Sunday, Dec 04, 2022
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राहुल से मिले हुड्डा फिर आजाद के घर पहुंचे, हफ्तेभर में जी-23 की तीसरी बैठक

  • Updated on 3/17/2022

नई दिल्ली/नेशनल ब्यूरो। कांग्रेस में मची उठापटक के बीच हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और असंतुष्ट बताए जा रहे जी-23 के सदस्य भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने वीरवार को पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस भेंट के बाद हुड्डा सीधे गुलाम नबी आजाद के घर पहुंचे। इस बीच आनंद शर्मा भी वहां पहुंचे और 24 घंटे के भीतर दूसरी बार तथा हफ्ते भर में तीसरी बार जी-23 की बैठक शुरू हुई।

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राहुल गांधी के साथ हुड्डा की इस मुलाकात को गांधी परिवार की ओर से जी-23 के नेताओं से संपर्क साधने और उनके पक्ष सुनने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, बुधवार को जी-23 के सदस्यों की एक अहम बैठक आजाद के घर पर हुई, जिसके बाद 18 नेताओं के हस्ताक्षर वाला एक बयान सामने आया। इस बयान में कांग्रेस के ‘जी 23’ समूह के नेताओं ने बताया कि बैठक में हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों पर चर्चा की थी और कहा था कि पार्टी के लिए आगे बढऩे का यही रास्ता है कि सामूहिक और समावेशी नेतृत्व की व्यवस्था हो। बयान में अगले लोकसभा चुनाव के लिए एक भरोसेमंद विकल्प पेश करने के मकसद से समान विचारधारा वाले दलों के साथ बातचीत शुरू करने पर जोर दिया गया है।

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अब इस बयान के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बयान में लिखा ’सामूहिक और समावेशी नेतृत्व’ शब्द ही वह मसला है, जिसने अब गांधी परिवार को परेशान कर रखा है। क्या जी-23 के नेता पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ खुल कर बगावत करने की दिशा में बढ़ रहे हैं? सूत्रों की माने तो पंजाब में कैप्टन अमरिंदर को हटाने, नवजोत सिंह सिद्धू को अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने तथा चुनाव प्रचार के बीच चन्नी को अगला मुख्यमंत्री चेहरा बनाए जाने के फैसले को लेकर जी-23 के नेता नाराज हैं। उनका मानना है कि पार्टी के निश्चित फोरम पर बगैर किसी चर्चा के और सामूहिक राय बनाए ये फैसले लिए गए, जिसकी वजह से पंजाब में कांग्रेस के हाथ से सत्ता चली गई। जाहिर है इन सबके लिए राहुल गांधी निशाने पर हैं। 
जानकारी आ रही है कि राहुल से मुलाकात में हुड्डा ने कपिल सिब्बल के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई न करने की बात कही है। हुड्डा ने यह भी साफ कर दिया कि अगर सिब्बल के खिलाफ कार्रवाई ‘जी 23’ को स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सिब्बल ने सिर्फ कांग्रेस को मजबूत बनाने के बारे में बात की थी। बता दें कि सिब्बल ने पिछले दिनों एक साक्षात्कार में कहा था कि गांधी परिवार को कांग्रेस का नेतृत्व छोड़ देना चाहिए और किसी अन्य को मौका देना चाहिए। इसके बाद गांधी परिवार के वफादार माने जाने वाले कुछ नेताओं ने सिब्बल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सिब्बल का यह बयान रविवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दूसरे दिन आया था।

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दरअसल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनाव के शर्मनाक नतीजों के लिए पार्टी का असंतुष्ट खेमा नेतृत्व और उसके फैसले को जिम्मेदार मानता है। इसीलिए ‘सामूहिक और समावेशी नेतृत्व’ की जरूरत पर जोर दे रहा है। हालांकि इस बीच सोनिया गांधी ने पांचों चुनावी राज्यों के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों का इस्तीफा ले लिया और हार के कारणों का आकलन करने तथा जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिए सुझाव देने को अलग-अलग नेताओं को प्रदेशवार जिम्मेदारी सौंप दी है। 

24 घंटे में आजाद के घर जी-23 की दूसरी बैठक
बुधवार को हुई असंतुष्ट नेताओं के समूह जी-23 की बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद वीरवार को सोनिया गांधी से मिलने वाले थे, लेकिन उससे पहले राहुल गांधी ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बुला लिया। करीब डेढ़ घंटे की मुलाकात में उनके बीच हुई बातचीत सामने नहीं आ सकी। राहुल के यहां से निकलते वक्त हुड्डा ने मीडिया के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। अलबत्ता वहां से वे सीधे आजाद के घर पहुंचे। इसी बीच आजाद के घर पर कपिल सिब्बल और आनंद शर्मा भी पहुंचे। इन सबकी फिर लंबी बैठक चली। जी-23 के इन नेताओं की हफ्तेभर में यह तीसरी और बीते 24 घंटे में दूसरी बैठक थी। वहीं, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने जी-23 के नेताओं की बैठकों पर निशाना साधते हुए कहा कि सोनिया गांधी हर कांग्रेसी से बात करने को तैयार हैं। अगर सही मंशा है तो बात करने में दिक्कत क्या है? पार्टी के वरिष्ठ नेता पी. चिदम्बरम ने गांधी परिवार का बचाव करते हुए कहा कि हार के लिए सिर्फ गांधी परिवार को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने जी-23 के नेता से कांग्रेस को विभाजित नहीं करने की अपील की।  

केरल कांग्रेस में भी मचा बवाल, सोनिया से मिले के सुधाकरण
राज्यसभा में उम्मीदवार बनाने को लेकर केरल कांग्रेस में भी बवाल मच गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से पार्टी सचिव कृष्णनन श्रीनिवासन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि केरल कांग्रेस की इकाई ने एम. लिजू का नाम सुझाया था। इस बात पर राज्य के कई कांग्रेसियों ने नाराजगी जताई है। कृष्णनन को प्रियंका गांधी वाड्रा का करीबी और रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी से जुड़े हुए हैं। राज्य इकाई के कुछ नेता इसे परिवारवाद बता कर विरोध कर रहे हैं। इस बीच केरल कांग्रेस के अध्यक्ष के. सुधाकरण ने सोनिया गांधी से मुलाकात की। बता दें कि इसी महीने केरल की तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिसमें से एक सीट कांग्रेस के ए.के. एंटनी वाली है।
 

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