Thursday, May 06, 2021
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famers making brick homes for protester at delhi-haryana highway sobhnt

सरकार पर दवाब बनाने के लिए किसानों ने की नई तैयारी, हाइवे पर बना दिए पक्के मकान

  • Updated on 3/13/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। तीनों कृषि कानूनों (Agriculture bill) के खिलाफ पिछले चार महीने से दिल्ली की सड़कों पर बैठे किसानों की हिम्मत अभी जवाब नहीं दी है। दिल्ली की सड़कों पर भयंकर सर्दी काटने के बाद अब यह किसान गर्मियों में आंदोलन को सुचारु रुप से चलाए रखने की तैयारी कर रहे हैं। खबर है कि दिल्ली-हरियाणा सीमा पर कुछ किसानों ने अब टैक्ट्रर ट्राली के अपने आशियाने की जगह हाइवे पर पक्के मकान बनाना शुरु कर दिया है। यह किसान किसी भी परिस्थति में आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ना देना चाहते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में पड़ने वाली गर्भी के मौसम की तैयारी में जुट गए हैं। 

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खुद के पैसों से बना रहे घर 
बता दें दिसम्बर-जनवरी की कड़ाकेदार सर्दी सड़कों पर गुजार देने वाले किसानों को हौंसला जब भी नहीं टूटा था। जब केंद्र सरकार ने इनकी राह में नुकीली कांटे के तार बिछा दिए थे। अब यह लोग खुद के संसाधनों से 20,000-25,000 रुपए जोड़कर कच्चा माल मंगा रहे हैं और खुद ही अपने लिए हाइवे पर ही अस्थायी आशियाना बना रहे हैं। बता दें कुछ किसानों का कहना है कि अभी गर्भी का मौसम आ गया है। इस मौसम में किसानों को गेंहू की फसल काटने के लिए टैक्ट्रर ट्राली की आवश्यकता पड़ती है। मजबूरी में अब उन्हें ट्रैक्टर वापस घर भेजना पड़ेगा। इसलिए भी वह अपने लिए इन मकानों को तैयार कर रहे हैं। 

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10 दौर की बातचीत हुई फेल
बता दें केंद्र सरकार के साथ 10 दौर की बातचीत होने के बाद भी किसानों और सरकार के बीच कोई सहमति नहीं बनी है। किसानों का आरोप है कि केंद्र सरकार उद्योगपतियों पर दया दिखा रही है। बता दें किसान पहले भी कई भारत बंद बुला चुके हैं। ऐसे में एक बार फिर से किसानों ने सरकार को अपनी ताकत दिखाने के लिए 26 मार्च को भारत बंद बुलाया है।  

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संयुक्त किसान मोर्चा कर रहा है नेतृत्व
गौरतलब है कि देश के कई छोटे- बड़े किसान संगठन केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले एक साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह किसान आंदोलन उस समय पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय बन गया था। जब किसानों के एक समूह ने लाल किले पर जाकर एक विशेष धर्म का झण्डा फहरा दिया था। उसके बाद सरकार ने कई किसान नेताओं को गिरफ्तार भी किया था। इसके अलावा इस किसान आंदोलन को दुनियाभर का उस समय समर्थन भी मिला था जब अमेरिकी पॉप सिंगर रिहाना और अंतराष्ट्रीय पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने इसे लेकर ट्वीट किया था।   

 

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