Sunday, Jan 23, 2022
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Exercise of third front between elections of five states, KCR meets Stalin, RJD and Left leaders

पांच राज्यों के चुनावो के बीच तीसरे मोर्चे की कवायद, केसीआर की स्टालिन, राजद और लेफ्ट नेताओं से भेंट

  • Updated on 1/13/2022

नई दिल्ली/नेशनल ब्यूरो। एक तरफ पांच राज्यों के चुुनावों की गहमा गहमी चल रही है तो राष्ट्रीय फलक पर गैर कांग्रेस, गैर भाजपा एक अलग मोर्चा भी स्वरूप लेता दिख रहा है। यह मोर्चा 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बनाने की कवायद दिख रही है। एक बार फिर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) इसके केंद्र में हैं। हाल के दिनों में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, वाम दलों के नेताओं और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव से उनकी मुलाकात भविष्य का अहम सियासी संकेत दे रहे हैं।

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पूरे देश की नजर इन दिनों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर पर है, जहां 10 फरवरी से विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू होने वाला है। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित  करने वाले हैं। इन चुनावों के नतीजे 2024 का रेफरेंडम होंगे। इस बीच सुदूर दक्षिण में भी कुछ सियासी हलचल दिख रही है। बीते दिनों बिहार के प्रमुख विपक्षी दल राजद के नेता तेजस्वी यादव, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, पूर्व एमएलसी सुनील सिंह और पूर्व विधायक भोला यादव के साथ हैदराबाद में दिखे। बाद में मुख्यमंत्री केसीआर के साथ उनकी मुलाकात की एक तस्वीर सामने आई है। सियासी पंडितों का ध्यान इसके बाद हाल दिनों में केसीआर की कुछ दलों के नेताओं से हुई मुलाकातों की ओर गया। तेजस्वी से पहले वाम दलों के नेताओं ने केसीआर से भेंट की थी। उसके पहले केसीआर ने खुद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से भेंट की थी। 

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दरअसल, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) नेता और तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर खुद को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त वे इसकी कोशिश कर भी चुके हैं। तीसरे मोर्चे के गठन के लिए उन्होंने बीजू जनता दल (बीजेडी) नेता नवीन पटनायक और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता ममता बनर्जी से भेंट की थी। एनसीपी नेता शरद पवार से भी बात की थी। लेकिन ममता बनर्जी खुद को ही राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने की मंशा लिए आगे बढ़ रही हैं। इधर, केसीआर की महत्वाकांक्षा फिर से कुलांचें मारती दिख रही है। उन्होंने 14 दिसम्बर को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की। पिछले शुक्रवार को सीपीआई-सीपीएम के नेताओं से मुलाकात की। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार और पोलित ब्यूरो के सदस्य रामचंद्रन पिल्लई हैदराबाद में हुई पार्टी की केंद्रीय कमेटी की बैठक में शामिल होने हैदराबाद पहुंचे थे। सीपीआई महासचिव डी. राजा भी इसी दौरान आल इंडिया यूथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अधिवेशन में पहुंचे थे। 

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मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया। लेकिन दक्षिण भारत की सियासत को करीब से देख रहे जानकारों का मानना है कि ये केवल शिष्टाचार मुलाकातें नहीं हैं। केसीआर गोवा चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जहां टीएमसी पहली बार पश्चिम बंगाल से बाहर जाकर चुनाव लड़ रही है। टीएमसी अगर भाजपा को पटखनी देने में सफल होती है तो फिर परिस्थितियों को ध्यान में रख कर केसीआर आगे का कदम उठाएंगे।

 

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