Monday, Dec 06, 2021
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मंडियां ढहने की राह पर, किसान विरोधी कॉर्पोरेट समर्थक हैं कानून: संयुक्त किसान मोर्चा 

  • Updated on 9/18/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटन। तीन किसान विरोधी, कॉर्पोरेट समर्थक कानूनों के बाद मोदी सरकार के मंडी बने रहने के लंबे दावों को खारिज करते हुए विभिन्न राज्यों में मंडियां ढहने की राह पर हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने यह दावा करते हुए कहा कि इसीलिए विभिन्न राज्यों में भाजपा नेताओं का विरोध किया जा रहा है  और अब  यह केवल पंजाब और हरियाणा तक सीमित नहीं है। 
      संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने सिंघू बॉर्डर पर बैठक की और उसके बाद बताया कि मंडी प्रणाली में सच्चे सुधारों के बजाय ताकि अधिक किसानों को विनियमित बाजारों या मंडियों के सुरक्षात्मक कवरेज के तहत लाया जा सके और मंडी के अंदर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने ताकि किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकें, क्रमिक सरकारों द्वारा जो तथाकथित सुधार लाए गए थे उसने विनियमित कृषि बाजारों को कमजोर और पतन के ओर धकेल दिया है। 
    किसान नेता हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा एपीएमसी बाईपास अधिनियम के तहत दो असमान बाजार व्यवस्था बनाने की नीति, जहां अनियमित व्यापार क्षेत्र कॉर्पोरेट और व्यापारियों के फायदे के लिए बनाया गया था, मंडी प्रणाली की कमर तोडऩे के लिए आखिरी तिनका बन गया। प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात और कृषि मंत्री के गृह राज्य मध्य प्रदेश से आ रहे आंकड़े बेहद आपत्तिजनक हैं और किसान आंदोलन द्वारा किए जा रहे संघर्ष को सही ठहराते हैं। वहीं किसान नेताओं ने कहा कि देश भर में कई स्थानों पर 27 सितम्बर के बंद की तैयारी चल रही है। 
 

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