ‘दृढ़ संकल्प’ है और इसे हर हाल में लागू किया जाएगा। मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में माकन ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो संगठन में कई पदों पर हैं और पांच साल से अधिक समय से एक पद पर हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव प्राधिकार, जो संगठनात्मक चुनाव कराता है, को 50 साल से कम उम्र के लोगों को 50 फीसद प्रतिनिधित्व देने की नई सिफारिशों को लेकर अवगत कराया गया है। माकन ने कहा कि प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और सिफारिशों को एक समयबद्ध कार्य योजना में लागू किया जाएगा। 

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‘एक परिवार-एक टिकट’, 50 फीसद पद और टिकट 50 साल से कम आयु के नेताओं को देने का फैसला कांग्रेस के उदयपुर चिंतन शिविर का सबसे अहम फैसला माना जा रहा है। इसे संगठन के कायाकल्प के तौर पर एक दूरगामी फैसला माना जा रहा है। लेकिन इसे लागू करना भी पार्टी के लिए दूर की कौड़ी जैसी ही दिख रही है। हालांकि इन फैसलों के साथ शर्त भी जुड़ी है कि परिवार का कोई दूसरा सदस्य अगर पांच साल से संगठन में काम कर रहा है तो टिकट और पद की उसकी दावेदारी बनी रहेगी। इस शर्त ने उन तमाम नेता पुत्रों को पद और टिकट का दावेदार बना दिया है, जो अभी भी दावेदारी करते आ रहे हैं। चाहे कमलनाथ हों, अशोक गहलोत हैं या फिर पी. चिदंबरम, जिनके पुत्र मोह को लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद राहुल गांधी ने टिप्पणी की थी।

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हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी देखा गया कि उत्तराखंड में हरीश रावत खुद तो चुनाव लड़े ही, अपनी बेटी को भी लड़वाया। बेटी जीत गई लेकिन खुद का चुनाव हार गए है। बताया गया कि रावत एक टिकट अपने बेटे के लिए भी मांग रहे थे। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में वापसी करने वाले यशपाल आर्य ने भी अपने साथ-साथ विधायक बेटे को टिकट दिलवाया था। आर्य खुद जीत गए, बेटा हार गया। पंजाब में भी दर्जनभर से ज्यादा नेता अपने परिवारीजनों के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। हर राज्य में पार्टी के ऐसे नेता पुत्रों-पुत्रियों की एक लंबी फेहरिस्त है, जो किसी न किसी रूप में परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, तो उनमें यह छंटनी करना कि पांच साल से संगठन के लिए काम किया या नहीं, पार्टी के लिए बेहद कठिन होगा।

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दूसरा, सबसे अहम फैसला है 50 फीसद टिकट और पद 50 साल से कम आयु के नेताओं को देने का। टिकट देने वाला फैसला तो 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू होगा, मगर पद वाला फैसला तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात हो रही है। लंबे वक्त से पद पर काबिज लोगों को हटाया जाएगा। यह सारी प्रक्रिया पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले-पहले पूरी कर ली जानी है। जो पद खाली हैं, उनमें तो 50 साल से कम आयु के नेताओं को सहजता से नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन जो पद खाली नहीं हैं, क्या उन पर बैठे नेताओं को हटाया जाएगा? हटाए जाने के बाद क्या पार्टी के भीतर बगावत और विरोध नहीं शुरू हो जाएगा? पार्टी के कथित असंतुष्ट समूह जी-23 ने संगठन के हर पद पर चुनाव की मांग रखी थी, उसका क्या? ब्लाक, मंडल, जिला और प्रदेश इकाइयों में भी यह फार्मूला लागू किया जाना है। इसमें वक्त लगेगा। ऐसे में जून के अंत तक पूर्णकालिक अध्यक्ष के निर्वाचन का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं दीखता।


माकन का कहना है कि फैसलों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया जा रहा है। बुधवार को भी महासचिवों और प्रभारियों की बैठक होगी। पार्टी की कोशिश है कि जल्द से जल्द फैसलों को अमल में लाया जाए। उन्होंने उदयपुर ऐलान का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों को एकजुट करने के लिए ‘भारत जोड़ो’ यात्रा देश की आजादी के 75वें वर्ष में नौ अगस्त के बाद 75 किलोमीटर की शुरू की जाएगी। वहीं, एक ट्विट में राहुल गांधी ने कहा- ‘‘जनता के मुद्दे - कमाई, महंगाई  भाजपा के मुद्दे -दंगा, तानाशाही। देश को आगे बढ़ाना है तो भाजपा की नकारात्मक सोच और नफरत की राजनीति को हराना है। आओ मिलकर भारत जोड़ो।’’

 

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