know how our brave freedom fighters have struggled in andaman & nicobars cellular jail

जश्न-ए-आजादी: स्वतंत्रता सेनानियों की यादों से भरी है अंडमान की सेल्यूलर जेल

  • Updated on 8/14/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। 15 अगस्त हमारे देश के लिए बहुत ही गर्व का दिन है। इस दिन हर भारतीय के अंदर देशभक्ति और अपने देश की आजादी को लेकर उत्साह खुदबखुद देखने को मिलता है। इस दिन सभी देशवासियों के मन में देशभक्ति उत्पन्न हो जाती है। फिर चाहे वो हिन्दू हो मुस्लिम हो सिक्ख हो चाहे इसाई हो। इस दिन सभी एक दूसरे को सम्मान और भाईचारे की नजर से देखते हैं। इस साल भारत में 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। आज हम आपको कुछ ऐसे ही स्वतंत्रता से जुडे़ किस्सों के बारे में बताएंगे, जो आपने शायद ही कभी सुने होंगे। 

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आपको लिए चलते हैं अंडमान एंड निकोबार (Andaman and Nicobar) की सेल्यूलर जेल की ओर। इस जेल से जुड़ी बातें जानकर आप दंग हो जाएंगे। ये तो आप बखूबी जानते होंगे कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने किस तरह कठोर संघर्ष करकर हमें इस काबिल करा कि आज हम पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं। लेकिन इसके लिए उन्हे क्या कुछ सहना पड़ा आइये जानते हैं। 

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बुरा बर्ताव भी सहना पड़ा
अंडमान निकोबार की सेल्यूलर जेल से हमारे "फ्रीडम फाइटर्स" का पुराना नाता रह चुका है। इस जेल में हमारे जांबाज फ्रीडम फाइटर्स के साथ बेहद बुरा बर्ताव किया जाता था। बता दें कि इस सेल में कैदियों से पत्थर तोड़ने, पानी भरने जैसे कड़ी मेहनत वाले काम कराए जाते थे। उनको इस तरह से टॉर्चर किया जाता था कि उन्हे अपनी प्यास बुझाने के लिए भी जेल कर्मियों से पूछना पड़ता था। जिसमें "नंद गोपाल" (Nand gopal), "सोहन सिंह" (Sohan singh), "वामन राव जोशी" (Vaman rao joshi) जैसे कई महान वीर स्वतंत्रता सेनानी इस सेल में सजा काट चुके हैं।

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बता दें कि "वीर सावरकर" (Veer savarkar)  को भी "स्वाधीनता आंदोलन" से जुड़े होने की वजह से अंग्रेजों ने इस सेल्यूलर जेल में कैद कर लिया था। बता दें कि साल 1930 में मशहूर स्वतंत्रता सेनानी "महावीर सिंह" (Mahavir singh) जो आजादी में "शहीद भगत सिंह" (Shahid bhagat singh) के सहयोगी रह चुके हैं उन्होने इस जेल में "अत्याचार" के खिलाफ भूख हड़ताल की थी।

बता दें कि यह जेल अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी "पोर्ट ब्लेयर" है। यह सेल स्पैशल हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए अंग्रेजों ने बनवाई थी। जहां वे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों पर अपनी हुकूमत चला सकें। यह जेल इसलिए बनाई गई थी ताकि कैदी आपस में नजदीकियां बढ़ाकर स्वतंत्रता के लिए कोई उपाय न निकाल सकें। यहां आपस में किसी भी कैदी को में मिलने नहीं दिया जाता था। हर कैदी के लिए जगह निर्धारित की गई थी।

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काला पानी के लिए फेमस है सेल

आपको बता दें कि उस दौरान हमारे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के उपर कैमरे से निगरानी भी की जाती थी। जेल में कैदियों को रखने के लिए लगभग 694 कोठरियां बनी हुई हैं। जिसमें से ज्यादातर में हमारे सेनानियों को रखा गया था। जेल बहुत ही पुरानी बनी हुई है। बता दें कि यह सेल अपने कैदियों को "काला पानी" की सजा देने के लिए फेमस थी। जेल चारों ओर समुद्री पानी से घिरी हुई है।

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