Sunday, Mar 07, 2021
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फैक्ट चेक: प्रदर्शनकारियों ने नहीं फहराया खालिस्तानी झण्डा, न तिरंगा हटाया

  • Updated on 1/27/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राष्ट्रीय राजधीनी क्षेत्र दिल्ली में पिछले दो महीने से चल रहा किसान आंदोलन (Farmer protest) 26 जनवरी को कल हिंसक हो गया है। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने लाल किले पर अपना झण्डा फहरा दिया है। कुछ लोग इस झण्डे को खालिस्तान का झण्डा बता रहे थे इसको लेकर देश में बहस शुरु हो गई है इसलिए हम इसके पीछे के तथ्य को आपको बता रहे हैं। 

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लोगों ने बताया काला दिवस

बता दें भारत के लिए काला दिन बताते हुए इसे कुछ लोगों ने ट्वीटर और फेसबुक पर इसे काला दिन बताना शुरु कर दिया था। जिसके बाद कुछ लोगों ने दावा किया कि किसानों ने भारतीय झण्डे को हटाकर वहां खालिस्तानी झण्डा फहराया गया था। बाद में कई लोगों ने अपने ट्वीट को डिलीट भी किया था। मगर यह सच नहीं हैं। इसको लेकर जब हमने जांच की तो हमें पता चला कि किसानों ने कोई तिरंगा नहीं उतारा है। वहां पहले से कोई झण्डा नहीं फहराया हुआ था। 

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पहले से नहीं था कोई झण्डा
बता दें हमने वहां खड़े हमारे एक रिपोर्टर से बात की तो उन्होंने बताया था कि प्रदर्शनकारी जहां झण्डा फहरा रहे थे। वहां पहले से कोई झण्डा नहीं था। न ही प्रदर्शनकारियों ने किसी झण्डे को वहां से उतारा था। बता दें खम्बा खाली था, जिस पर एक शख्स चढ़ गया और एक झंडा फहरा दिया गया था। मगर कुछ लोग फेक न्यूज फैला रहे थे कि वहां तिरंगा झण्डा था जिसे उतारा गया था।   


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क्या यह था खालिस्तानी झण्डा
बता दें वहीं न्यूज एजेंसी एएनआई की एक वीडियो में जब देखा गया कि जो झण्डा फहराया गया है। उसको लेकर झूठ बोले जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह झण्डा खालिस्तानी है और लेकिन जब उसको जूम करके देखा गया तो पता चला कि वह झण्डा सिखो के धर्म का निशान चिन्ह था। जिसके दोधारी तलवार बने हुए थे। इस प्रतीक चिन्ह को गुरु गोविंद सिंह के समय से ही इस्तेमाल किया जा रहा है। 


 

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