Tuesday, May 24, 2022
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getting noc license for the factory is nothing less than chewing iron gram

फैक्ट्री के लिए एनओसी लाइसेंस लेना लोहे के चने चबाने से कुछ कम नहीं

  • Updated on 5/14/2022

नई दिल्ली/अनिल सागर। राजधानी में छोटी बड़ी करीबन एक लाख फैक्ट्रियां, अधिकृत, अनधिकृत इलाकों में चल रही हैं और जानकार मानते हैं कि बामुश्किल एक हजार के पास भी अग्रिशमन विभाग से एनओसी नहीं होगी। फैक्ट्री मालिकों में खासी नाराजगी है कि उन्हें एनओसी देने के नाम पर या तो प्रताडि़त किया जाता है या फिर इतनी शर्तें लाद दी जाती हैं जिसे पूरा करना संभव ही नहीं है। फैक्ट्री चाहें बड़ी हो या छोटी मालिकों ने बताया कि एनओसी लेकर अग्रिशमन विभाग और निगम दोनों का रवैया एक जैसा ही है और वे चाहते हैं कि अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ कर सारी जिम्मेदारी फैक्ट्री मालिक के ऊपर डाल दी जाए। 
        बादली इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन के जनरल सेके्रट्री रवि सूद ने बताया कि सरकार ने 250 वर्गमीटर तक के क्षेत्र के लिए फायर डिपार्टमेंट की एनओसी लेने की आवश्यकता खत्म कर दी है। एक उद्यमी को फायर डिपार्टमेंट की एनओसी तभी लेनी पड़ती है अगर उसका फैक्ट्री के इस्तेमाल आने वाला क्षेत्र उससे ज्यादा है। उद्यमी को फायर डिपार्टमेंट से एनओसी लेना कोई लोहे के चने चबाने से हल्का काम नहीं है, ज्यादातर उद्यमी इससे बचने के लिए अगर उनका एरिया ज्यादा भी होता है 250 स्क्वायर मीटर दिखा देते हैं। 
        फैक्ट्री मालिक एसके महेश्वरी भविष्य ऐसे हादसों से बचने के लिए फायर एनओसी, फैक्ट्री लाइसेंस से संबंधित पूरी प्रक्रिया की दुबारा तहकीकात होनी चाहिए। सभी बिंदुओं के आकलन करने की जरूरत है और कोई भी नई पॉलिसी बनाते समय हमें सेफ्टी का ध्यान रखते हुए प्रक्रिया को आसान बनाना होगा। उन्होने कहा कि अगर नियम लचीले, स्वीकार्य नहीं होंगे तो उद्यमी के लिए ऐसी हालात में एक उद्यमी के पास सिवाय गलत रास्ता इस्तेमाल करके एनओसी लेने के और कोई चारा नहीं रहता है।
        एसके महेश्वरी मानते हैं कि गलतियां फैक्ट्री मालिक भी करते हैं, वह भी उतना ही दोषी हैं जितना कि सरकार लेकिन यह कहां का इंसाफ है के जो दोषी अफसर रिश्वत खाकर काम करते हैं वह तो साफ  निकल जाते हैं और एक फैक्ट्री मालिक जो  दिन रात मेहनत करके देश के लिए उत्पादन बढ़ाने के लिए लगा रहता है उसको जेल भेज दिया जाए। सरकार विशेष समिति गठन करे, जिसमें एक्सपर्ट, सरकारी अफसर और इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के की कार्यकारिणी के वह सदस्य जो खुद की फैक्ट्री चलाते हो रखना चाहिए ताकि एक व्यवहारिक परंतु आसान प्रक्रिया निर्धारित की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं से हम बच सकें। ईस्ट दिल्ली मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के चेयरमैन डा. अनिल गुप्ता नियम व्यवहारिक होने चाहिए, लाल फीताशाही खत्म होनी चाहिए। उद्योग विभाग, निगम, अग्रिशमन विभाग के संयुक्त कैंप लगाए जाएं और उसी आधार पर लचीले नियमों के साथ एनओसी दी जाए। 
 

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