Monday, Aug 08, 2022
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doctors in deep trouble facing corona patients and ppe kit

कहीं कोरोना, कहीं मरीज तो कहीं खुद पीपीई किट बनी कोरोना फाइटर डॉक्टरों की दुश्मन

  • Updated on 4/26/2020

नई दिल्ली टीम डिजिटल। धरती के भगवान डॉक्टरों को मरीजों की जान बचाने के लिए खुद नर्क की यातनाएं बर्दाश्त करनी पड़ रही हैं। कोरोना से बचाने के लिए तैयार की गई चुस्त पीपीई किट चिकित्सकों के लिए मुसीबत बन चुकी है। सांस लेने की तकलीफ, घुटन, गर्मी के अलावा ड्रेस में खाने-पीने तक की कोई जगह नहीं है। यहां तक कि वाशरूम तक जाने के लिए पूरी किट उतारनी पड़ती है, लिहाजा आईसीयू में काम करने वाले डॉक्टर किट के अंदर एडल्ट डायपर पहनकर काम चला रहे हैं और उसी में टॉयलेट करने को मजबूर हैं। बात करने के लिए चिल्लाने पर ही जरा सी आवाज बाहर आ पाती है। ऐसे में संपर्क बनाए रखना भी दिक्कतजदा हो जाता  है।

मरीज कर रहे हैं जानलेवा हमले, अस्पताल के अंदर कोरोना का संक्रमण
कोरोना से लड़ने के लिए चिकित्सकों को तीन तरफा मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर कोरोना के मरीजों से दिन-रात घिरे हुए चिकित्सकों को तमाम परहेज लेने के बाद भी कोरोना का वायरस संक्रमित कर रहा है। दूसरी ओर मरीजों का पता लगाने, पूछताछ या सेंपलिंग के लिए एक खास वर्ग लगातार चिकित्सकों पर जानलेवा हमले कर रहा है। एक के बाद एक ऐसे हमलों में चिकित्सकों की मौत की खबरें अखवारों  की सुर्खियां बनती जा रही हैं। वहीं अस्पताल में ऑपरेशन करके मरीजों की जान बचाने में लगे चिकित्सक अपनी किट से ही आजिज आ चुके हैं।

आधा घंटे में पहनी जाती है पीपीई किट, खाने या टॉयलेट तक का इंतजाम नहीं
इस बेहद चुस्त और पैक किट को पहनने के बाद हवा भी अंदर बिलकुल नहीं पहुंच पाती है। लिहाजा कई मिनट तक सांस लेना भी मुहाल हो जाता है। ऐसे में गर्म हालात में किट गर्म और घुटन भरी होचुकी है। किट के हेड गेयर में चश्मा पहनना भी एक दिक्कत भरा सौदा है। वहीं खाना खाने या टॉयलेट तक के लिए पूरी किट को उतार कर दूसरी किट की जरुरत पहननी होती है।

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खाना-पानी तो क्या ताजा हवा के लिए भी तरस जाते हैं चिकित्सक
लगातार ICU में ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों को अब बिना खाए-पिए अपनी कई घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है और टॉयलेट के लिए एडल्ट डायपर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। एम्स में सीनियर रेजिटेंड चिकित्सक डॉक्टर सायन नाथ बताते  हैं कि चार से छह घंटे की शिफ्ट में Personal Protective Equipment (पीपीई) को पहनने में ही आधा घंटा तक लग जाता है। इसे पहनने के बाद ताजा हवा और पानी तक के बिना काम करना होता है।

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चिल्लाने पर भी आवाज बाहर नहीं आ पाती, साइन लैंग्वेज में बात कर रहे हैं डॉक्टर
किट के हेडगेयर में ताजा हवा तक नहीं पहुंच पाती इसलिए काफी देर तक सांस लेने तक की दिक्कत पेश आ रही है। एक दूसरे से बात करने के लिए चिल्लाने पर भी बाहर जरा सी आवाज बाहर आती है। लिहाजा साइन लैंग्वेज में बात करनी होती है। 

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लोगों की जान बचाने के लिए सारी परेशानी झेलने वाले चिकित्सकों को जब चिकित्सकों पर जानलेवा हमलों की खबर मिलती है तो उन्हें दुख होता है। अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा करने वाले चिकित्सक अब खुद की हिफाजत के लिए चिंतित हैं मगर फर्ज के आगे सब कुछ झेल रहे हैं।  

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