Tuesday, Mar 31, 2020
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राजस्थान में शिशुओं की मौत पर उच्च न्यायालय ने गहलोत सरकार से मांगी रिपोर्ट

  • Updated on 1/7/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजस्थान (Rajasthan) उच्च न्यायालय की जोधपुर (Jodhpur) पीठ ने राज्य में शिशुओं की मौतों के बारे में संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। राजस्थान में शिशुओं की मौतों का आकड़ा काफी बढ़ गया है, देश भर में इस मामले की चारों तरफ निंदा हो रही है। लोगो ने सरकार पर अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और सही ईलाज ना मिलने का आरोप लगाया है। नवजात बच्चों की मौत पर सरकार पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है। फिलहाल न्यायालय ने 10 फरवरी को इस मामले में अगली सुनवाई का आदेश दिया है।
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कितने शिशुओं ने खोई अपनी जान 
एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बीकानेर (Bikaner) में सरकारी अस्पतालों में 162 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। वही जोधपुर में ही 146 और कोटा में 110 लोगों की मौत का सामना आया है। इस तरह के मौत के आकड़े सामने जब आते है तो सरकार की जवाबदेही जरुर बनती है। आखिर इन मासूम शिशओं के मौत का जिम्मेदार कौन है? कब इस मामले के दोषियों को सजा मिलेगी ? एक मां बाप को ही अपने बच्चों को खोने का असली दर्द पता होगा शायद हम उसका अंदाजा नही लगा सकते। उच्च न्यायालय ने इस मामले को काफी गंभीरता से अपने हाथ में लिया है।
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राजस्थान से गुजरात तक बच्चों की मौत
आपको बता दे राजस्थान से लेकर गुजरात तक अस्पतालों में सैकड़ों बच्चों की मौत ने देश को हिला दिया है। कोटा के जेके लोन अस्पताल का मामला सामने आने के बाद जोधपुर, बूंदी और बीकानेर में भी शिशुओं की मौत से हड़कंप मचा हुआ है। राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। दूसरी ओर अहमदाबाद और राजकोट के अस्पताल में तकरीबन 200 बच्चों की मौत के बाद राज्य की मुख्यमंत्री विजय रुपाणी (Vijay Rupani) सवालों के घेरे में है, मुख्यंत्री विजय रुपाणी से जब सवाल पूछा गया तो रुपाणी जी सवाल का जवाब ही देना उचित नही समझा।   
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जाने क्या है समस्या
कोटा (Kota) के जेके लोन अस्पताल में फिलहाल एक बेड पर तीन बच्चों को देखा जा रहा है। पिछले 6 सालों में अस्पताल में एक लाख से ज्यादा बच्चों को लाया गया था, यहां पर बच्चों और नवजातों के लिए केवल 157 बेड हैं। अस्पताल के शिशु रोग विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोटा, बरन, बूंदी और झालावाड़ में बच्चों की संख्या के अनुसार तकरीबन 300 बेड की और आवश्यकता है।

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