Monday, Nov 28, 2022
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लखनऊ में भी हैं गोरखपुर जैसे ही हालात, बंद हो सकती है ऑक्सीजन की सप्लाई

  • Updated on 8/13/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। गोरखपुर में ऑक्सीजन की सप्लाई कंपनी ने समय पर बिल पेमेंट न होने के कारण रोक दी थी और इसी वजह से इतनी बड़ी संख्या में मासूमों की जान चली गई। गोरखपुर की क्या बात करें उत्तर प्रदेश की राजधानी के केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल वि.) में भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। यहां भी पिछले तीन माह का कंपनी को पेमेंट नहीं मिल सका है। कंपनी के बिल लगातार पेंडिंग पड़े हैं।

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जिससे कभी भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है केजीएमयू में पिछले दो वर्ष पहले पांच ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। प्रत्येक की क्षमता 20 किलोलीटर की है। इनके लिए लिक्विड ऑक्सीजन गाजियाबाद की कंपनी लिंडे इंडिया लिमिटेड सप्लाई करती है। केजीएमयू में पांच प्लांट लगने के बाद से ऑक्सीजन का संकट समाप्त हो गया।

समझौते के मुताबिक, कंपनी 60 लाख तक की उधारी देती है, लेकिन उससे आगे के लिए पेमेंट जरूरी है। फिर भी केजीएमयू प्रशासन हर माह जीवनदायी ऑक्सीजन पेमेंट नहीं कर पाता है।

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सिलेंडर से सस्ती है लिक्विड ऑक्सीजन
लिक्विड ऑक्सीजन, सिलेंडर की अपेक्षा सस्ती पड़ती है। ऑक्सीजन सिलेंडर से सप्लाई करने में 30 परसेंट का नुकसान हो जाता है और कंपनी भी हमेशा सिलेंडर खाली ही भेजती है। सिलेंडर से ऑक्सीजन 14 रुपए किलो पड़ती है। जबकि सिलेंडर में 30 प्रतिशत आक्सीजन बचने से पहले उसे बंद करना पड़ता है इसको देखते हुए यह 17 से 20 रुपए तक पड़ती है। जबकि लिक्विड ऑक्सीजन सिर्फ 11.23 रुपए प्रति किलो आती है।

लिक्विड ऑक्सीजन है सबसे सुरक्षित
डॉक्टर्स के अनुसार लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई करना ही अब तक सबसे अधिक सुरक्षित है। एम्स दिल्ली सहित देश के सभी बड़े संस्थानों में लिक्विड ऑक्सीजन से ही मरीजों को ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है। 

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