Wednesday, Jan 29, 2020
jdus slogan will be why should we consider the idea why nitish kumar will be removed from bihar

"बिहार में बहार" को हटाकर "क्यों करें विचार ठीके तो है नीतीश कुमार" होगा JDU का स्लोगन

  • Updated on 9/2/2019

 नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बिहार में इस बार आगामी विधानसभा के लिये नए स्लोगन को अंतिम रुप सत्ताधारी जद यू  ने दे दी है जिसमें प्रचारित किया गया है कि  "ठीके तो है नीतीश कुमार"। बता दें कि साल 2015 में JDU का स्लोगन 'बिहार में बहार है' था,और इस साल JDU ने अपने नए स्लोगन होर्डिंग्स पर लिखवाया है- "बिहार में बहार' नहीं बल्कि "क्यों करें विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार"। 

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इस नए स्लोगन के जरिए JDU यह साबित करना चाहती है कि बिहार की जनता के पास नीतीश कुमार के अलावा और दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इस स्लोगन के माध्यम से JDU बिहार में नीतीश के ठीक होने का संदेश दे रही है, जेडीयू का कहना है कि जब बिहार में नीतीश है तो फिर किसी और उम्मीदवार के लिए क्यों सोचना चाहिये। 

बता दें कि यह नारा पार्टी के कार्यालय के बाहर भी लगा दिया गया है। जेडीयू को यह स्लोगन पार्टी के राष्ट्रीय सचिव उपेन्द्र कुमार सिंह (Upendra kumar singh) ने दिया है। इतना ही नहीं बिहार में इस स्लोगन के साथ "जनता दल" ने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले 2015 विधानसभा के लोकप्रिय नारे "बिहार में बहार" को  प्रशांत किशोर (Prashant kishore) ने दिया था। 

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बता दें कि यह नारा बिहार में इतना चला था कि बिहार में आज भी लोग इसकी चर्चा करते हैं। ऐसे में आरजेडी नीतीश कुमार पर निशाना भी साधने लगी है। आरजेडी के कुछ कार्यकर्ताओं ने नीतीश पर ताना कसते हुए कहा कि "बिहार में एके-47 की भी बहार है जेल में जन्मदिन पार्टी गुलजार है ऐसे में क्यों करें विचार ठीके तो है नीतीश कुमार"। 

आरजेडी ने साधा निशाना 

आरजेडी के प्रवक्ता वीरेंद्र और एक विधायक का कहना यह है कि जेडीयू ने यह नया स्लोगन लेकर गलती कर दी, यह जल्दबाजी में लिया गया स्लोगन है जो पार्टी को और भी पीछे कर सकता है। आरजेडी के प्रवक्ताओं की तरफ से बिहार में गुंडागर्दी को लेकर भी बहुत से सवाल उठाए जा रहे हैं, और कहा जा रहा है क्या अब भी ठीके है नीतीश कुमार। इन दिनों इस नए नारे की गांवो के चौपालों में चाय के साथ काफी चर्चा हो रही है।

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बिहार के कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ,यह नया नारा कहीं नीतीश और जेडीयू को भारी न पड़ जाए। विपक्षी दलों का मानना है कि जेडीयू के कार्यकर्ताओं को नीतीश के अलावा कोई और दिख ही नहीं रहा है। कहीं पार्टी इसी जोश में दूसरे उम्मीदवारों को अंडर स्टीमेट कर कर खुद को भारी मतों का नुकसान भी पहुंचा सकती है। आरजेडी का मानना है कि यह बिहार विधानसभा का चुनाव है और बिहार के लोगों से जुड़ा हुआ है, ऐसे में बिहारी भाषा का स्लोगन देकर बिहार की जनता को आकर्षित किया जा सकता है। 
  
 


  

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