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क्या बागी विधायक अदिति सिंह को खोना अफोर्ड कर पाएगी कांग्रेस ? 

  • Updated on 5/22/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना, लॉक डाउन, प्रवासी मजदूर और सियासत की बिसात। यूपी में सभी सियासी दलों ने अपने-अपने मोहरे सजा लिए हैं और प्रवासी मजदूरों की किलेबंदी मजबूत करनी शुरु कर दी है। मगर कांग्रेस (congress) की अदिति सिंह (aditi singh) ने कांग्रेस की किलेबंदी को तोड़ने की शुरुआत कर दी है। खुद कांग्रेस भी शायद इस मजबूत नाम को इतनी आसानी से गंवाना पसंद नहीं करेगी। मगर यूपी (uttar pradesh) की योगी सरकार (yogi government) और अदिति सिंह की जुगलबंदी अब साफ-साफ दिखाई देनी शुरु हो गई है। प्रवासी मजदूरों की काफी मजबूत रणनीति पर एन वक्त अपनी ही पार्टी की कलई खोलने वाली इस तेज-तर्रार विधायक के पीछे उनके पिता अखिलेश सिंह का मजबूत बैकअप दिखाई दे रहा है।

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अदिति सिंह के खिलाफ पिछले साल से बकाया है सदस्यता खारिज करने का प्रस्ताव
कांग्रेस विधानसभा मंडल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से कांग्रेसी विधायक अदिति सिंह की सदस्यता खारिज करने की दरख्वास्त की है। मगर ये खबर इतनी आसान है नहीं जितनी दिखाई या सुनाई दे रही है। इसके पीछे सियासी जोड़-तोड़ काफी गहरी जड़ें जमा चुकी हैं। सूबे में अदिति सिंह कांग्रेस का इकलौता नुकसान नहीं होगा। इससे पहले भाजपा ने कांग्रेसी विधायक दिनेश सिंह को पार्टी में लाकर 2017 में रायबरेली से सोनिया गांधी के सामने ही उतार दिया था। हालांकि सोनिया फिर भी अपनी सीट निकालने में सफल रही। मगर उनके छोटे भाई अवधेश सिंह अभी भी कांग्रेस में ही हैं मगर उनके भी जल्दी भाजपा में जाने का अंदेशा है।  

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बाहुबली अखिलेश सिंह की बेटी हैं अदिति सिंह
रायबरेली सदर के अखिलेश सिंह को बाहुबली नेता और बड़ा नाम माना जाता था। उनके गुजरने के बाद अदिति सिंह सूबे में अकेले और अलग-थलग पड़ गई थी। उन पर हमले की खबर पर खुद प्रियंका गांधी ने इंसाफ की गुहार लगाई थी। मगर तभी से अदिति सिंह के तेवर कांग्रेस में बागी होते चले गए। गांधी जयंती पर कांग्रेस ने व्हिप जारी करके लखनऊ में मार्च में शामिल होने की ताकीद की थी, मगर इसकी अनदेखी करते हुए अदिति सिंह ने योगी के विधानसभा सत्र में हिस्सा लिया। इसके पीछे 'सूबे के विकास की जरुरत महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि' सरीखा गैर जरूरी बहाना हर किसी को खटकने लगा था।

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गांधी मार्च, 370 और NRC पर अदिति पहले ही कर चुकी हैं पार्टी से बगावत
इसके बाद धारा 370 हटने से लेकर NRC पर भी वो पार्टी से बगावत करते हुए भाजपा के पक्ष में बयानबाजी कर चुकी हैं। गौरतलब है कि गांधी जयंती पर पार्टी के मार्च में शरीक नहीं होने पर कार्रवाई करते हुए कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोने अदिति कि सदस्यता रद्द करने की याचिका विस अध्यक्ष को थमा चुकी हैं। मगर इस याचिका को तब से ठंडे बस्ते में डाला हुआ है। अलबत्ता अदिति को महिला विंग महासचिव पद से पहले ही हटाया जा चुका है। मगर विधायक पद से उन्हें हटाया नहीं जा सका है।

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कांग्रेस को रायबरेली में महंगा पड़ेगा अदिति सिंह को खोना
अगर कांग्रेस उन्हें पार्टी से बाहर कर भी दे तो उनकी विधायकी पर कोई आंच नहीं आने वाली है। फिलहाल कांग्रेस के लिए बेहद अहम रायबरेली की 5 सीटों में से दो पर ही कांग्रेस काबिज है। दिनेश सिंह के जाने के भाजपा में जाने के बाद उनके भाई और हरचंद पुर से विधायक कभी भी भाजपा का रुख कर सकते हैं। ऐसे में अदिति भी अगर भाजपा में चली जाती हैं तो ये कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। 

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