Sunday, Nov 28, 2021
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Farmer protest Delhi Border Madhay Pradesh Sobhnt

बिहारमय हुआ टिकरी बाॅर्डर, भारी संख्या में बिहार से आए किसान

  • Updated on 12/25/2020

नई दिल्ली(अनामिका सिंह): ‘का हो मोरा दिनवा बहुरिएं की नाहीं/हम तोहसे भगवान से पूछिला/गिरिजाघरें ईमान से पूछिला/बदरी में बिजुरी चमकीहैं की नाहीं/’ और ‘भईया किसान के तौहे दुःख ना बुझाला/इहे अनाज बोएला/तबै तू खालह’। जैसे गीतों से टिकरी बाॅर्डर का समां बिल्कुल बिहारमय शुक्रवार को दिखाई दिया। यहां भारी संख्या में बिहार से आए किसानों ने मंच सांझा किया और अपनी आपबीती को गानों के माध्यम से सुनाया। 

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किसान आ रहे है दिल्ली
मालूम हो कि किसान आंदोलन को लगातार समर्थन देने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से किसान दिल्ली बाॅर्डर पर पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भी पूर्वी यूपी, बिहार, कर्नाटका, गुजरात व मध्य प्रदेश के किसान यहां पहुंचे। वहीं यहां सबसे जबरदस्त रंग जमाया बिहार के किसानों ने। उन्होंने लोकगीतों के माध्यम से किसानों के जीवन में आने वाली कठिनाईयों को बताया कि किस तरह बारिश अधिक होने या फिर कम होने पर परेशानियों का सामना किसानों को करना पडता है।  

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अपने हक की लड़ाई लड़ सकता है
इसी तरह बिहार के किसानों ने कई गीत किसानों के योगदान को समझाते हुए गाए, जिसमें बताया गया था कि किसान के हौसले इतने बुलंद होते हैं कि वो धरती का सीना चिरकर यदि अनाज उगा सकता है तो अपने हक की लडाई भी पूरी मुस्तैदी और हिम्मत के साथ लड सकता है। बिहार के एक युवा ने एक गीत सुनाया जिसमें बताया गया था कि एक किसान का बेटा जब फौज में जाता है तो हल चलाते हुए कैसे किसान मां-बाप अपने बच्चे को याद करते हैं और धरती माता से कहते हैं कि उसका ध्यान रखना। बीवी खेतों में बीज डालते हुए अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है और अंत में इस गीत के माध्यम से बताया गया कि वो किसान ही हो सकता है जो अपने बच्चे को देश के प्रति बलिदान करने में भी पीछे नहीं हटता। 

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रोहतक के किसानों ने लौटाया 2 हजार का चैक
टिकरी बाॅर्डर पर भारी संख्या में रोहतक से आए किसानों ने केंद्र सरकार द्वारा साल में 3 बार दिए जाने वाला 2 हजार का चैक यहां लाकर लौटा दिया है। उनका कहना है कि सालाना 6 हजार से उनका परिवार नहीं पलता। सरकार को यदि कुछ देना ही है तो इस 6 हजार की बजाय कृषि विधेयक के तीन काले कानूनों को वापस ले।

किसान समर्थन के साथ दे रहे हैं चंदा भी
टिकरी बाॅर्डर पर आने वाले किसान सिर्फ आंदोलन को अपना समर्थन ही नहीं दे रहे बल्कि समर्थन के साथ ही चंदा भी दे रहे हैं। जिससे जो जुड पा रहा है चाहे वो 10 रूपए हो या 10 हजार वो मदद कर रहा है। जिसका बकायदा लेखा-जोखा भी वालंटियर्स द्वारा डायरी में रखा जा रहा है।

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