Tuesday, Oct 26, 2021
-->
know how one question changed ashishs life albsnt

जानें एक सवाल से कैसे गिरफ्तार हुए आशीष...तो मोदी के मौैन और कांग्रेस के सक्रियता के क्या हैं मायने?

  • Updated on 10/12/2021

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। जब किसानों को रोंदा जा रहा था तब तुम कहां थे- यहीं सवाल थे एसआईटी के जिसके जवाब ताकतवर गृह राज्य मंत्री के बेटे नहीं दे सकें। उसके बाद साफ हो गया कि आशीष मिश्रा गिरफ्तार कर लिये जाएंगे। और यहीं हुआ। यह हमेशा सुना गया है कि कानून के हाथ काफी लंबे होते है। यह एक बार फिर से साबित हो गया है। फिर गुहनगार देश के ताकतवर पद पर बैठे हुए गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा ही क्यों न हो। आखिरकार लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को हिरासत में ले लिया गया है। हालांकि आशिष मिश्रा की गिरफ्तारी इसलिये भी महत्वपूर्ण है कारण योगी सरकार ही नहीं बल्कि मोदी सरकार तक सवाल खड़े किये जा रहे थे।

मोदी के 20 साल पूरे होने पर अमित शाह ने कहा- मोदी जैसे नेता बिरले, जो लगा दें सबकुछ दांव

राज्य के डिप्टी सीएम के दौरे का विरोध कर रहे थे किसान

बता दें कि बीते रविवार को जब किसान समूह राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मोर्य के कार्यक्रम के विरोध में जमा हुए थे। तभी एक थार जीप स्पीड से आई और किसानों को रोंदते हुए गुजर गई। जिससे चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई। उसके बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हलचल मच गई। इससे हरकत में आई  योगी सरकार ने लखीमपुर खीरी क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया। साथ ही किसान ज्यादा न भड़के इसके लिये राकेश टिकेत को रातोंरात गाजीपुर बॉर्डर से उठाया गया। फिर प्रशासन और टिकेत मिलकर प्लान बनाये। जिसमें तय हुआ कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तबतक विपक्ष के एक भी नेता को घटनास्थल के इर्द-गिर्द घुसने नहीं दिया जाए। फिर प्लान बी के मुताबिक नाराज किसानों को मनाने में यह टीम जुट गई। आखिरकार नाराज किसान कुछ शर्तों के साथ मानने के लिये तैयार हो गई। लेकिन तबतक कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का राजनीतिक ड्रामा शुरु हो गया।

राकेश टिकेत ने BJP कार्यकर्ताओं की लिचिंग को जायज ठहराया, बताया-एक्शन का रिएक्शन

जब प्रियंका पहुंची लखीमपुर तो...

जिस तरह से प्रियंका लखीमपुर खीरी हिंसा में अतिसक्रिय हुई उससे साफ हो गया कि कांग्रेस हर हाल में दशकों से यूपी में खिसकी जमीन को हासिल करने में जुट गई है। इसके लिये संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने के बजाये 'राजनीतिक पर्यटन' आसान सा रास्ता दिखता है। इसी क्रम में प्रियंका गांधी पीड़ित किसानों से मिलने पर अड़ गई। लेकिन योगी सरकार ने प्रियंका गांधी को गिरफ्तार करके सीतापुर गेस्ट हाउस में रख दिया।

क्या बिहार में बन रहा नया सियासी समीकरण! चिराग से मिलने पहुंचे राहुल, चर्चाओं को लगे पंख

कांग्रेस ने लगाया सियासी तड़का

कांग्रेस पार्टी को ऐसा लगा कि लखीमपुर खीरी हिंसा को आंदोलन को जिंदा रखकर शायद पार्टी को खड़ा किया जा सकता है। इसकी एक झलक तब दिखी जब राहुल गांधी लखनऊ पहुंचे तब उनके अगल-बगल पंजाब और छत्तीसगढ़ के सीएम दोनों थे। वहीं देश में अलग तरह की राजनीति होने का दावा कर रही बीजेपी सवालों के घेरे में आ चुकी थी। यह अलग तरह की राजनीति ही थी कि जिसमें किसानों की कार से कुचलकर हत्या हो जाती है लेकिन पीएम और गृह मंत्री संवेदना के दो शब्द भी नहीं बोलते है। वो भी तब जब पीएम नरेंद्र मोदी 5 अक्टूबर को एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने लखनऊ पहुंचे हुए थे।      

