Saturday, Apr 17, 2021
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इंदौर में कम्प्यूटर बाबा के आश्रम में चला बुलडोजर, बाबा को किया गया गिरफ्तार

  • Updated on 11/8/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मध्य प्रदेश में कमलनाथ (Kamalnath) की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस (Congress) सरकार में नदी संरक्षण न्यास के अध्यक्ष रहे कम्प्यूटर बाबा समेत सात लोगों को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण ढहाए जाने के अभियान के दौरान रविवार सुबह एहतियातन गिरफ्तार किया गया।  पुलिस अधीक्षक महेशचंद्र जैन ने बताया कि इंदौर शहर से सटे जम्बूर्डी हप्सी गांव में कम्प्यूटर बाबा के आश्रम परिसर में प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण ढहाए जाने के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 151 के तहत यह कदम उठाया गया।      

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6 लोगों को किया गिरफ्तार
उन्होंने बताया कि कम्प्यूटर बाबा और उनसे जुड़े छह अन्य लोगों को एहतियातन गिरफ्तार कर एक स्थानीय जेल भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन की जांच के दौरान कम्प्यूटर बाबा के आश्रम परिसर में दो एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण प्रमाणित पाया गया था। हालांकि, यह आश्रम 40 एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैला है और इसका मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 80 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग ने इस मामले में आश्रम के कर्ता-धर्ताओं पर कुछ दिन पहले 2,000 रुपये का अर्थदंड लगाया था और उन्हें शासकीय भूमि से अवैध निर्माण हटाने को कहा गया था।     
 
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भारी पुलिस बल किया तैनात
अधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर प्रशासन ने आश्रम का सामान बाहर निकालकर अवैध निर्माण ढहा दिये जिनमें शेड और कमरे शामिल हैं। इस दौरान वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीन पर गौशाला का निर्माण कराया जाएगा और वहां धार्मिक स्थल विकसित किया जाएगा। वैष्णव संप्रदाय से ताल्लुक रखने वाले कम्प्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है। केवल 15 महीने चल सकी पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने उन्हें नर्मदा, क्षिप्रा और मन्दाकिनी नदियों के संरक्षण के लिये गठित न्यास का अध्यक्ष बनाया था।     

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लोकतंत्र बचाओ रैली यात्रा निकाली
राज्य की 28 विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को संपन्न उप चुनावों से पहले कम्प्यूटर बाबा ने अन्य साधु-संतों के साथ ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ निकाली थी। चुनाव क्षेत्रों से गुजरी इस यात्रा में कम्प्यूटर बाबा ने कांग्रेस के उन 22 बागी विधायकों को ‘गद्दार’ बताया था जिनके विधानसभा से त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल होने के कारण तत्कालीन कमलनाथ सरकार का 20 मार्च को पतन हो गया था। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा 23 मार्च को सूबे की सत्ता में लौट आई थी। कम्प्यूटर बाबा राज्य में इससे पहले भी कांग्रेस के पक्ष में चुनावी अभियान चला चुके हैं। नर्मदा नदी की कथित बदहाली के प्रमुख मुद्दे पर उन्होंने नवंबर 2018 के पिछले विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ संतों को राज्य भर में लामबंद करने का अभियान चलाया था। लोकसभा के पिछले चुनावों में उन्होंने भोपाल सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समर्थन में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किये थे। 

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