Sunday, Oct 02, 2022
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जीएसटी में बदलाव से बढ़ी आफत, सरकार प्रावधानों को आसान कर दे राहत 

  • Updated on 7/9/2022


नई दिल्ली/ अनिल सागर। सरकार ने दावा किया है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के नियमों में जो बदलाव किए हैं उससे छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी। इन बदलावों पर जीएसटी परिषद ने पिछले हफ्ते हुई बैठक में मंथन किया गया था। नए नियमों में आईएमपीएस, यूपीआई भुगतान प्रणाली के जरिए जीएसटीएन पोर्टल पर भुगतान, दो करोड़ आय वालों को वार्षिक रिटर्न में छूट दी है। व्यापारियों ने हालंाकि सरकार के कदमों को नाकाफी बताया है। 
    व्यापारियों ने सवाल किया कि जिन लोगों का कारेाबार 50 करोड़ का था उन्हें ई-इनवॉइस (पोर्टल पर सीधे) बनानी होती थी जिसे 20 करोड़ कर दिया है और आशंका है कि इसे कम किया जाएगा। व्यापारियों को डर है कि जीएसटी के पोर्टल पर बिल बनाते समय चूक हुई तो समस्याएं, विवाद बढ़ेंगे, भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। सदर बाजार व्यापारी नेता पवन कुमार बताते हैं कि वर्ष 2017-18 के ऑर्डर जारी करने के लिए जीएसटी अधिनियम की धारा 73 (कर का निर्धारण) के तहत दी गई समयसीमा में विस्तार कर 30 ङ्क्षसतम्बर, 2023 कर दी है। लेकिन अन्य वित्त वर्ष के लिए समयसीमा नहीं बढ़ाई गई है। इससे हमें कोई विशेष लाभ नहीं मिलने वाला है। 
       व्यापारी हेमंत गुप्ता ने बताया कि तेल पांच फीसद की श्रेणी में है लेकिन उसकी पैकिंग 18 फीसद है, इस पर इनपुट (अंतर वापिस मिलना)बंद हो गया है। नई व्यवस्था में बैंक पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा क्योंकि वह अपनी सेवाओं का शुल्क तो लेगा ही 18 फीसद टैक्स भी देना होगा क्योंकि चेक बाउंस होने पर बैंक शुल्क के  साथ 18 फीसद टैक्स लेगा। उन्होने कहा कि भाड़े पर लागू रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म खत्म होना चाहिए, इसमें पहले मुझे भाड़े पर दी राशि पर जीएसटी देनी होती है फिर मैं उसे वापिस लेता हूं। अनावश्यक पेपर वर्क है ये। सरकार दूसरे की देयता से हमें मुक्त करे क्येांकि यदि मैंने जिससे सामान लिया और उसने टैक्स नहीं जमा करवाया तब भी मुझे घसीटा जाता है यह न्यायसंगत नहीं है। 
        गांधी नगर के होलसेल व्यापारी केके बल्ली ने कहा कि कई छोटी वस्तुओं को भी ये जीएसटी के दायरे में ला रहे हैं। चेक बुक, डेयरी के दूध, दही पर टैक्स लगा रहे हैं आखिर सरकार समझती क्यों नहीं कि जनता को रोटी, कपड़ा और मकान पर ऐसे नियम हों जिससे वह इनसे दूर न हो। जो राहत दी है वह ऐसे नहीं कि हमें महसूस हो। सिर्फ एक ही उद्देश्य है राजस्व बढ़ाया जाए लेकिन महंगाई में जनता की जेब में कुछ पैसे छोडऩा भी होगा। मंहगाई से पहले ही आम जनता परेशान है, सरकार को समझना होगा। आज बिक्री में कमी आई है और जीएसटी के प्रावधान से व्यापार और मंदा होगा। 
 

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