हरियाणा CM की गृह मंत्री अमित शाह से गुहार, जल्द खुलवाएं सिंघू बार्डर व टिकरी बार्डर 

योगी आदित्यनाथ जुटे डैमेज कंट्रोल में

वहीं इससे इतर देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर शिकन साफ देखा जा सकता था। उन्होंने डेमेज कंट्रोल के लिये प्रियंका गांधी को लखीमपुर खीरी में किसानों से मिलने नहीं दिया तो दूसरी तरफ किसानों को मुआवजा और कथित दोषी आशीष मिश्रा को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया। राहुल गांधी किसी तरह लखनऊ एयरपोर्ट पहुंच चुके थे। पंजाब से गुरु सिद्धू जो कोपभवन में जा बैठे थे, तुरंत सक्रिय हो गए। कांग्रेस और विपक्षी दलों का ड्रामा ऐसा शुरु हुआ मानो देश के किसानों को इस बार न्याय दिलाकर ही रहेंगे नहीं तो सबकुछ खत्म हो जाएगा। शायद राजनीतिक रोटी सेंकने के लिये तबा गर्म था,और विपक्षी दल किसानों को न्याय दिलाने से ज्यादा अपनी पार्टी को जिंदा करने में जुटे हुए थे।  

लखीमपुर खीरी हिंसा : आशीष मिश्रा होंगे गिरफ्तार! पुलिस ने किया पूछताछ, फोन जब्त

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने बेटे को बताया बेकसूर

खैर, उधर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को दिल्ली तलब किया गया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। माना जा रहा था कि उन्हें इस्तीफा के लिये कहा जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। वही लखनऊ और दिल्ली में सपा,बसपा, कांग्रेस,आम आदमी पार्टी,टीएमसी,शिवसेना,एनसीपी और यहां तक कि जदयू ने भी इस घटना की तीखी निंदा की। विरोधियों का तर्क था कि अजय मिश्रा को अविलंब पद से हटा देना चाहिये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सकें। लेकिन अजय मिश्रा अपने बेटे को बेगुनाह साबित करने में जुटे रहे। वे यह भूल गए कि वे देश के गृह राज्य मंत्री है। विपक्ष का कहना था कि अगर अजय मिश्रा में थोड़ी-सी नैतिकता होती तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिये।

कैप्टन अभिमन्यू का दावा- किसान बेशक विरोध कर रहे हैं, लेकिन वोट भाजपा को ही देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने लिया मामले की संज्ञान

कभी-कभी लगता है कि देश में सुप्रीम कोर्ट न हो तो शायद सबकुछ संभव है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया और योगी सरकार को फटकार लगाई कि जब आशिष मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज हो गया तो उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? इस बीच राहुल गांधी को पांच लोगों के साथ लखीमपुर खीरी में पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति मिल गई। लेकिन राहुल गांधी पुलिस के गाड़ी और तय रुट पर चलने से मना कर दिया। उन्होंने गांधीगिरी दिखाई और धरने पर बैठ गए। योगी सरकार को 'आधुनिक गांधी' की जिद्द सुननी पड़ी। फिर राहुल गांधी अपने खास दो सिपहसालार पंजाब और छत्तीसगढ़ के सीएम के साथ सीतापुर गेस्ट हाउस के लिये रवाना हुए। जहां से प्रियंका गांधी के साथ राहुल गांधी को आगे पीड़ित परिवार से मिलना था।

चिराग का नीतीश पर निशाना,कहा- उपचुनाव में फिर जदयू का होगा खराब प्रदर्शन, जनता करेगी खारिज

राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के निशाने पर मोदी-योगी

एक बात साफ है कि कांग्रेस ने अतिसक्रियता दिखाकर साबित कर दिया कि राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिये उन्हें कमतर न आंका जाए। यानी बीजेपी से सीधी टक्कर सपा का ही नहीं बल्कि कांग्रेस से भी है। कम से  कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने में कांग्रेस सफल रही है। लेकिन कांग्रेस की तैयारी सिर्फ लखनऊ तक नहीं थी बल्कि दिल्ली में साल 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को मोदी के खिलाफ प्रोजेक्ट भी करना था।

