Thursday, May 06, 2021
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मराठा आरक्षण पर SC ने सभी राज्यों से मांगा जवाब, 15 मार्च को होगी विस्तृत सुनवाई

  • Updated on 3/8/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। महाराष्ट्र (Maharashtra) में मराठा आरक्षण का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट इस समय इस बात पर चर्चा कर रहा है कि क्या राज्य आरक्षण दे सकता है या फिर संविधान के अनुच्छेद 102 वें संशोधन के तहत अब यह अधिकार केवल संसद के पास रह गया है। इस बात पर विचार करते हुए संविधान पीठ ने सभी राज्यों को नोटिस जारी करते हुए उनसे उनका पक्ष भी पूछा है। बता दें जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बैंच इस मसले पर विचार कर रही है। 

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महाराष्ट्र सरकार ने दिया था आरक्षण 
बता दें महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठाओं को अलग से आरक्षण देने के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्यों से इस बात पर भी चर्चा की है कि क्या 50 प्रतिशत तक आरक्षण की सीमा को बनाए रखने के फैसले पर दोबारा चर्चा होनी चाहिए ? कोर्ट ने इस पूरे मसले पर चर्चा के लिए 15 मार्च की तारीख को सुरक्षित रखा है। बता दें साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने मराठाओं को ओबीसी से अलग सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में 16 फीसद आरक्षण देने का ऐलान किया था।  

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कोर्ट ने राज्यों को किय नोटिस जारी
सरकार ने यह निर्णय जस्टिस एनवी गायकवाड़ की अध्यक्षता वाले पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद लिया था। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट के 50 फीसद आरक्षण की सीमा वाले फैसले को भी पार कर लिया गया था। इसमें सरकार ने 27 फीसद ओबीसी आरक्षण से अलग मराठाओं को 16 फीसद आरक्षण दिया था। बता दें इसके बाद इस आरक्षण को दो आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। पहला आधार थे इस आरक्षण को सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया। इसका कोई वैधानिक आधार नहीं है। दूसरा यह आरक्षण कोर्ट के उस फैसले का उल्लंघन करता है जिसमें आरक्षण की सीमा को अधिकतम 50 फीसद तक रखा गया था।  

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हाईकोर्ट ने माना था सही
बता दें इसके अलावा साल 2019 में हाईकोर्ट ने इस फैसले पर सुनवाई के दौरान इस आरक्षण के पक्ष में अपना फैसला दिया था। कोर्ट ने माना था कि आरक्षण की सीमा को असाधारण स्थिति में बढ़ाया जा सकता है। मगर कोर्ट सरकार के द्वारा दिए गए आरक्षण की सीमा से खुश नहीं था। उसने इसे घटाकर 13 फीसद आरक्षण नौकरी में और 12  फीसद आरक्षण उच्च शिक्षा में दिया गया है। अब कोर्ट ने इस पर एक बार फिर से सवाल उठाते हुए सरकारों से कई बात पूछी हैं। पूछा है कि क्या महाराष्ट्र में मराठाओं को आरक्षण देना जरुरी था।     

 

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