Sunday, Sep 26, 2021
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कोरोना: संक्रमित व्यक्ति की छींक का कितनी दूरी तक रहता है प्रभाव, जानिए सरकार की राय

  • Updated on 5/21/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर को रोकने के लिए केंद्र सरकार कई अहम कदम उठा रही है। ऐसे में कई वैज्ञानिकों ने इस वायरस को लेकर कई ऐसे दावे किए जो ऐसे वक्त में सरकार के भी काफी काम आए हैं। हाल ही में सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने संक्रमित व्यक्ति के कोरोना फैलाने को लेकर बातचीत की। जिसमें उन्होंने कहा कि  कोविड-19 से पीड़ित व्यक्ति की छींक से निकलने वाली छोटी बूंदें दो मीटर के क्षेत्र में गिर सकती हैं और इससे निकलने वाली फुहार (एयरोसोल) दस मीटर दूर तक जा सकती है। उसने कहा कि वायु संचार व्यवस्था उचित होने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

बरते सावधानी
 प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय ने अपने परामर्श ‘‘संक्रमण रोकिए, महामारी को समाप्त कीजिए, सार्स-सीओवी2 वायरस को फैलने से रोकने के लिए मास्क, दूरी, स्वच्छता तथा खुली हवादार जगह का इस्तेमाल कीजिए’’ में कहा कि संक्रमित हवा में कोविड-19 के वायरस का प्रकोप कम करने में खुली हवादार जगह अहम भूमिका निभा सकती है और एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण फैलने के खतरे को कम कर सकती है।

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ऐसे बढ़ता है संक्रमण का खतरा
इस परामर्श में कहा गया है, ‘‘लार और छींक तथा उससे निकली संक्रमित बूंद वायरस को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकती हैं। बड़ी बूंदें जमीन और सतहों पर गिर जाती हैं और छोटी बूंदे हवा में काफी दूरी तक जा सकती हैं।’’इसमें कहा गया कि ऐसे स्थान जो बंद हैं और जहां हवा का संचार नहीं है वहां संक्रमित बूंदें संकेंद्रित हो जाती हैं और इससे उस इलाके के लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

संक्रमित व्यक्ति के नाक से निकलने वाली बूंदें दो मीटर के क्षेत्र में गिर सकती हैं जबकि और भी छोटी बूंदें हवा के जरिए दस मीटर तक जा सकती हैं।’’पहले के प्रोटोकॉल के मुताबिक संक्रमण को रोकने के लिए छह फुट की दूरी आवश्यक बताई गई थी।सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आने के बावजूद वे संक्रमित हो गए।

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दरवाजे और खिड़कियां खोलने में है ये फायदा
हवादार जगह होने से सामुदायिक रूप से बचाव हो सकता है और हम घर तथा दफ्तर दोनों जगह सुरक्षित रह सकते हैं।परामर्श में कहा गया है कि जिस तरह घर के दरवाजे और खिड़कियां खोलने तथा एक्जॉस्ट प्रणाली का उपयोग करने से हवा से गंध कम हो जाती है, उसी तरह हवादार जगह में वायु में वायरस की संख्या कम हो सकती है और इससे संक्रमण का जोखिम कम हो जाता है।

इसमें कहा गया है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर ऐसे स्थानों पर हवा की निकासी का बंदोबस्त किया जाना चाहिए।उसने कहा कि महज पंखे चलाने, खुले दरवाजे और खिड़कियां होने से वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।परामर्श के अनुसार हवा के आने-जाने और एक्जॉस्ट पंखों का उपयोग करना भी लाभदायक होगा।

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