सेना प्रमुख का बड़ा बयान,कहा- जम्मू-कश्मीर में अफगानी आतंकी घुसपैठ की तैयारी में,सेना सतर्क

अगले साल होने है प्रदेश में विधानसभा चुनाव

मतलब साफ है कि कांग्रेस के दुलारे 'प्रियंका गांधी और राहुल गांधी' को योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा साबित करना भी था। यानी लखीमपुर खीरी हिंसा से 'एक सधे सब सधे' चरितार्थ किये जा रहे थे। यहीं नहीं कांग्रेस को तीसरा फायदा लगा कि लखीमपुर खीरी हिंसा से उपजे सियासी संभावना के बैनर तले ही पंजाब और छत्तीसगढ़ की आंतरिक लड़ाई को निपटा दिया जाए।

लखीमपुर मामले में सरकार को किसान नेताओं का अल्टीमेटम, 11 तक न्याय करो वरना विरोध झेलो

पंजाब और छत्तीसगढ़ तक के सीएम पहुंचे लखनऊ

कारण पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू की जिद्द के सामने आलाकमान इतनी बार झुके अब यह पता नहीं लग रहा कि आखिर असल में नाराज कौन है- सिद्धू से कांग्रेस नेतृत्व या कांग्रेस आलाकमान से सिद्धू। वैसे नाराज जो हो लेकिन लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या से दर्द में कराह रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने ऐलान दो बार किया। पहला ऐलान किया कि प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी खत्म नहीं होती तो पंजाब से लखीमपुर तक पैदल मार्च करेंगे। वे पैदल मार्च तो नहीं किये लेकिन काफिले से चले तो उन्हें यूपी के बॉर्डर पर आगे जाने से रोक दिया गया। 

हरियाणा CM की गृह मंत्री अमित शाह से गुहार, जल्द खुलवाएं सिंघू बार्डर व टिकरी बार्डर 

सिद्धू ने पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग की

लेकिन सिद्धू... सिद्धू है। गुरु अड़ गए कि उन्हें पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने है। इसलिये प्रशासन उन्हें न रोंके। लेकिन प्रशासन का तर्क था कि योगी बाबा का कहना है कि लखीमपुर हिंसा में आ रहे विपक्षी दलों के नेता पांच से ज्यादा लोगों के साथ नहीं पहुंचे। काफी बहसबाजी और कम संख्या के बाद जैसे-तैसे सिद्धू पीड़ित परिवार से मिलें तो काफी चिंतित नजर आए। लेकिन तब तक उनका एक वीडियो काफी वायरल हो रहा था-जिसमें वे पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ बोलते देखे गए कि 2022 विधानसभा में यह व्यक्ति कांग्रेस का लुटिया डुबो कर रहेगा। 

प्रभू श्रीराम को वनवास जाते देख दर्शक हुए भावुक

जब आशीष मिश्रा हुए गिरफ्तार...

अभी नवजोत सिंह सिद्धू का दूसरा ऐलान बाकी है। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक आरोपी आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी नहीं होती तबतक वे मौन धारण करेंगे। लेकिन यह सच है कि उन्होंने मौन धारण कर लिया। फिर जैसे ही आशीष क्राइम ब्रांच पूछताछ के लिये पहुंचे सिद्धू ने अपना मौनव्रत तोड़ लिया। 

विशाखापट्टनम से गांजा तस्करी कर लाते थे दिल्ली

पीड़ित परिवार को सुप्रीम कोर्ट पर हैं भरोसा

हालांकि 12 घंटे तक लंबे पूछताछ के बाद आशीष मिश्रा गिरफ्तार कर लिये गए है। लेकिन इतने बड़े संवेदनशील मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रहस्यमयी चु्प्पी सबको खल रही है। तो दूसरी तरफ विपक्षी दलों की खासकरके कांग्रेस की अतिसक्रियता सबको बहुत कुछ कह रही है। खैर जिस पीड़ित परिवार ने अपना लाल खो दिया,उसको न्याय मिले- सब यहीं कामना करता है। 

 

 

comments

.
.
.
.
.