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15 अगस्त विशेष: संघर्षशील पिंगली वेकैंया ने किया था तिरंगे को डिजाइन

  • Updated on 8/14/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। स्वतंत्रता के लिए देश के अनगिनत लोगों ने लंबा संघर्ष किया है। इसके साथ ही देश की आन बान शान रहे तिरंगे ने भी देशभक्ति का जज्बा भरा। इसकी खातिर हजारों लोगों ने जान न्योछावर भी की। लेकिन, बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि इस तिरंगे का मूल डिजाइन किसने तैयार किया और उस शख्स का जीवन कितना संघर्षों से गुजरा। बता दें कि पिंगली वेकैंया ने ही तिरंगे का मूल डिजाइन तैयार किया था, जो बाद में कुछ बदलाव के साथ राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया।

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1.पिंगली वेकैंया का जन्म  2अगस्त 1878 को वर्तमान आंध्र प्रदेश के मंछलीपंट्टनम के निकट भाटलापेनुमारु नामक स्थान पर हुआ। उनके पिता का नाम पाडुरंग और माता का नाम काल्पवती था। 

2.मद्रास से हाई स्कूल की पढ़ाई उत्तीर्ण करने के बाद वो अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए।

3.वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी और कृषि वैज्ञानिक थे।

4.उन्हें कई भाषओं का ज्ञान था। इसके साथ ही भूविज्ञान और कृषि क्षेत्र में उनकी गहरी दिलचस्पी थी।

5.कम ही लोग जानते हैं कि वो हीरे की खादान के भी विशेषज्ञ थे। 

6.मात्र 19 साल की युवा अवस्था में पिंगली ब्रिटिश सेना में सेवारत रहे।

7. इतना ही नहीं, दक्षिण-अफ्रीका के एंग्लो-बोअर युद्ध में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

8.सेना में नौकरी करने के बाद वे मुंबई के रेलवे स्टेशन पर गार्ड की नौकरी करने लगे।

9.कुछ समय पश्चात अचानक तब नौकरी छोड़ दी, जब मद्रास में प्लेग नामक महामारी फैल गई, जिसमें कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया।

10.प्लेग बिमारी से संक्रमित लोगों की सेवा में उन्होंने दिन रात एक कर दिया। 

11.उसके बाद पिंगली ने मद्रास में प्लेग रोग निर्मूलन इंस्पेक्टर की नौकरी कर ली।

12.बहुत कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि पिंगली वेकैंया को 'झंड़ा वेकैंया' के नाम से भी जाना जाता था। 

13.जब वो महात्मा गांधी के संपर्क में आए तो गांधी जी की विचारधारा से इतने प्रभावित हुए की फिर वो उनके ही मार्ग दर्शन में अपने काम को आगे बढ़ाने की ठान अपने काम को आगे बढ़ाने में लग गए। जब वेकैंया ने गांधी जी को हमारे देश का अपना झंड़ा होने का सुझाव दिया तो  गांधी जी को उनका यह विचार बहुत पंसद आया। अब हम यहां कह सकते हैं  कि दोनों एक दूसरे की विचारधारा से काफी प्रभावित थे।

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14. पिंगली वेंकैया के जीवन के अंतिम दिन बहुत गरीबी में बीते। जीवन के अंतिम दिनों में वेंकैया ने इच्छा जाहिर की कि उनको तिरंगे में लपेटा जाए। इस तरह इस महान व्यक्तित्व ने देश सेवा में अपना जीवन खपा दिया। 

 

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