Monday, Aug 15, 2022
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निजीकरण के विरोध ने कर्मचारियों ने बुलाई हड़ताल, लगातार 4 दिन बैंक रहेंगे बंद

  • Updated on 3/10/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट में आईडीबीआई (IDBI) के अलावा दो और सरकारी बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया है। ऐसे में इन बैंक के कर्मचारी सरकार के इस फैसले से खुश नहीं है। इन लोगों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए दो दिन की हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। ऐसे में अब आम लोगों से इससे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपको भी अगले कुछ दिनों में बैंक में कुछ काम है तो उसे जल्दी से कर लीजिए क्योंकि अगले हफ्ते बैंक लगातार 4 दिन बंद रह सकते हैं।  

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सरकार प्राइवेट करने जा रही है बैंको को
बता दें कि केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष 2021-2022 के लिए ऐलान किया था कि वह देश की चार से ज्यादा बैंकों को प्राइवेट करने जा रहे हैं। जिसके बाद 9 बैंक यूनियनों के केंद्रीय संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने इसकी हड़ताल का ऐलान किया है।  वह कहते हैं कि हड़ताल की वजह से सरकारी बैंकों के कामकाज पर असर होगा। बता दें देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया  के कामकाज पर भी इसका असर पड़ने वाला है। बता दें बैंक कर्मचारियों की इस हड़ताल से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।  

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कई यूनियन करने जा रहे हैं हड़ताल
बता दें अगले हफ्ते यूनियन ने ऐलान किया है कि 15 मार्च और 16 मार्च को वह लोग हड़ताल करने जा रहे हैं। इस तरह से यह दोनों दिन हड़ताल की वजह से ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं इससे पहले दो दिन 13 और 14 मार्च को शनिवार और रविवार होने की वजह से बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोगों को अपने जो भी काम है वह उन्हें इन छुट्टियों से पहले ही खत्म कर लेने चाहिए। नहीं तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यहां इससे पहले 11 मार्च को महाशिवरात्रि के दिन देशभर में सभी बैंक बंद रहेंगे। 

सरकारी कर्मचारियों के अंदर बैठा डर
गौरतलब है कि सरकारी बैंक के निजीकरण के फैसले से सरकारी बैंकों के कर्मचारियों के अंदर डर बैठ गया है। इन लोगों की शिकायत है इस तरह से न यह बैंक बचेंगे और नहीं उनकी नौकरी बचेगी। बैंक यूनियनों की माने तो सरकार को ऐसा भ्रम है कि निजी कर्मचारी कुशल होते हैं। वह कहते हैं कि निजीकरण न तो दक्षता लाता है और नही सुरक्षा। 
 

 

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