Tuesday, Feb 18, 2020

लैंड पूलिंग पॉलिसी: दिल्ली के 89 गांवों को मिला शहरीकृत गांव का दर्जा

  • Updated on 5/18/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/ब्यूरो।  लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत जल्द ही दिल्ली के बाहरी इलाकों में विकास को गति मिलेगी, करीब 20 लाख फ्लैट तैयार हो सकेंगे। एलजी ने राजधानी के 89 गांवों को शहरीकृत गांवों का दर्जा देने का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही आपसी भागेदारी के जरिये किसानों अथवा डेवलपर के साथ मिलकर मकान बनाने की केंद्र सरकार की योजना का रास्ता भी अब पूरी तरह से साफ हो गया।

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माना जा रहा है कि अगले दो से तीन माह में इस योजना पर कार्य भी शुरू हो जाएगा, क्योंकि कई बड़े डेवलपर पहले से ही इन इलाकों में जमीन पर अपने प्रोजेक्ट लांचिंग की घोषणा कर चुके हैं। योजना पर वर्ष 2015, मई माह में ही केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से मुहर लग चुकी है। 

लगभग दो वर्ष से अधिक समय से लैंड पूलिंग पॉलिसी दिल्ली सरकार की मंजूरी के इंतजार में अटकी हुई थी। कई बार कहे जाने के बावजूद दिल्ली सरकार की ओर से इन गांवों को शहरीकृत गांवों का दर्जा देने के मामले में कई तरह की अड़चनें बताई जा रही थीं। पिछले दिनों इसी मसले पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने विभिन्न निकायों और दिल्ली सरकार के साथ बैठक भी की थी, जिसमें इन गांवों को शहरीकृत गांवों का दर्जा देने के संबंध में फाइल को पास करने से जुड़ा मामला प्रमुख था। 

एलजी अनिल बैजल की ओर से सभी 89 गांवों को शहरीकृत गांवों का दर्जा देते हुए नोटिफिकेशन जारी किया गया है। आदेश के अनुसार उत्तरी दिल्ली के पचास गांव तथा दक्षिणी दिल्ली के 39 गांवों को शहरीकृत गांवों का दर्जा दिया गया है। जबकि डीडीए की ओर से शेष लगभग 115 गांवों को पहले ही शहरीकृत गांवों का दर्जा दिया जा चुका है। बताया जाता है कि कुल 200 ग्रामीण इलाकों को इस पॉलिसी में शामिल करने की डीडीए की यह योजना केवल दिल्ली सरकार की मंजूरी न मिलने की वजह से अब तक अटकी हुई थी। सभी 89 गांव उत्तरी व दक्षिणी दिल्ली के बाहरी इलाके में आते हैं।

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हालांकि शुरुआत में 95 गांवों को शहरी ग्रामीण क्षेत्र का दर्जा दिया जाना था, लेकिन बाद में छह गांवों को यह दर्जा मिल गया था। किंतु शेष गांवों में यह मामला अब तक अटका था। इन इलाकों को शहरीकृत ग्रामीण इलाके का दर्जा मिलने के बाद अब यहां 89 गांवों को शहरीकृत गांव का दर्जा मिलना एक ऐतिहासिक निर्णय है। काफी समय से इसके लिए प्रयास किया जा रहा था।  इससे सस्ते मकान बनाए  जा सकेंगे और करीब 20 लाख परिवारों को आवास मिल सकेगा। यही नहीं राजधानी में अनधिकृत कॉलोनियों के बढऩे पर भी रोक लगेगी। 

क्या हैं नियम

  • लैंड पूलिंग की दो श्रेणियां हैं: 20 हेक्टेयर और उससे अधिक के लिए श्रेणी-1 और 2 हेक्टेयर से लेकर 20 हेक्टेयर से कम के लिए श्रेणी-2
  • श्रेणी-1 में (20 हेक्टेयर और उससे अधिक) में 60 प्रतिशत भूमि विकास कर्ता संस्था (डीई) को लौटाई जाएगी और 40 प्रतिशत भूमि  डीडीए के पास रहेगी।
  •  श्रेणी-2 में (2 हेक्टेयर से लेकर 20 हेक्टेयर से कम ) में 48 प्रतिशत भूमि विकास कर्ता संस्था (डीई) को लौटाई जाएगी और 52 प्रतिशत भूमि डीडीए रखेगा।
  •  श्रेणी-1 में भूमि उपयोग के संबंध में डीई को लौटाई गई भूमि (60 प्रतिशत) में 53 प्रतिशत सकल रिहायशी, 2 प्रतिशत नगर स्तरीय सार्वजनिक और अद्र्धसार्वजनिक सुविधाआें और 5 प्रतिशत नगर स्तर व्यावसायिक भूमि होगी। 
  • श्रेणी-2 में भूमि उपयोग के संबंध में शर्त पर डीई को लौटाई गई भूमि (48 प्रतिशत) का वितरण 43 प्रतिशत सकल आवासीय, 2 प्रतिशत नगर स्तरीय सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक सुविधाएं और 3 प्रतिशत नगर स्तरीय व्यावसायिक भूमि होगी।

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